मसूरी ट्रिप: अपूर्ण रूप से परिपूर्ण
बहुत समय हो गया था कुछ लिखा नहीं, लोग बोलने लग गए थे कहां हो बेटा आजकल कुछ लिख नहीं रहें? सोच में तो मैं भी पड़ गया था कि हा यार कह तो सही रहें हैं काफ़ी समय हो गया कुछ लिखें हुए को अब उत्तर स्वयं में ढूंढता तो पाता कि कई सारी अपरिहार्य परिस्थितियां बनी जिस कारण व्यस्तताएं और डबल हो चुकी थी इस कारण समय नहीं मिल पा रहा था। साल 2023 बहुत कुछ सीखा कर गया, जिंदगी बहुत छोटी है, समय तेज है, कोई रिप्ले नहीं, कोई रिवाइंड नहीं। इसलिए जो भी क्षण आए उसका आनंद लिया जाएं। नया साल नई उम्मीदें लेकर आया तीसरे सेमेस्टर का भी रिज़ल्ट काफ़ी अच्छा आया जिसकी कतई उम्मीद नहीं थी। अभी गणतंत्र दिवस के लॉन्ग वीकेंड पर दोस्तों संग हरिद्वार, मसूरी और देहरादून घूमने का प्लान बना। आजकल एक चलन सा हो गया है 2-3 दिन छुट्टी मिली नहीं की सब लोग कहीं पहाड़ों पर, समुंदर किनारे, या कहीं शहर की आबोहवा से दूर घूमने निकल जाया करते है। इसका एक कारण तो मैंने यह पाया कि बहुत ज्यादा भागम भाग वाली ज़िंदगी हो गई है। आदमी एक कॉरपोरेट मज़दूर हो गया है। चूंकि मैं खुद इस सब चीज़ों से गुज़र रहा हूं 2-3 दिन कहीं छुट्टी आती है और दोस्तो...