Posts

Showing posts from June, 2025

20 की उम्र में चारधाम पूरे, रिश्तों का पंचधाम भी जी लिया!

Image
कुछ यात्राएँ सिर्फ़ पर्यटन के लिए नहीं होतीं, वो जीवन के किसी अधूरे हिस्से को पूरा करती हैं। मेरे लिए हाल ही में सम्पन्न हुई जगन्नाथ पुरी यात्रा वैसी ही थी क्योंकि इस सफ़र के साथ मेरे चारधाम पूरे हो गए और वो भी सिर्फ़ 20 साल की उम्र में...! इस बार बात सिर्फ़ तीर्थ की नहीं थी इस बार बात थी परिवार की, पीढ़ियों से चली आ रही दोस्ती की, बचपन की कुछ यादों की और 25 लोगों के साथ वो हर पल बाँटने की, जो शायद ज़िंदगी भर साथ चलेंगे। 8 जून 2025 – उड़ान सिर्फ़ आकाश की नहीं, रिश्तों की थी। सुबह के 7:30 बजे, हम सभी इंदौर एयरपोर्ट पर मिले। माहौल ऐसा था जैसे सब लावलश्कर के साथ किसी शादी की बारात रवाना हो रही हो। पापा-मम्मी, मैं, नायशा, विन्नी हम पांचों तो थे ही, इसके अलावा हमारे साथ थे आतिश मेहता अंकल की फैमिली (ज्योति आंटी, माही और उनके भतीजे-भतीजी झलक, पलक, कलश), धर्मेन्द्र राठौर अंकल की फैमिली (योगिता आंटी, तनु दीदी, सुहानी, हार्दिक और उनकी भतीजी दीप्ति)। इसके अलावा अभिषेक ब्रिक्स के ऑफिस से हमारी एक्सटेंडेड फेमिली जैसे ही राजेश माहेश्वरी (काबरा सर), सरोज काबरा मैम, ज्योति दुबे दीदी, मोना राजाव...

जड़ों से जुड़ाव की पुकार: एक बार फिर कुलदेवता के दरबार में!

Image
हर साल की तरह इस साल भी जब मैं इंदौर पहुँचा, तो सबसे पहले मेरे दिल की पुकार राजस्थान के राजसमंद जिले स्थित अपने पैतृक गाँव धनवल की ओर रही। वहां जाकर कुलदेवता श्री धर्मराज जी भैरूजी बावजी के दर्शन किए, उनका आशीर्वाद लिया। ये परंपरा सिर्फ़ एक रिवाज़ नहीं, बल्कि मेरे परिवार की आत्मा है एक ऐसा रिश्ता है, जो पीढ़ियों से हमारे दिलों में बसता आया है। क़रीब 150-160 साल पहले, लगभग 1857 की क्रांति के आसपास, मुझसे पहले की 6वीं पीढ़ी के पूर्वज स्वर्गीय श्री लालाजी पुरोहित, जो मेरे परदादाजी स्वर्गीय श्री गणेशचन्द्र जी पुरोहित के दादाजी थे इसी गांव धनवल से निकलकर इंदौर आकर बस गए थे। चूंकि वे ब्राह्मण थे, इसलिए इंदौर के तत्कालीन होलकर महाराज ने उन्हें अपने दरबार "राजबाड़ा" में नौकरी दे दी थी। उनके उस एक क़दम ने हमारे परिवार को एक नई दिशा दी, और तभी से हम सब बाद की पीढ़ियां इंदौर में ही बस गई। आज भी, मेरे घर में पुरोहित परिवार धनवल वालों की वंशावली जिसमें हमारी 16 पीढ़ियों का इतिहास, उनके नामों सहित संजोकर रखा है। हर व्यक्ति के परिवार में उसकी वंशावली ही एक जीवंत दस्तावेज़ है जो हमें हमार...