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Showing posts from May, 2023

आख़िर क्यों बढ़ रहा है लिव-इन रिलेशनशिप का ट्रेंड ?

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“मैं आज जिस लड़के के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही हूं उससे शादी करने की पूरी कोशिश करूंगी, लेकिन मेरे लिए माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं है”। “मैं काफी सकारात्मक हूं कि वे इस फैसले में मेरे साथ रहेंगे”। “मैं और मेरा पार्टनर दोनों अपने लक्ष्यों को हासिल करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं ताकि हम अपने माता-पिता से इसके बारे में आसानी से पूछ सकें”। यह सब कहना है बीते 3 साल से लिव इन रिलेशनशिप में रह रही पूनम का। वे अभी हाल फिलहाल चंडीगढ़ में एक बीपीओ में काम कर रही है। पूनम बीते 3 साल से लगातार लिव-इन में रह रही है उनका इस मसले पर कहना है, “लिव इन रिलेशनशिप एक ऐसा रिश्ता है जहां दो लोग जो आपस में प्यार करते है साथ में रहने का निर्णय लेते हैं ताकि वे एक दूसरे को अच्छे से जान पाएं और एक रिश्ता तब ही ज्यादा अच्छा हो पाता है जब आप आपके पार्टनर को अच्छे से जानते हैं।“ आखिर लिव इन की उन्हें जरूरत क्या पड़ी इस पर पूनम का कहना था कि, “सबसे पहली चीज यह कि मेरे लिए लिव इन कोई जरूरत नहीं थी यह सिर्फ एक अच्छा जरिया था एक दूसरे को जानने का लिव इन रिलेशनशिप को मैंने एक जरूरत के तौर पर कभी नहीं देखा है।“ अ...

बीयू एमयूएन में एआईपीपीएम समिति का पहला दिन

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"बर्बाद ए गुलिस्ता करने को एक संघी ही काफ़ी है, हर शाख पे संघी बैठा है...अंजाम ए गुलिस्ता देखेगी अंजाम ए गुलिस्ता देखेगी जय हिन्द अल्लाह हू अकबर" उक्त बातें एआईपीपीएम (अखिल भारतीय राजनीतिक दलों की बैठक) समिति में बी यू एमयूएन (मॉडल यूनाइटेड नेशंस) के पहले दिन असुउद्दीन ओवैसी के प्रतिनिधि ने कही। पहला दिन सभी के लिए एक उत्साहजनक अनुभव था, जो भारत को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे पर चर्चा करने और विचार-विमर्श करने के लिए विभिन्न स्कूलों-कॉलेजों के छात्रों को एक साथ लाया। एआईपीपीएम भारत में राजनीतिक दलों के लिए देश को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने और उनका समाधान करने के लिए एक साथ आने का एक महत्वपूर्ण मंच है। पहला दिन उद्घाटन समारोह के साथ शुरू हुआ जहां सभी सभापतियों ने अपना परिचय दिया और समिति के एजेंडे का अवलोकन प्रदान किया। समिति का एजेंडा "लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) की संवैधानिक वैधता" था। विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की वर्तमान स्थिति, इ...