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Showing posts from November, 2024

वर्चुअल न्यूज़ एंकर: पत्रकारिता का भविष्य या चुनौती ?

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(नैवेद्य पुरोहित) बेनेट यूनिवर्सिटी के करियर सर्विसेस सेल और टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया द्वारा आयोजित 'एआई स्फीयर' में पत्रकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञों ने "वर्चुअल न्यूज़ एंकर: बायस, ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी" विषय पर गहन चर्चा की। यह कॉन्फ्रेंस मीडिया और तकनीक के बढ़ते समन्वय के बीच पत्रकारिता के भविष्य पर रोशनी डालने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इस चर्चा में भारत के प्रतिष्ठित मीडिया विशेषज्ञ शामिल हुए: 1. आर. जय कृष्ण - महासचिव, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन 2. चित्रांशु तिवारी - प्रोडक्ट और रेवेन्यू डायरेक्टर, न्यूज़लॉन्ड्री 3. मेघना डेका - एडिटर आउटपुट डेस्क, टाइम्स नाउ 4. देविका मेहता - उप संपादक, जागरण न्यू मीडिया 5. लितीषा मंगत पांडा - हेड ऑफ बिज़नेस, ओडिशा टेलीविज़न नेटवर्क वर्चुअल न्यूज़ एंकर: उभरते अवसर और चुनौतियाँ पैनलिस्टों ने बताया कि कैसे वर्चुअल न्यूज़ एंकर तकनीक के जरिए पत्रकारिता को नए आयाम दे रहे हैं। साथ ही वर्चुअल एंकर की बढ़ती उपस्थिति के साथ कई सवाल खड़े होते हैं। पहला, एआई सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग कि...

द साबरमती रिपोर्ट: गोधरा कांड की यादें

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(नैवेद्य पुरोहित) एक फिल्म जो सच्चाई को उजागर करती है भारतीय सिनेमा हमेशा से सामाजिक मुद्दों, ऐतिहासिक घटनाओं और मानवीय भावनाओं को उकेरने का एक सशक्त माध्यम रहा है। फिल्म द साबरमती रिपोर्ट इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 2002 में गुजरात में हुए गोधरा कांड पर आधारित एक मार्मिक प्रस्तुति है। निर्माता एकता कपूर और निर्देशक धीरज सरना की सूझबूझ, कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय के जरिए यह फिल्म न केवल एक घटना का दस्तावेज़ है, बल्कि पत्रकारिता के सिद्धांतों, सत्य की खोज और सत्ता के प्रभावों का गहन विश्लेषण भी है। विक्रांत मेस्सी, राशी खन्ना और रिद्धि डोगरा जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों के अभिनय से सजी यह फिल्म पत्रकारिता की जटिलताओं और सत्ता के खेल का आईना दिखाती है। 23 नवंबर शनिवार को जब मैंने यह फिल्म देखी तो यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक अनुभव था। जिसने मुझे पत्रकारिता में चौथी पीढ़ी होने के नाते समाज के प्रति अपने कर्तव्य पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। हर उस व्यक्ति को जो सत्य के प्रति सजग है उसे यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। फिल्म की कहानी: सच का सफर फिल्म की शुरुआत 200...

आर्ट ऑफ लिविंग ने 2024 को मेरे लिए यादगार साल बना दिया !

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(नैवेद्य पुरोहित) कभी-कभी जिंदगी में कुछ पल ऐसे आते हैं जो हमारी पूरी सोच, हमारा नज़रिया और हमारी आत्मा को अंदर से बदल देते हैं। मेरे लिए 2024 ऐसा ही एक साल रहा। इस साल मैंने आर्ट ऑफ लिविंग की YES!+ वर्कशॉप में हिस्सा लिया, और यह अनुभव मेरे जीवन का सबसे खास और यादगार बन गया। शुरुआती संकोच और पहला अनुभव अप्रैल 2024 की बात है। एनएसएस की तरफ से पहली बार टाइम्स ग्रुप की बेनेट यूनिवर्सिटी में आर्ट ऑफ लिविंग YES!+ वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा था। जब मैंने इस वर्कशॉप के बारे में सुना, तो दिल में एक झिझक थी। बड़ी वजह थी इसकी फीस - ₹2500। मुझे लगा कि मेरे लिए यह ज़रूरी थोड़ी ना है यह तो उन लोगों के लिए है जो अवसाद से ग्रस्त है...जीवन से थक चुके है....मुझे इसकी क्या जरूरत मेरी ज़िंदगी में तो सब अच्छा ही खुशहाल चल रहा है....! एक सवाल था मन में कि क्या यह वर्कशॉप वाकई इस रकम के लायक होगी ? क्या इससे मेरी जिंदगी में कोई फर्क पड़ेगा ? हालांकि, एक एनएसएस स्वयंसेवक और वर्कशॉप आयोजक होने के नाते मैंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला कर लिया। उस वक्त मेरे मन में बस यही था कि यह बस मात्र एक 'जिम...

साहित्य आज तक 2024: एक अविस्मरणीय अनुभव

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(नैवेद्य पुरोहित) बीते रविवार को मैंने इंडिया टुडे ग्रुप के लिट फेस्ट साहित्य आज तक में एक विज़िटर के रूप में भाग लिया। सप्ताह का आखिरी दिन एक बेहतरीन जगह पर बिताने के इरादे से मैंने इस कार्यक्रम के लिए रजिस्टर करने का फैसला लिया। मात्र ₹499 में सुबह से लेकर देर रात तक सभी स्टेज पर आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करने का मौका मिल रहा था जिसमें लल्लनटॉप का भी विशेष कार्यक्रम लल्लनटॉप अड्डा शामिल था। सुबह जुबिन नौटियाल के शो से लेकर देर रात श्रेया घोषाल के संगीत कार्यक्रम तक यह आयोजन कला, साहित्य और संगीत के दिवानों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं था। कार्यक्रम की शुरुआत सबसे पहले सुबह जुबिन नौटियाल के ऊर्जा से भरपूर परफॉर्मेंस के साथ हुई जिसने पूरे दिन के लिए शरीर में एनर्जी भर दी। जुबिन ने अपने लगभग सारे फेमस गाने गाए दिल ग़लती कर बैठा है ग़लती कर बैठा है दिल....हम्मा हम्मा हम्मा...मेरी मां के बराबर कोई नहीं....आखिर में सबसे फेमस कबीर सिंह मूवी का बात बिगड़ी है इस कदर दिल है टूटा टूटे है हम तुझे कितना चाहे और हम....! पूरे दिन में मुझे सिर्फ़ दो चीज़ों ने काफी आकर्षित किया पहला शशि थरूर ...

नारद पत्रकारिता पीठ: एक अधूरा वादा

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(नैवेद्य पुरोहित) मध्यप्रदेश का जबलपुर एक ऐसी शख्सियत का घर रहा है जिसने पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान दिया - स्वर्गीय हुक्मचंद नारद। उन्हें श्रमजीवी पत्रकारिता का पितामह कहा जाता है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भूमिका आज भी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनकी स्मृति में 1999 में जबलपुर के सिविक सेंटर में एक कांस्य प्रतिमा का अनावरण हुआ था जिसके माध्यम से उनकी स्थायी विरासत को चिरस्थायी बनाने की कोशिश की गई। इस मौके पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा 'नारद पत्रकारिता पीठ' की स्थापना का भी वादा किया गया था, जो पत्रकारिता में उत्कृष्टता और सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने हेतु समर्पित संस्था के रूप में प्रस्तावित थी। 25 वर्षों का लंबा वक्त गुजर चुका है, लेकिन यह संकल्प अभी भी अधूरा है। स्वर्गीय हुक्मचंद नारद के पोते डॉ. संदीप नारद और पत्रकारिता क्षेत्र के अन्य अनेक लोगों ने इस पर निरंतर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। कुछ समय पहले, डॉ. नारद ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर इस दिशा में त्वरित कार्रवाई का आग...

छात्र शक्ति के आगे झुका बेनेट यूनिवर्सिटी प्रशासन, ‘काला कानून’ लिया वापस

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(नैवेद्य पुरोहित) उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित टाइम्स ग्रुप की बेनेट यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध आखिरकार रंग लाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15 नवंबर की शाम 7 बजे सभी विद्यार्थियों को एक मेल भेजा जिसमें 'मौसम की खराब स्थिति' के कारण 15 नवंबर 2024 की रात से यूनिवर्सिटी कैंपस में नए नियम लागू किए जाने का उल्लेख था। इस नए नियम के मुताबिक छात्रों को नए हॉस्टल समय, यूनिवर्सिटी फूड आउटलेट जल्दी बंद करने और रात में फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध समेत दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य लिखा था। फूड डिलीवरी पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर उठे विवाद में छात्रों ने जमकर हंगामा किया। हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया इसके दबाव के आगे प्रशासन ने इस 'काले कानून' को अगले ही दिन हटाने की घोषणा की। आखिर क्या था पूरा मामला? पिछले कुछ दिनों से बेनेट यूनिवर्सिटी के छात्रों में असंतोष चरम पर था। हॉस्टल में खाने की खराब गुणवत्ता, रिपीटेड मेनू और फिर अंत में फूड डिलीवरी पर लगाए प्रतिबंध ने छात्रों को आगबबूला कर दिया था। प्रशासन के इस कदम से छात्रों को अपने पसंद के भोजन तक पहुंच नहीं मिल प...

आपके खून की एक बूंद किसी और के लिए जीवन की एक बूंद हो सकती है !

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(नैवेद्य पुरोहित) आजकल की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में हर कोई अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहता है। जब बात समाज सेवा और दूसरों की जान बचाने की हो तो इंसानियत के नाते हर व्यक्ति का फ़र्ज़ बनता है कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाए। इसी भावना से प्रेरित होकर मैंने आज दिनांक 12 नवंबर 2024 को नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) बेनेट यूनिवर्सिटी और ओम चैरिटेबल ब्लड बैंक, नोएडा द्वारा आयोजित ब्लड डोनेशन ड्राइव 4.0 में 450 मिलीलीटर रक्त दान किया। यह मेरे लिए एक विशेष अनुभव रहा क्योंकि यह लगातार तीसरा साल है जब मैंने इस नेक काम में अपना योगदान दिया। पहला कदम और संकल्प मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैं 17 साल की उम्र में कॉलेज फर्स्ट ईयर में एनएसएस के ही द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में बतौर स्वयंसेवक शामिल हुआ था। लेकिन उस समय कम उम्र के कारण डॉक्टर्स ने मुझे रक्तदान करने की अनुमति नहीं दी थी। 18 वर्ष का होने के बाद जब पिछले वर्ष मुझे पहली बार रक्तदान का अवसर मिला तो मैं बहुत खुश हुआ। तब से मैंने यह प्रण लिया कि हर साल कम से कम एक बार रक्तदान ज़रूर करूंगा और जरूरतमंदों की सेवा करूंगा! रक्तदान: लोगों को जीवन क...

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: एक प्रेरणादायक रैली!

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रविवार 10 नवंबर 2024 को मुझे गर्ल चाइल्ड एजुकेशन विषय पर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव में एक रैली का आयोजन करने का सौभाग्य मिला। यह रैली राष्ट्रीय सेवा योजना, बेनेट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर विकास संचार असाइनमेंट के तहत आयोजित की गई थी। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को बेटियों की शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करना था। इस दौरान, मेरी मुलाकात नौवीं कक्षा की एक छात्रा से हुई जिसने आत्मविश्वास के साथ अपने डॉक्टर बनने के सपने को साझा किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उस बच्ची का अपने समाज के लिए बेहतर भविष्य का सपना देखना मेरे लिए प्रेरणादायक था। इसने मुझे जमीनी स्तर पर बदलाव की शक्ति पर विश्वास दिलाया जहां सीमित साधनों के बावजूद लोग समाज और देश की सेवा के लिए प्रेरित होते हैं। मैं इस आयोजन को सफल बनाने के लिए डॉ. मोइना खान का आभारी हूं जिन्होंने इस रैली को असाइनमेंट के हिस्से के रूप में स्वीकृति दी और डॉ. अजय यादव का भी आभार जो NSS के साथ इस रैली में हमारा साथ देने के लिए आगे आए। साथ ही उन 20 समर्पित स्वयंसेवकों का भी धन्यवाद जिन्होंने इस प्रयास को सफल बनाने में मेरे स...