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Showing posts from April, 2025

सच के लिए शहीद: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस को समर्पित रशियन हाउस में चर्चा!

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(नैवेद्य पुरोहित) "सरहदों पर कुछ तनाव है क्या, कुछ पता तो करो चुनाव है क्या?" — जब रशियन हाउस, नई दिल्ली के सभागार में यह शेर गूंजा, तो सन्नाटा छा गया। मौका था मंगलवार 29 अप्रैल को रशियन हाउस, नई दिल्ली में 'विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस' को समर्पित अवसर पर आयोजित संगोष्ठी और प्रदर्शनी "सच के लिए शहीद - Martyrs for the Truth" का, जिसमें रूसी और भारतीय पत्रकारों ने मिलकर स्वतंत्र पत्रकारिता की चुनौतियों, साहसिक योगदानों और वैश्विक मीडिया के एकतरफा दृष्टिकोण पर गंभीर चर्चा की। एंबेसी ऑफ़ द रशियन फेडरेशन- रशियन हाउस, नई दिल्ली द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 11 प्रमुख वक्ताओं को बुलाया गया था। इनमें रूसी पत्रकारों के साथ-साथ भारतीय पत्रकारिता जगत की जानी-मानी हस्तियां शामिल थीं, जिनमें डॉ. एलेना रेमिज़ोवा, पेत्र सिज़ोव, एवगेनी डेविडोव, बृज मोहन सिंह, अलेक्ज़ेंडर गायक, प्रीति प्रकाश, डॉ. तिलक झा, रुसलान इमाव, मनीष झा, के. बी. कपूर और राकेश बटब्याल शामिल थे। उनकी बातों ने मीडिया, युद्ध और सच्चाई के उस रिश्ते को सामने रखा, जिसे अक्सर मुख्यधारा के मंचों से खा...

बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस इकाई का दिल्ली यूनिवर्सिटी के मैत्रेयी कॉलेज में शानदार प्रदर्शन !

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(नैवेद्य पुरोहित) दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित मैत्रेयी कॉलेज में आयोजित "टैलेंट्री- टैलेंट हंट कंपटीशन" में बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस इकाई ने अपना परचम लहराया है। यह प्रतियोगिता मैत्रेयी कॉलेज की एनएसएस इकाई के वार्षिक उत्सव "अस्तित्व 2025" का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। यह क्षण मेरे लिए विशेष रूप से यादगार है क्योंकि यह मेरे कॉलेज लाइफ के अंतिम पड़ाव पर एक सुनहरा अध्याय जोड़ता है। जब मैं फ्रेशर था वर्ष 2022-23 में तब 2023 के अप्रैल के ही महीने में 2 तारीख को आईआईटी दिल्ली में पैरोडी मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीतने वाली टीम का हिस्सा होने का सौभाग्य मिला था। अब दो साल बाद जब कॉलेज लाइफ खत्म में सिर्फ एक महीना बचा है और विदा लेने का समय आ गया है तब हमारी टीम ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस प्रतियोगिता में विभिन्न कॉलेजों के प्रतिभागियों ने डांस, पोएट्री और मोनोएक्ट जैसी विविध प्रस्तुतियाँ दीं। हमारी टीम ने समूह गायन के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई। सात प्रतिभाशाली प्रथम वर्ष के छात्रों - शाश्वत गुप्ता, रुद्राक्ष खरे, केशव चक्रवर्त...

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी अधिनियम): पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर बड़ा खतरा !

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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, डिजिपब, इंडियन वूमेंस प्रेस कॉर्प और दिल्ली यूनियन जर्नलिस्ट्स की संयुक्त बैठक में डीपीडीपी अधिनियम के खिलाफ उठी मजबूत आवाज (नैवेद्य पुरोहित) सोमवार 21 अप्रैल 2025 को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के प्रांगण में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) के प्रावधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इस बैठक में पत्रकारों, कानूनी विशेषज्ञों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने इस कानून के कार्यान्वयन से पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में मुख्य चिंता डेटा प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 44(3) को लेकर थी, जो सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(j) में संशोधन करती है। यह संशोधन सभी "व्यक्तिगत जानकारी" के प्रकटीकरण से छूट देता है, जिससे जन हित में सूचनाओं तक पहुँच पर गंभीर प्रतिबंध लगता है। बैठक में कानून विशेषज्ञों को भी बुलाया गया था जिन्होंने इस कानून पर गहन शोध किया है। एडिटर्स गिल्ड ऑ...

केसरी चैप्टर 2 – द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ जलियाँवाला बाग़

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(नैवेद्य पुरोहित) शुक्रवार, गुड फ्राइडे की छुट्टी के मौके पर, आज अपने दोस्तों हर्ष नायर, अभिनव श्रीवास्तव और बिशाल साहा के साथ अक्षय कुमार की हालिया फिल्म केसरी 2 का 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' देखा। किसी फिल्म का पहले दिन पहला शो देखने का जो रोमांच होता है, वो अलग ही होता है और जब दोस्तों के संग देशभक्ति वाली मूवी हो यह अनुभव एक जुनून में बदल जाता है। इस फ़िल्म ने हम सभी के दिल को छू लिया, रूह तक हिला दी। एक भारतीय होने के नाते यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है उस दर्द को समझने की जो 13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला बाग़ में हमारे पूर्वजों ने झेली थी। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है फिल्म दर्दनाक जलियाँवाला बाग़ नरसंहार की पृष्ठभूमि में बुनी गई है, लेकिन इसमें सिर्फ गोलीबारी नहीं दिखाई गई। इसमें वे अनसुने नायक भी सामने आते हैं जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। खासतौर पर शंकरन नायर जैसे योद्धा जिन्होंने पूरी दुनिया को जलियांवाला बाग़ नरसंहार की सच्चाई बताई। ब्रिटिश क्राउन के विरुद्ध सच्चाई के साथ अंत तक खड़े रहे और अपनी आवाज़ बुलंद की। फ़िल्म में द...

कॉलेज लाइफ की सबसे मूल्यवान याद - आर्ट ऑफ लिविंग YES!+ और सहज समाधि ध्यान योग वर्कशॉप!

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लेखक - नैवेद्य पुरोहित कभी-कभी ज़िन्दगी हमें ऐसे लम्हे देती है जो सिर्फ यादें नहीं बनती बल्कि हमारी आत्मा का एक हिस्सा बन जाते हैं। अप्रैल 2025 का दूसरा सप्ताह मेरे जीवन का ऐसा ही एक अध्याय रहा। 8 अप्रैल से 13 अप्रैल तक, बेनेट यूनिवर्सिटी में जब तीसरी बार आर्ट ऑफ लिविंग की YES!+ वर्कशॉप आयोजित हुई, तब मुझे एहसास हुआ कि कैसे एक 'बीज' जिसे हमने सालभर पहले बड़ी मेहनत से बोया था आज एक हरे भरे पेड़ में बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। यह वर्कशॉप मेरे लिए पहले से अलग और खास थी क्योंकि बेनेट यूनिवर्सिटी के एक छात्र के रूप में यह मेरी आखिरी वर्कशॉप थी। कॉलेज लाइफ खत्म होने में सिर्फ डेढ़ महीना बचा है और मेरी इंटर्नशिप चल रही है जाते-जाते इस कोर्स ने मुझे एक बार फिर वह सौगात दी जो शब्दों में बयां कर पाना आसान नहीं है। 2024 में जब पहली बार अप्रैल में यह वर्कशॉप हुई थी, तो हम सिर्फ 30 प्रतिभागी थे। फिर नवंबर में जब संख्या 60 के करीब पहुंची, तो एक उम्मीद जागी थी कि "अब यह कारवां रुकेगा नहीं।" और इस बार हमने वो कर दिखाया। कुल 105 प्रतिभागी! हॉस्टल वॉर्डन्स से लेकर पीएचडी स्कॉलर तक, ...

काशी से अयोध्या तक का सफर: जब महादेव खुद बुलाए तब रास्ते अपने आप बनते चले जाते है!

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कभी-कभी जीवन में अचानक लिए गए निर्णय सबसे अद्भुत अनुभवों में बदल जाते हैं। ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ जब 29 मार्च की शाम को मैंने अचानक बनारस जाने का विचार किया। उस समय मैं रोहतक रोड स्थित पवन गंगा एजुकेशन सेंटर से अपनी सीयूईटी पीजी की परीक्षा देकर लौट रहा था और शाम के छह बजे करीब अपने दोस्तों माही और आयुष के साथ बेनेट यूनिवर्सिटी कैंपस में स्नैक्स कर रहा था। मैं उन्हें मेरी एग्जाम के बारे में बता रहा था और बातचीत के दौरान मैंने आयुष से कहा, "2 दिन की छुट्टी है...सोमवार को ईद है...अपन बनारस चल लेते हैं!" वह हंसते हुए बोला, "भैया, 12 घंटे का ट्रैवल होगा और उसके लिए हमें पहले से प्री प्लानिंग करना चाहिए थी।" लेकिन मेरा मन पूरी तरह बन चुका था। मैंने पापा को फोन कर बताया कि हमारा प्लान बन रहा है बनारस जाने का...और उन्होंने कहा, "बेटा, शुभ काम में देरी किस बात की?, बनारस जा रहे हो तो अयोध्या भी हो आना पास में ही है वहां से...ज्यादा दूर नहीं है।" मैंने तत्काल बस की टिकट बुक की, आउटपास बनाया और 2 दिन के लिए ज़रूरी सामान रख के मै और आयुष कुमावत निकल पड़े हमारी बनारस ...