रतलाम का वो 'चंचल' सिपाही जिसकी किस्मत संजय गांधी के एक दौरे ने बदल दी
(नैवेद्य पुरोहित) आज के दौर में अगर आपको किसी बड़े अखबार में नौकरी चाहिए तो रिज्यूमे, ईमेल और न जाने कितने राउंड के इंटरव्यू से गुजरना पड़ता है। लेकिन पत्रकारिता का एक दौर वो भी था जब नियुक्तियाँ न्यूज़ रूम के बंद कमरों में नहीं बल्कि 'रिश्तों की गर्माहट' और 'अदब' के साथ तय होती थीं। दैनिक भास्कर इंदौर लॉन्चिंग टीम के गुमनाम नायक सीरीज में आज से हमारे नए किरदार है रमेश मिश्रा 'चंचल'। बात साल 1980 के इर्द-गिर्द की है। भोपाल की फिजाओं में सियासत और पत्रकारिता साथ-साथ परवान चढ़ रही थी। उन्हीं दिनों संजय गांधी का भोपाल आना हुआ। रमेश मिश्रा तब रतलाम के एक युवा और ऊर्जावान पत्रकार हुआ करते थे। साथ में थे उनके दोस्त कांग्रेस नेता मनोहर बैरागी जिन्हें अपना रसूख दिखाना था और कवरेज भी तगड़ा चाहिए था। उस समय भोपाल में 'दैनिक भास्कर' के सर्वेसर्वा हुआ करते थे स्व द्वारका प्रसाद अग्रवाल। रवायत कुछ ऐसी थी कि सेठजी से मिलने खाली हाथ नहीं जाया जाता था। तो साहब, एक बढ़िया फलों की डलिया सजाई गई और साथ में मनोहर बैरागी जी ने थमाया 25 हजार का एक लिफाफा विज्ञापन के लिए। ...