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Showing posts from August, 2024

एक थकाऊ समर इंटर्नशिप के बाद ताज़गी भरी यात्रा !

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जून और जुलाई के दो महीने टाइम्स नेटवर्क नोएडा में मेरी इंटर्नशिप एक अविश्वसनीय सीखने का अनुभव था, लेकिन यह बेहद थका देने वाला भी था। अत्यधिक कार्यभार और एक ही काम को रोज़ करने से बोर हो चुका था कुछ नया नहीं था। परिवार के साथ एक ट्रिप की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी जिससे रिचार्ज और तरोताजा होने का मौका मिले। तभी मैंने और मेरे परिजनों ने केरल और तमिलनाडु की यात्रा पर जाने का फैसला किया। हमारे साथ अभिषेक ब्रिक्स के कुछ सहकर्मी भी थे, जिन्हें मेरे पिता एक परिवार की तरह रखते हैं। काबरा सर उनकी पत्नी सरोज मैम, मोना दीदी उनकी 4 साल की बेटी वीरा, विशाखा दीदी, तुलसी दीदी, रितिका दीदी, पापा, मम्मी, नायशा, मेरी बुआजी का बेटा विन्नी और मैं। हम सब महीने भर पहले से उत्सुक थे। जब मैं अपनी यात्रा पर निकला तो मेरे दिमाग में पापा के शब्द गूंजने लगे, "परिवार केवल जिनसे ब्लड रिलेशन है उनके बारे में नहीं है, बल्कि उन लोगों के बारे में भी है जिनके साथ आप रोज़ काम करते हैं और नियमित रूप से मिलते हो।" 7 अगस्त की रात 11 बजे मेरी फ्लाइट थी मैं दिल्ली से बेंगलुरु आया था और बाकी सभी 11 लोग इंदौर से बे...

सीखने की यात्रा है ज़िंदगी: टाइम्स नेटवर्क में मेरा अनुभव

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टाइम्स नेटवर्क में मेरी समर इंटर्नशिप एक कठिन परिवर्तनकारी अनुभव था जिसने मुझे मेरे कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकाला और मुझे ऐसी सीख दी जिन्हें मैं जीवन भर संजोकर रखूंगा। जब मैं आज बीते दो महीनों के बारे में सोचता हूं तो मुझे उन अनगिनत चुनौतियों की याद आती है जिनका मैंने सामना किया, जिन बाधाओं को मैंने पार किया और जो कुछ भी मैंने हासिल किया। ज़िंदगी कब समर वैकेशन से समर इंटर्नशिप पर आ गई पता ही नहीं चला। यह समय विकास, मेहनत और समर्पण का रहा जिसे मैं हमेशा गर्व और उपलब्धि की भावना के साथ याद करूंगा। 1 जून को जब मैं नोएडा फिल्म सिटी में टाइम्स ऑफ इंडिया बिल्डिंग पर पहुंचा तो मुझे पता था कि यह इंटर्नशिप थोड़ी अलग होने वाली है। किसी बड़े संस्थान में यह मेरी पहली इंटर्नशिप थी...उम्मीदें कुछ ज्यादा थी, समय की गति बड़ी तेज़ थी और कार्यभार चुनौतीपूर्ण था। मैं इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने, जितना हो सके सीखने और न्यूज़ लाइब्रेरी डिपार्टमेंट में सार्थक तरीकों से टीम में योगदान देने के लिए तैयार था। दिन लंबे और थकाऊ थे, अक्सर देर शाम तक खींच जाते थे। रोज़ वहीं मैं जल्दी उठता, तैयार होता, और आने वाल...