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Showing posts from May, 2026

'साभार दर्शन', सांध्य रतलाम दर्शन और त्रैमासिक पर्यावरण विमर्श दिल्ली का सफर: अपना आसमान, अपनी उड़ान

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(नैवेद्य पुरोहित) भास्कर, आलोकन से विदा लेकर जब रमेश मिश्रा 'चंचल' बाहर निकले, तो उनके हाथ खाली थे, पर हौसला पहाड़ जैसा। जिसके पास खबरों की परख हो और लोगों से जुड़ने का हुनर, वो भला कब तक खामोश बैठता? साल 1991 में उन्होंने अपनी कर्मभूमि रतलाम को चुना और नींव रखी अपने खुद के अखबार 'साभार दर्शन'और सांध्य रतलाम दर्शन की। एक दौर वो था जब वो दूसरों के अखबार के बंडल गिना करते थे, और अब एक दौर ये आया जब ऑफसेट मशीन से निकलने वाली हर कॉपी पर उनका अपना नाम था। इस अवसर पर उन्हें रक्षा मंत्री NDA के संयोजक जार्ज फर्नांडिस जी ने 18 अक्टूबर 1998 को साभार काम्प्लेक्स का भूमि पूजन किया था और शाम को सांध्य रतलाम दर्शन का विमोचन किया था,जिस कार्यक्रम का संचालन RSS,VHP के शिक्षाविद श्री भंवरलाल भाटी जी ने किया था, मुख्य अतिथि तो रक्षा मंत्री स्वयं जॉर्ज फर्नांडिस जी थे, अध्यक्षता उद्योगपति श्री चेतन्य काश्यप जी, विधायक शिवकुमार झालानी कांग्रेस , पूर्व विधायक कोमल सिंह राठौड़ उपाध्यक्ष मध्य प्रदेश समता पार्टी ने की थी, ऑफसेट मशीन की बटन दबा कर जॉर्ज फर्नांडिस साहब ने मनोबल बढ़ाने का काम ...

जब दो भाइयों में दरार आई, "अब बनिए की नौकरी नहीं करनी!"

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(नैवेद्य पुरोहित) वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। साल 1983 से शुरू हुआ भास्कर इंदौर का वो सुनहरा सफर, जिसने धूल उड़ाते हुए सफलता के झंडे गाड़े थे, साल 1989 तक आते-आते एक ऐसे मोड़ पर खड़ा हो गया जहाँ रिश्तों की डोर कमजोर पड़ने लगी थी। यह दैनिक भास्कर के इतिहास का वो दौर था जिसे आज भी पुराने पत्रकार भारी मन से याद करते हैं अग्रवाल भाइयों के बीच बंटवारे का दौर। इंदौर न्यूज़ रूम, जो कभी खबरों की गहमागहमी और हंसी-ठिठोली से गूंजता था, वहां अब सन्नाटा पसरने लगा था। मालिकानों के बीच बंटवारे की लकीरें खिंच चुकी थीं। जबलपुर, रायपुर और इंदौर के बीच अखबार की मिल्कियत बंट रही थी। लेकिन साहब, अखबार सिर्फ मशीनों और दफ्तरों से नहीं बनता, वो बनता है उन वफादार सिपाहियों से जिन्होंने उसे अपने खून-पसीने से सींचा हो। रमेश मिश्रा 'चंचल', जो मनमोहन अग्रवाल के साये की तरह थे और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर एजेंसियां खड़ी की थीं, उनके लिए यह घड़ी बड़ी इम्तिहान वाली थी। बंटवारे के बाद जब मैनेजमेंट की तरफ से उन्हें रुकने का न्योता मिला और आगे साथ काम करने की बात हुई, तो मिश्र जी के भीतर का स्वाभिमानी पत्...

दिल्ली-कलकत्ता के नोटिस और भटनागर जी का 'ब्रह्मास्त्र'

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(नैवेद्य पुरोहित) साहब, जब हाथी चलता है तो धूल तो उड़ती ही है। भास्कर में खेतान ग्रुप वाली खबर क्या छपी, मानो पूरे देश के औद्योगिक घरानों में भूचाल आ गया। खबर की गूँज इतनी तेज थी कि सीधे पीएमओ (PMO) से जांच के आदेश हो गए और करोड़ों का प्रोजेक्ट रातों-रात धराशायी हो गया। लेकिन इतने बड़े रसूखदार लोग खामोश बैठने वालों में से नहीं थे। कुछ ही दिनों में दैनिक भास्कर के इंदौर दफ्तर में नोटिसों की झड़ी लग गई। कोई छोटा-मोटा नोटिस नहीं, कलकत्ता और नई दिल्ली के उन वकीलों के लेटरहेड पर नोटिस आए थे जिनकी एक पेशी की फीस हजारों-लाखों में होती थी। दफ्तर में हड़कंप मच गया। तब इंदौर भास्कर के कानूनी सलाहकार और वकील खुश हो रहे थे, कहने लगे, "अरे भाई, ये तो बहुत बढ़िया मौका है। इसी बहाने कलकत्ता और दिल्ली की सैर होगी, बड़े होटलों में रुकेंगे और केस लड़ेंगे।" लेकिन न्यूज़रूम का मिजाज वकीलों जैसा नहीं होता। तब इन्दौर भास्कर के प्रधान संपादक यतीन्द्र भटनागर थे। जिनकी रगों में पत्रकारिता का उसूल कूट-कूट कर भरा था। उन्होंने जब वकीलों की 'पिकनिक' वाली बातें सुनीं, तो उनके माथे पर बल पड़ गए। उन्होंने...

प्रणाम उदंत मार्तंड- तीनों दिन की दैनंदिनी: स्मृतियां, सीख और संस्कार

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08.05.2026 सुबह की शुरुआत उत्साह और उमंग से भरी थी। पाँच-साढ़े पाँच बजे नींद खुली, तैयारी शुरू की और ठीक साढ़े नौ बजे की बस पकड़ी। परिसर से निकलकर जब हम भारत भवन की ओर बढ़ रहे थे, तभी रास्ते में एक दुखद खबर मुझे मिली इंदौर क्षेत्र क्रमांक 3 से 15 साल लगातार विधायक रहे कांग्रेस के दबंग नेता अश्विन जोशी का निधन हो गया था। हमारे उनसे पारिवारिक संबंध थे, बुलावे पर वे कई कार्यक्रमों में आते थे। यह समाचार सुनकर अच्छा नहीं लगा। रास्ते भर यह खबर आगे फॉरवर्ड करता रहा। भारत भवन पहुँचने पर पता चला कि मुख्य अतिथि सीएम मोहन यादव किसी कारणवश नहीं आ सके। किंतु जो अतिथि उपस्थित थे, उन्हें सुनकर मन प्रसन्न हो गया एकदम उत्साह लौट आया। कार्यक्रम का संचालन विनय उपाध्याय जी ने अपनी मनमोहक शैली में किया। अयोध्या के आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज, भारत सरकार के पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहुरकर, पाँडिचेरी से पधारे डॉ. सी जयशंकर बाबू का औपचारिक स्वागत हुआ। कुलगुरु का उद्बोधन - कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सर ने सभी को कार्यक्रम की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि यह विचार पाँच महीने पहले आया था। और यह आयोजन कोलकात...