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Showing posts from November, 2025

हम लोग समाज सेवा नहीं करते, हम कॉन्टेंट बेचने के बिज़नेस में हैं - शैलेंद्र तिवारी

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(नैवेद्य पुरोहित) माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के पत्रकारिता विभाग में 19 नवंबर 2025 को “चेंजिंग न्यूज़रूम” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र के वक्ता पीपुल्स समाचार पत्र समूह के नेशनल एडिटर शैलेंद्र तिवारी थे। कार्यक्रम स्मार्ट क्लासरूम में प्रातः 11:00 बजे आयोजित हुआ और दो घंटे तक चला। व्याख्यान के दौरान वक्ता ने एक बेहद सटीक और चर्चा योग्य बात कही, “हम लोग समाजसेवा नहीं करते, हम कॉन्टेंट बेचने के बिज़नेस में हैं।’’ यही बात पूरे सत्र की नींव बनी, जिसके इर्द-गिर्द आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों, तकनीक, ऑडियंस और न्यूज़रूम के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा हुई। न्यूज़रूम में कुछ भी स्थाई नहीं- शैलेंद्र तिवारी ने कहा कि आज के न्यूज़रूम में कुछ भी स्थाई नहीं है। टेक्नोलॉजी इतनी तेज़ी से बदल रही है कि उसे अपनाना ही सबसे बड़ा सर्वाइवल का सवाल बन गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बजाज और नोकिया जैसी कंपनिया अपने-आप को अपडेट नहीं कर पाई, इसलिए बाज़ार से बाहर हो गई। वहीं सैमसंग ने तकनीक अपनाई और आगे बढ़ गया। यही पत्रक...

मेरी डिग्री, मेरा सफर: बेनेट यूनिवर्सिटी का 7वां दीक्षांत समारोह

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15 नवंबर 2025 यह तारीख मेरे जीवन में हमेशा एक सुनहरी मोहर की तरह चमकती रहेगी। क्योंकि इसी दिन, बेनेट यूनिवर्सिटी का 7वां कॉन्वोकेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, और मैं आधिकारिक तौर पर ग्रैजुएट हो गया। एक साधारण-सा कागज़ का टुकड़ा हाथ में आया, लेकिन उसके पीछे तीन सालों की मेहनत, संघर्ष, यादें, दोस्तियाँ, प्यार और सपने छिपे हुए थे। इंदौर से ग्रेटर नोएडा: एक परिवार की यात्रा, एक सपना - गुरुवार की शाम मैं भोपाल से इंदौर के लिए निकला। शुक्रवार शाम ठीक 5 बजे मैं, पापा, मम्मी और नायशा हम चारों इंदौर से हज़रत निजामुद्दीन के लिए ट्रेन पकड़ चुके थे। उस वक्त ट्रेन के डिब्बे में बैठा मैं सभी पुराने फोटोज देख रहा था और सोच रहा था कितनी जल्दी आज का दिन आ गया! शनिवार की अलसुबह हम निज़ामुद्दीन स्टेशन पहुंचे। बाहर की ठंडी हवा ने कंपकंपा दिया। फटाफट कैब बुक की और सीधे सुबह 6:30 बजे ग्रेटर नोएडा में हमारे होटल पहुँचे, जिसे मैंने पहले से ही बुक कर रखा था। जल्दी से नहाकर तैयार हुआ। सफेद शर्ट, काली पैंट, टाई, हॉफ जैकेट और ऊपर से ब्लैक ब्लेज़र पहनकर मैं तैयार था। आईने में खुद को देखकर लगा, "हाँ, आज का दि...

मलेशिया यात्रा: दुनिया को समझने की एक और कोशिश!

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विमान मलेशिया की धरती पर उतर चुका था, मेरे मन में एक अनोखी उत्सुकता जागी - यहां की संस्कृति, यहां के लोग, यहां की ज़िंदगी कैसी होगी? एमईएससी - मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल के स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम ने मेरे लिए इस अनजान दुनिया के दरवाज़े खोल दिए जहां हर पल एक नई कहानी थी। यह एक ऐसा अनुभव रहा जिसने न सिर्फ़ मेरे ज्ञान को बढ़ाया, बल्कि विभिन्न तकनीकी कौशल को सीखने में मददगार साबित हुआ। साथ ही यह दुनिया को समझने की एक और कोशिश थी। उड़ान की शुरुआत - बात है लगभग तीन-चार महीने पहले की, जब मैंने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा कि एमईएससी याने मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल्स काउंसिल मलेशिया में एशिया पैसिफिक यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम आयोजित कर रहा हैं। मैंने बिना एक पल गँवाए आवेदन कर दिया। बेनेट यूनिवर्सिटी में मेरे प्रोफेसर रहे डॉ. तिलक झा ने मुझे समझाया था कि अगर आप सामर्थ्यवान हो अफोर्ड कर सकते हो तो जितना हो सके उतना इंटरनेशनल एक्सपोजर लेना चाहिए। यह निश्चित रूप से आपके सीवी और पोर्टफोलियो को मजबूत करता है साथ ही नए दृष्टिकोण प्रदान करता है। अगस...