20 की उम्र में चारधाम पूरे, रिश्तों का पंचधाम भी जी लिया!
कुछ यात्राएँ सिर्फ़ पर्यटन के लिए नहीं होतीं, वो जीवन के किसी अधूरे हिस्से को पूरा करती हैं। मेरे लिए हाल ही में सम्पन्न हुई जगन्नाथ पुरी यात्रा वैसी ही थी क्योंकि इस सफ़र के साथ मेरे चारधाम पूरे हो गए और वो भी सिर्फ़ 20 साल की उम्र में...! इस बार बात सिर्फ़ तीर्थ की नहीं थी इस बार बात थी परिवार की, पीढ़ियों से चली आ रही दोस्ती की, बचपन की कुछ यादों की और 25 लोगों के साथ वो हर पल बाँटने की, जो शायद ज़िंदगी भर साथ चलेंगे। 8 जून 2025 – उड़ान सिर्फ़ आकाश की नहीं, रिश्तों की थी। सुबह के 7:30 बजे, हम सभी इंदौर एयरपोर्ट पर मिले। माहौल ऐसा था जैसे सब लावलश्कर के साथ किसी शादी की बारात रवाना हो रही हो। पापा-मम्मी, मैं, नायशा, विन्नी हम पांचों तो थे ही, इसके अलावा हमारे साथ थे आतिश मेहता अंकल की फैमिली (ज्योति आंटी, माही और उनके भतीजे-भतीजी झलक, पलक, कलश), धर्मेन्द्र राठौर अंकल की फैमिली (योगिता आंटी, तनु दीदी, सुहानी, हार्दिक और उनकी भतीजी दीप्ति)। इसके अलावा अभिषेक ब्रिक्स के ऑफिस से हमारी एक्सटेंडेड फेमिली जैसे ही राजेश माहेश्वरी (काबरा सर), सरोज काबरा मैम, ज्योति दुबे दीदी, मोना राजाव...