गुनाहों का देवता बनाम रेत की मछली: प्रेम, पाखंड और पर्दे के पीछे का सच!
(नैवेद्य पुरोहित) कुछ दिनों पहले मैंने धर्मवीर भारती की प्रसिद्ध प्रेम-कथा ‘गुनाहों का देवता’ और उनकी पहली पत्नी कांता भारती की रचना ‘रेत की मछली’ पढ़ी। शुरुआत में गुनाहों का देवता ने आदर्शवादी प्रेम का दिव्य चित्रण प्रस्तुत किया, लेकिन इसके अंतर्मन में छुपा सत्य पढ़कर मन विचलित हो उठा। रेत की मछली को पढ़ते ही यही महसूस हुआ कि दो विभिन्न व्यंजनों की शक्ल में एक ही कड़वी दवा छिपी है। इन दोनों कृतियों को पढ़ते हुए मैंने पाया कि चंदर के ‘देवता’ स्वरूप के पीछे कामुक स्वार्थ छिपा था, और रेत की मछली में छिपे चरित्र ने उसके प्रचंड रूप को उजागर कर दिया। गुनाहों का देवता: आदर्श प्रेम या छल? - धर्मवीर भारती का उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ हिन्दी साहित्य में अभूतपूर्व स्थान रखता है और प्रेम के अव्यक्त रूप का चित्रण प्रस्तुत करता है। शुरुआती पन्नों पर यही विश्वास होता है कि चंदर-सुधा की प्रेम-कथा सर्वोच्च आदर्शवाद है। लेकिन जब मैंने चंदर और सुधा का अंत तक पीछा किया, तो अहसास हुआ कि चंदर का चरित्र कागज़ पर जितना महान और त्यागी दिखाया गया था, असल में वह उतना पवित्र नहीं था। उसमें सिर्फ बाहर सतही ...