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Showing posts from January, 2025

महाकुंभ 2025: भव्यता के पीछे छुपा वीभत्स सच!

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(नैवेद्य पुरोहित) जिस महाकुंभ की भव्यता का गुणगान छाती पीट-पीट कर किया जाता है, उसकी चकाचौंध के पीछे छुपा सच देखकर आज रोंगटे खड़े हो रहे हैं। धरती का सबसे बड़ा धार्मिक आध्यात्मिक महोत्सव होने के साथ यह आस्था के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ भी है। इतने भव्य और दिव्य आयोजन में 30 लोगों की मौत (सरकारी आंकड़े के अनुसार) का जिम्मेदार कौन है? यह सवाल हवा में लटका रहता है! प्रशासन, वीवीआईपी कल्चर, या फिर अंधी आस्था इनमें से कौन है गुनहगार? शायद तीनों ही! वीवीआईपी कल्चर: आम आदमी की जिंदगी से खिलवाड़! हमारे देश में वीवीआईपी कल्चर एक ऐसा कैंसर है, जिसका कोई इलाज नहीं। यहाँ वीआईपी होना एक रोग है जो आम आदमी की जिंदगी को नर्क बना देता है। महाकुंभ जैसे आयोजनों में यह रोग और भी भयावह रूप ले लेता है। वीआईपी के लिए सुरक्षा के नाम पर आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ताक पर रख दिया जाता है। क्या आम आदमी की जान की कीमत वीआईपी के एक झूठे अहंकार से कम है ? प्रशासनिक लापरवाही: मौतों का सिलसिला आखिर कब महाकुंभ में हर बार होने वाली मौतों का सिलसिला रुकेगा? क्या प्रशासन इन मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं ...

डॉयचे वेले के महानिदेशक पीटर लिम्बर्ग ने बदलती दुनिया और पश्चिमी मीडिया की चुनौतियों पर रखे विचार!

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(नैवेद्य पुरोहित) बुधवार 29 जनवरी 2025 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हेबिटेट सेंटर के कैसुरिना हॉल में डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) के महानिदेशक पीटर लिम्बर्ग ने 'बदलती वैश्विक परिस्थितियाँ और पश्चिमी मीडिया की चुनौतियाँ' विषय पर एक विचारोत्तेजक सत्र को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का संचालन सेराफिम कम्युनिकेशंस की संस्थापक सुनंदा राव एर्दम ने किया, जिन्होंने हमारे फैकल्टी डॉ. तिलक झा और कुछ छात्रों को इस प्रतिष्ठित आयोजन में शामिल होने का अवसर प्रदान किया। डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू), जर्मनी का अंतरराष्ट्रीय प्रसारक है जो 32 भाषाओं में अपनी सेवाएं प्रदान करता है। 2023 में डीडब्ल्यू ने प्रति सप्ताह 320 मिलियन वैश्विक उपयोगकर्ताओं तक अपनी पहुंच बनाई। यह एक पब्लिक ब्रॉडकास्टर है, जो सन 1953 में जर्मन संघीय सरकार द्वारा स्थापित किया गया था। यह जर्मन सरकार के टैक्स बजट से वित्तपोषित है। पीटर लिम्बर्ग 2013 से डीडब्ल्यू के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और उनके नेतृत्व में डीडब्ल्यू ने तथ्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देने का काम किया है। सत्र के दौरान लिम्बर्ग ने कहा, "For us it is i...

गणतंत्र दिवस के 75 साल पूरे होने पर गुमनाम नायकों को समर्पित एक प्रेरणादायक आयोजन

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(नैवेद्य पुरोहित) भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस यूनिट ने ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में एक प्रेरणादायक आयोजन किया। इस विशेष कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि दी गई। यह आयोजन एनएसएस यूनिट के फैकल्टी एडवाइजर डॉ. दिनेश कुमार के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। स्वागत भाषण में स्वतंत्रता और गणतंत्र का महत्व बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस यूनिट के उपाध्यक्ष के रूप में मुझे इस आयोजन का संचालन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मेरे स्वागत भाषण से हुई, जिसमें मैंने गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। वहां उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को यह याद दिलाया कि हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हो गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक पल 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की घोषणा का सम्मान करने के लिए और उस ऐतिह...

श्रद्धेय कृष्ण कुमार अष्ठाना जी का निधन – एक युग का अंत

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(नैवेद्य पुरोहित) आज सुबह मकर संक्रांति के पावन दिन, जैसे ही खबर मिली कि अष्ठाना जी नहीं रहे...मन अत्यंत व्यथित हो गया। मालवा प्रांत के प्रथम प्रांत संघचालक, दैनिक स्वदेश के पूर्व संपादक, मासिक पत्रिका ‘देवपुत्र’ के संस्थापक, इंदौर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष और एक अद्वितीय व्यक्तित्व श्रद्धेय श्री कृष्ण कुमार अष्ठाना जी का निधन न केवल इंदौर शहर और समाज के लिए बल्कि मेरे व्यक्तिगत जीवन के लिए भी एक क्षति है। वे मेरे परदादाजी स्वर्गीय गणेशचन्द्र जी पुरोहित के अंतिम जीवित मित्र थे। जब मैंने पहली बार उनसे इंदौर प्रेस क्लब में मुलाकात की थी और अपना परिचय दिया तो उन्होंने मुझे चौंका दिया। 'स्वर्गीय गणेशचन्द्र पुरोहित' नाम सुनकर उनकी आंखें अचानक चमक उठीं थी और थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, "हां, पुरोहित...जल्दी शांत हो गए थे।" इन शब्दों ने मेरे भीतर एक ऐसी भावना जगा दी थी जिसे मैं कभी भुला नहीं सकता। उनके शब्दों में जो स्नेह, जो गहरी स्मृति थी उसने मुझे भावुक कर दिया था यह जानकर कि मेरे परदादाजी, जिनका निधन पांच दशक पहले हो गया था वे आज भी उनकी यादों में जीवित थे, मैं ...

अनंतनारायण बागोरा को नगर निगम पेंशन एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया

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(नैवेद्य पुरोहित) नगर निगम पेंशन एसोसिएशन द्वारा पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी के वरिष्ठ समाजसेवी अनंतनारायण जी बागोरा (ग्राम मेरडा खालसा) रेवेन्यू नगर अन्नपूर्णा रोड़ को 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह इंदौर नगर निगम के सभापति मुन्नालाल यादव की उपस्थिति में संपन्न हुआ। समारोह के दौरान अनंतनारायण जी को सम्मान पत्र, शाल, श्रीफल, और स्मृति चिह्न भेंट किए गए। नगर निगम पेंशन एसोसिएशन ने उनके समाजसेवा के कार्यों की सराहना करते हुए उनकी उपलब्धियों को प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर कई गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अनंतनारायण जी के समाजसेवा के योगदान की प्रशंसा की। कार्यक्रम में पेंशन एसोसिएशन के पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया। इस सम्मान से समाज में सकारात्मक संदेश गया है, और यह आने वाली पीढ़ियों को समाजसेवा के लिए प्रेरित करेगा।

जयेश व्यास बने स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एबीवीपी अध्यक्ष

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(नैवेद्य पुरोहित) स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, इंदौर में हर्ष और उत्साह का माहौल उस समय देखने को मिला जब जयेश व्यास को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का 2024–25 सत्र के लिए अध्यक्ष चुना गया। यह उपलब्धि न केवल उनके नेतृत्व और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि छात्रों और संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर भरोसे को भी साबित करती है। दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन एबीवीपी है, जो हमेशा छात्रों की समस्याओं को हल करने और युवा नेतृत्व को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यरत रहा है। जयेश का अध्यक्ष पद पर चयन यह साबित करता है कि उन्होंने संगठन के मूल्यों और उद्देश्यों को पूरी निष्ठा से अपनाया है। अपनी इस उपलब्धि पर जयेश ने भावुक शब्दों में कहा: "मुझे इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुनने के लिए मैं एबीवीपी का आभार व्यक्त करता हूं। मैं सदैव छात्र हितों के लिए समर्पित रहूंगा और संगठन की आदर्शों को आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगा।" कैंपस में जश्न का माहौल जयेश के अध्यक्ष चुने जाने के बाद कॉलेज में खुशी की लहर दौड़ गई। फूलों की माला पहनाए गए जयेश का साथियों, शिक्षकों और एबीवीप...

संपादक संघ द्वारा नववर्ष पत्रकार मिलन समारोह का शानदार आयोजन!

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(नैवेद्य पुरोहित) बुधवार दिनांक 08 जनवरी 2025 को "संपादक संघ, मध्यप्रदेश (रजि.)" द्वारा आयोजित नववर्ष पत्रकार मिलन समारोह ने पत्रकारिता के प्रति समर्पण, सत्य और जनहित के मूल्यों को न केवल पुनः परिभाषित किया, बल्कि इसे एक प्रेरणादायक मंच प्रदान किया। इंदौर के मालगंज चौराहे पर नीमा धर्मशाला के सामने होटल अरिहंत दाल बाटी इस ऐतिहासिक समारोह का साक्षी बना। बड़ी संख्या में पत्रकारों की उपस्थिति ने इसे यादगार बना दिया। कार्यक्रम में नेशनल यूनियन जर्नलिस्ट ऑफ़ इंडिया (एनयूजेआई) के नवनिर्वाचित सदस्यों का सम्मान और समाजसेवा में अनुकरणीय योगदान देने वाले वरिष्ठजनों का अभिनंदन भी किया गया। संपादक संघ: राष्ट्रवादी विचारधारा का ध्वजवाहक संपादक संघ, मध्यप्रदेश (रजि.) पत्रकारों एकमात्र ऐसा मंच है जहां पत्रकारिता को समर्पित तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियाँ कार्य कर रही हैं। यह संगठन राष्ट्रवादी विचारधारा और जनसरोकार की पत्रकारिता के उद्देश्य को लेकर संगठित हुआ है। समाज और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित संपादक संघ का यह आयोजन पत्रकारिता के मूल्यों को सुदृढ़ करने और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरि...

सच्चाई का दम घुटता भारत: पत्रकारिता की हत्या और समाज की चुप्पी!

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(नैवेद्य पुरोहित) पत्रकारिता, जो कभी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ थी समाज के सबसे सम्मानित और निडर पेशे में गिनी जाती थीं! अब एक ऐसा पेशा बन चुकी है जहां सच बोलने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर (बस्तर) में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या ने भारतीय मीडिया के उस काले पक्ष को उजागर कर दिया है, जिसे सत्ता और पूंजी ने मिलकर दबा रखा है। पत्रकारिता की कीमत: एक और सच कुचला गया! मुकेश चंद्राकर का गुनाह क्या था? उन्होंने सड़क निर्माण में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर किया। इसके लिए उनकी हत्या कर दी गई। उनकी लाश एक सेप्टिक टैंक में पाई गई, जो इस बात का प्रमाण है कि सच बोलने वालों को किस हद तक खामोश किया जा सकता है। इस घटना ने साबित कर दिया कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की आवाज को दबाने के लिए माफिया और सत्ता किस हद तक गिर सकते हैं। जिस नगर निगम के ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को इस हत्या का जिम्मेदार माना जा रहा है, उसे 1 जनवरी को खुद को देश के नंबर 1 अख़बार और 14 करोड़ से ज्यादा पाठक संख्या वाले 'दैनिक भास्कर' ने ‘बस्तर का हीरो’ के रूप में प्रचारित किया। सवाल यह है कि...

इंदौर में 'स्वर शतकम' कार्यक्रम, संघ के १०० साल !

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(नैवेद्य पुरोहित) माँ अहिल्या की नगरी इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 'स्वर शतकम' कार्यक्रम का आयोजन इंदौर के दशहरा मैदान पर शुक्रवार 03 जनवरी 2025 को किया गया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की गूंज और संघ के आदर्शों का अद्भुत संगम देखने को मिला। संघ सुप्रीमों का प्रेरक उद्बोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संघ प्रमुख डॉ. मोहन मधुकरराव भागवत ने उपस्थित स्वयंसेवकों और प्रबुद्धजनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "हमारी रण संगीत परंपरा जो विलुप्त हो गई थी अब फिर से लौट आई है। महाभारत में पांडवों ने युद्ध के समय घोष किया था, उसी तरह संघ ने भी इसे पुनः जागृत किया है।" साथ ही मुस्लिम द्रुपद गायक मोइनउद्दीन डागर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वह बताते थे कि यह कितनी कठिन तपस्या है एक-एक सुर लगना चाहिए। लाठी चलाने का महत्व पर भी उन्होंने प्रकाश डाला और कहा, "डंडा चलाने का उद्देश्य झगड़ा करना नहीं है, बल्कि यह उस स्थिति से निपटने के लिए है जब कोई हमारे सामने आकर गिर जाए, तो हम उसकी मदद कर सकें। लाठी चलाने वाले व्यक...