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Showing posts from March, 2025

डिजिटल युग में फैक्ट-चेकिंग की जरूरत: दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में मीडिया साक्षरता पर कार्यशाला !

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(नैवेद्य पुरोहित) डिजिटल युग में जब फेक न्यूज़ तेजी से बढ़ रही है, तब हर व्यक्ति के लिए मीडिया साक्षरता एक आवश्यक कौशल बन गया है। इसी विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए 19 मार्च 2025 को दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म (DSJ), दिल्ली विश्वविद्यालय में "फैक्टशाला वर्कशॉप" का आयोजन किया गया। यह सत्र फैक्टशाला यूनिवर्सिटी नेटवर्क के मीडिया लिटरेसी ट्रेनर डॉ. तिलक झा द्वारा संचालित किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन डेटालीड्स और गूगल न्यूज़ इनिशिएटिव के सहयोग से किया गया था। सत्र में पत्रकारिता के छात्रों को गलत सूचना से बचाव और सही जानकारी की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियों से अवगत कराया गया। डॉ. तिलक झा ने बताया कि "रिडक्शनिस्ट थिंकिंग" यानी किसी भी विषय को जरूरत से ज्यादा साधारण बनाकर देखना, आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने समझाया कि जब हम किसी समूह के बारे में यह कहने लगते हैं कि "सभी बिहारी बेवकूफ हैं" या "सभी लड़के लापरवाह होते हैं" तो हम असलियत को तोड़-मरोड़कर देख रहे होते हैं। सोशल मीडिया का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव भी कार्यश...

रंगपंचमी की यादें: इंदौर की गलियों से बेनेट यूनिवर्सिटी तक!

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होली…मेरे लिए सिर्फ़ एक त्योहार नहीं, बल्कि यादों की वो गुलाल है जो ज़िंदगी के सफ़र में रंग भरती चली आ रही है। इस बार की होली कुछ अलग थी, कुछ ख़ास थी...पिछले तीन सालों से मैं बेनेट यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में होली मना रहा हूँ। पहला साल जब यहाँ फ्रेशर के रूप में आया था, तब इंदौर की रंगपंचमी की बहुत याद आ रही थी। राजबाड़ा क्षेत्र की वो गलियां, 200 फीट तक उड़ते रंगीन फव्वारे, मिसाइलों से उड़ता हुआ गुलाल, वो अनगिनत रंग, सब याद आ रहे थे। मगर तब खुद को समझाया था - "अभी तो पूरी कॉलेज लाइफ बाकी है, अगले साल चला जाऊँगा!" फिर 2024 में मैंने होली तो बेनेट में ही मनाई, मगर रंगपंचमी के लिए इंदौर लौट आया था। बचपन से लेकर अब तक, हर साल विश्व प्रसिद्ध रंगारंग गेर का हिस्सा बनना इंदौरियो की परंपरा रही है। इंदौर की फिज़ा में जो रंगों की खुशबू घुली होती है वो दुनिया में कहीं और महसूस नहीं हो सकती। इस बार मैंने जान-बूझकर इंदौर में होली नहीं मनाई। मैं 7 मार्च को इंदौर के लिए निकला था, पर 14 मार्च को होली की सुबह-सुबह वापस बेनेट यूनिवर्सिटी आ गया था। दिल में एक ही ख्याल था - "इंदौर मे...

पिंटू महरा - महाकुंभ का नाविक या हाइप्रोफाइल गैंगस्टर !

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(नैवेद्य पुरोहित) पिंटू महरा का नाम बीते दिनों उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में उठाया गया था। जहां उन्होंने दावा किया था कि महाकुंभ में पिंटू ने 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये कमाए थे। यह दावा सुनकर लोगों ने बड़ा आश्चर्य किया लेकिन इस खबर के पीछे की सच्चाई काफी चौंकाने वाली है। दरअसल, नवंबर 2017 में इलाहाबाद में बर्रू और बच्चा नाम के दो गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा था। इस गैंगवार में कई जानें जा चुकी थीं और कई मुकदमे भी दर्ज हो चुके थे। एक दिन बच्चा गिरोह ने बीच बाजार में बर्रू गिरोह पर गोलियां चलाईं जिसमें निर्दोष अखिलेश त्रिपाठी की जान चली गई। जनेऊ पहने ये वहीं अखिलेश त्रिपाठी है जो हिंदी साहित्य के महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पौत्र थे। और उस दिन सब्जी लेने बाजार गए थे। उस दिन बच्चा गिरोह का नेतृत्व यही पिंटू महरा कर रहा था। जिसके बारे में योगी आदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश विधानसभा में सीना फुलाते हुए दावा किया था। जिस व्यक्ति का एनकाउंटर होना चाहिए था, वह व्यक्ति यूपी सरकार की आंख का तारा बना हुआ है। पिंटू महरा पर दर्ज हुए है कई आपराधिक मुकदमे! प...

एक पत्रकार, एक सेनानी: समाजसेवी ओमप्रकाश फरकिया के साथ यादगार मुलाकात!

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आज 13 मार्च 2025 का दिन मेरे लिए बेहद खास रहा, क्योंकि मुझे वरिष्ठ पत्रकार एवं लोकतंत्र सेनानी श्री ओमप्रकाश फरकिया और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अयोध्याबाई फरकिया को एक सुंदर फोटोफ्रेम भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनकी 62वीं शादी की सालगिरह 5 मार्च को थी, लेकिन तब तक यह तस्वीर तैयार नहीं हो पाई थी। आज जब मैं उनके निवास स्थान सुदामा नगर यह भेंट लेकर पहुँचा, तो उनके चेहरे पर जो प्रसन्नता और भावनाएँ दिखीं, वह अविस्मरणीय थीं। "यह तो जीवंत तस्वीर है!" उनकी यह प्रतिक्रिया मेरे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद थी। उन्होंने स्नेहपूर्वक मुझे आशीर्वाद दिया, अपने अनुभव साझा किए, और मुझे जीवन की अनमोल सीख दी। वे मेरे दादाजी राजेन्द्र पुरोहित के लगभग 50 वर्षों से मित्र हैं और दादाजी के साथ उस समय संघर्ष में उनके बिताए पुराने पल उन्होंने साझा किए जो मेरे लिए एक प्रेरणा से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा, "पुराने लोग पैसा भले ही कम कमाते थे, संघर्ष और मेहनत करते थे, लेकिन इज़्ज़त उससे दुगुनी कमाते थे। गरीबी थी, पैसा नहीं था, लेकिन लोगों में मानवता थी।" वे संघर्ष और त्याग की जीवंत मिसाल ह...

सीतापुर में दैनिक जागरण के पत्रकार की गोली मारकर हत्या!

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(नैवेद्य पुरोहित) सीतापुर (उ.प्र) में एक पत्रकार की हत्या ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। शनिवार 8 मार्च 2025 की दोपहर को सीतापुर लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई पर गोलियां बरसाकर उनकी जान ले ली। यह घटना एक प्रमुख दैनिक हिंदी समाचार पत्र "दैनिक जागरण" में कार्यरत 35 वर्षीय राघवेंद्र बाजपेई के साथ हुई, जो क्षेत्रीय संवाददाता के रूप में काम करते थे। स्थानीय पुलिस के अनुसार यह घटना इमलिया सुल्तानपुर थाना इलाके में हुई, जहां बाजपेई अपनी मोटरसाइकिल पर सवार थे। हमलावरों ने उन पर तीन गोलियां चलाईं,जिससे उनकी तत्काल मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद, पुलिस ने कई टीमें बनाईं और अपराधियों को पकड़ने के लिए जोरदार कार्यवाही शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने इस घटना को "जंगल राज" कहकर निंदा की है और कहा कि राज्य में हर रोज किसी न किसी की जान ली जाती है, लेकिन सत्ताधारियों को इसकी परवाह नहीं है। नेशनल यूनियन जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया (एनयूजेआई) ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की और पत्रकारों के लिए अधिक सुरक्षा की मांग की है। ...

नारीवाद बनाम पुरुषों की जरूरत: क्या सच में महिलाएं आत्मनिर्भर हैं?

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लेखिका - प्रकाम्या परमार , अनुवाद - नैवेद्य पुरोहित नए नारीवाद के अनुसार कुछ लोग मानते हैं कि हमें पुरुषों की जरूरत नहीं है। क्या हम नहीं मानते? मेरा जवाब निश्चित रूप से "नहीं" होगा। क्यों? क्योंकि जब जीवन में उथल-पुथल होती है, तब आपके सिर पर एक सहारा देने वाला हाथ होता है—वह आपका पिता, भाई, दोस्त या प्रेमी हो सकता है। जब आप आधी रात को सड़कों पर चल रहे होते हैं, तो एक सुरक्षात्मक हाथ आपको खींचकर सुरक्षित दिशा में ले जाता है। वे चुपचाप इतने सारे बोझ उठाते हैं, छोटी-छोटी लेकिन सबसे विचारशील चीजें करते हैं, केवल किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए। वे अपने रास्ते से हटकर दूसरों का जीवन आसान बनाते हैं। वे, वे लोग हैं जो बिना कुछ कहे टूटी हुई चीजों को ठीक कर देते हैं, यह नोटिस करते हैं कि आप थके हुए हैं और जब कुछ ठीक नहीं है तो इसे समझ जाते हैं (कभी-कभी वे बस ज़्यादा सोच लेते हैं कि कुछ गलत है)। वे एक प्रेम भरा संदेश, गले लगाने, सांत्वना देने के लिए कॉल या आश्वस्त करने वाले शब्दों के रूप में हमें अप्रत्याशित दयालुता के साथ कंफर्ट करने के लिए करते हैं। अपने सबसे व्यस्त ...