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Showing posts from July, 2025

मन की शांति का रहस्य: स्वीकार्यता है!

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(नैवेद्य पुरोहित) कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसी जगहों तक ले आती है, जहाँ हम दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से मिलने लगते हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ और आत्मीय अनुभव मुझे मिला 24 से 27 जुलाई 2025 के बीच, जब मैंने योगनगरी ऋषिकेश में आर्ट ऑफ़ लिविंग का मानसून स्पेशल एडवांस्ड मेडिटेशन प्रोग्राम (एएमपी) किया। यह कार्यक्रम प्रसिद्ध ध्यान प्रशिक्षक निर्मल मटेला सर के निर्देशन में हुआ। इस कार्यक्रम की शुरुआत दरअसल अप्रैल महीने में हुई थी, जब बेनेट यूनिवर्सिटी में यस!+ और सहज समाधि ध्यान कार्यक्रम हुआ था। उसी दौरान हम कुछ वॉलंटियर्स ने यह निर्णय लिया था कि गर्मियों की छुट्टियों में हम ऋषिकेश जाकर एडवांस कोर्स करेंगे। छुट्टियों के बीच यह योजना थोड़ी थम-सी गई थी, लेकिन फिर 13 जुलाई को वंश गुप्ता भैया का संदेश हमारे व्हाट्सऐप ग्रुप में आया कि यदि कोई ऋषिकेश में एडवांस्ड मेडिटेशन प्रोग्राम में इंटरेस्टेड है तो उन्हें बताए। शुरुआत में मेरा मन नहीं था, लेकिन जब भैया ने बड़े प्यार से कहा, "सावन का महीना है, ऋषिकेश चलो, घाट पर नहाएँगे, दो-चार पाप ही धुल जाएँगे!" तो मन मान गया। हमारे साथ आगरा से मित्र अर्...

पालीवाल ब्राह्मण समाज इन्दौर के प्रथम पत्रकार स्वर्गीय गणेशचन्द्र पुरोहित की 55वीं पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन!

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मैं अंश तुम्हारे वंश का हूं , ये हस्ती ये नाम तुम्हई से है ! (नैवेद्य पुरोहित) जुलाई महीने की 10 तारीख़ मेरे लिए एक साधारण दिन नहीं है। ये दिन मुझे उस चेहरे की याद दिलाता है जिसे मैंने कभी देखा नहीं, उस आवाज़ की याद जो मेरे कानों तक कभी नहीं पहुँची, लेकिन उनकी तस्वीर में से उनकी निगाहों के नीचे मैं हमेशा पलता रहा हूं...! उनकी उपस्थिति कुछ ऐसी है जिसे मैं गहराई से महसूस करता हूँ। ऐसा लगता है कि उनकी उपस्थिति मुझे एक ऐसे तरीके से जोड़ती है जो समय और स्थान से परे है। मेरे आस-पास का हर कोना उनकी उपस्थिति की याद दिलाता है, मुझे उनकी विरासत की याद दिलाता है। यह कुछ ऐसा है जिसे मैं अपनी आत्मा के सबसे गहरे हिस्से में महसूस कर सकता हूँ। कभी-कभी, मैं अपनी आँखें बंद करता हूँ और कल्पना करता हूँ कि उनकी आवाज़ कैसी थी। मैं उन्हें अपने पास खड़े हुए कल्पना करता हूँ उनका हाथ थामे हुए जो मुझे ताकत और ज्ञान प्रदान कर रहा है। मैं कभी भी व्यक्तिगत रूप से उनसे नहीं मिला, लेकिन उनकी आत्मा जो अजर अमर है वह मुझे जीवन की यात्रा में आज भी मार्गदर्शन दे रही है। मेरे परदादाजी स्वर्गीय गणेशचन्द्र पुरोहित की ...