राजीव प्रताप: सच बोलने की कीमत - 10 दिन गुमशुदगी के बाद रहस्यमय मौत पर उठते सवाल?
(नैवेद्य पुरोहित) देश में पत्रकारिता पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है और अब 36 साल के युवा पत्रकार राजीव प्रताप की रहस्यमय मौत ने उस जख्म पर नमक छिड़क दिया है। यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि उस खौफ की है जो हर उस रिपोर्टर के मन में बढ़ता जा रहा है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत करता है। गुमशुदगी से मौत तक तारीख़वार घटनाक्रम - 18 सितंबर 2025 – उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में रहने वाले राजीव प्रताप रात को अपने दोस्त सोभन सिंह की ऑल्टो कार लेकर निकले। उसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। 19 सितंबर – सुबह भागीरथी नदी के गंगोरी पुल के पास एसडीआरएफ को वही कार मिली। ड्राइवर का कोई सुराग नहीं। 20 सितंबर – परिवार ने एफआईआर दर्ज कराई। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3) अपहरण के तहत मामला दर्ज हुआ। 25 सितंबर – पुलिस ने अख़बारों में नोटिस छपवाकर आम नागरिकों से जानकारी मांगी और अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल पर भी पोस्ट किया। 27 सितंबर – केस ने पत्रकार बिरादरी का ध्यान खींचा। लाइव हिंदुस्तान और कुछ मीडिया पोर्टल्स ने रिपोर्ट प्रकाशित की। 28 सितंबर – लगा...