एक थकाऊ समर इंटर्नशिप के बाद ताज़गी भरी यात्रा !
जून और जुलाई के दो महीने टाइम्स नेटवर्क नोएडा में मेरी इंटर्नशिप एक अविश्वसनीय सीखने का अनुभव था, लेकिन यह बेहद थका देने वाला भी था। अत्यधिक कार्यभार और एक ही काम को रोज़ करने से बोर हो चुका था कुछ नया नहीं था। परिवार के साथ एक ट्रिप की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी जिससे रिचार्ज और तरोताजा होने का मौका मिले। तभी मैंने और मेरे परिजनों ने केरल और तमिलनाडु की यात्रा पर जाने का फैसला किया। हमारे साथ अभिषेक ब्रिक्स के कुछ सहकर्मी भी थे, जिन्हें मेरे पिता एक परिवार की तरह रखते हैं। काबरा सर उनकी पत्नी सरोज मैम, मोना दीदी उनकी 4 साल की बेटी वीरा, विशाखा दीदी, तुलसी दीदी, रितिका दीदी, पापा, मम्मी, नायशा, मेरी बुआजी का बेटा विन्नी और मैं। हम सब महीने भर पहले से उत्सुक थे। जब मैं अपनी यात्रा पर निकला तो मेरे दिमाग में पापा के शब्द गूंजने लगे, "परिवार केवल जिनसे ब्लड रिलेशन है उनके बारे में नहीं है, बल्कि उन लोगों के बारे में भी है जिनके साथ आप रोज़ काम करते हैं और नियमित रूप से मिलते हो।" 7 अगस्त की रात 11 बजे मेरी फ्लाइट थी मैं दिल्ली से बेंगलुरु आया था और बाकी सभी 11 लोग इंदौर से बे...