एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल!
(नैवेद्य पुरोहित) आज सुबह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश में दुखद निधन हो गया, प्राइवेट कंपनी का वह चार्टर्ड प्लेन बारामती एयरपोर्ट के करीब लैंडिंग के समय ज़मीन पर गिरा और सभी सवारों की जान चली गई। इस हादसे ने सियासत को झकझोर दिया है शक्ति, सत्ता और साख के उन तमाम सवाल सब चले गए। सच यह है कि सत्ता का सफ़र, चाहे प्राइवेट कंपनी के चार्टर्ड जेट में हो या गांव की ज़मीनी राजनीति में अन्ततः उसी मिट्टी में मिल जाता है जिसका हर नेता दावा करता है कि वह जनता की सेवा के लिए आया है। पैसे की दौड़, इज्ज़त के क़िले और हजारों करोड़ों की संपत्तियाँ सब एक दिन धूल हो जाती हैं जिस मिट्टी की कीमत हर राजनीतिक भाषण में चढ़ाई जाती है, वही मिट्टी आख़िरकार हर किसी को अपने पास बुलाती है। राजनीति में उनके सफ़र के कुछ रंग सबसे ज़्यादा याद रहेंगे - 70 हज़ार करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझते हुए भी उन्होंने अपने राजनीतिक सफ़र में कई उतार-चढ़ाव देखे। आरोपों पर हमेशा बहस होती रही, लेकिन आख़िरकार राजनीति की 'वॉशिंग मशीन' के गठबंधन कहा जाने वाला सत्ता समीकरण में सब धुलता हुआ दिख...