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Showing posts from January, 2026

एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल!

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(नैवेद्य पुरोहित) आज सुबह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान क्रैश में दुखद निधन हो गया, प्राइवेट कंपनी का वह चार्टर्ड प्लेन बारामती एयरपोर्ट के करीब लैंडिंग के समय ज़मीन पर गिरा और सभी सवारों की जान चली गई। इस हादसे ने सियासत को झकझोर दिया है शक्ति, सत्ता और साख के उन तमाम सवाल सब चले गए। सच यह है कि सत्ता का सफ़र, चाहे प्राइवेट कंपनी के चार्टर्ड जेट में हो या गांव की ज़मीनी राजनीति में अन्ततः उसी मिट्टी में मिल जाता है जिसका हर नेता दावा करता है कि वह जनता की सेवा के लिए आया है। पैसे की दौड़, इज्ज़त के क़िले और हजारों करोड़ों की संपत्तियाँ सब एक दिन धूल हो जाती हैं जिस मिट्टी की कीमत हर राजनीतिक भाषण में चढ़ाई जाती है, वही मिट्टी आख़िरकार हर किसी को अपने पास बुलाती है। राजनीति में उनके सफ़र के कुछ रंग सबसे ज़्यादा याद रहेंगे - 70 हज़ार करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझते हुए भी उन्होंने अपने राजनीतिक सफ़र में कई उतार-चढ़ाव देखे। आरोपों पर हमेशा बहस होती रही, लेकिन आख़िरकार राजनीति की 'वॉशिंग मशीन' के गठबंधन कहा जाने वाला सत्ता समीकरण में सब धुलता हुआ दिख...

बॉर्डर 2: देशभक्ति की भावना से सराबोर दिल को छू लेने वाली कहानी

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26 जनवरी के दिन देशभक्ति के माहौल में बॉर्डर 2 देखना एक अलग ही अनुभव था। पुरानी बॉर्डर की यादों को समेटे यह फ़िल्म एक बार ज़रूर देखी जा सकती है। फ़िल्म शुरू होने से पहले रानी मुखर्जी की 'मर्दानी 3' और तापसी पन्नू की 'अस्सी' फ़िल्म के ट्रेलर देखे काफ़ी प्रभावशाली लगे। मौसिक़ी ने छुआ दिल का तार - फ़िल्म के गाने बेहद ख़ूबसूरत बने हैं। "इश्क़ दा चेहरा हूबहू, सारी ज़िंदगी तैनू तकदा रवां" कौसर मुनीर के बोल और सचेत टंडन-परमपरा टंडन का संगीत कमाल का है और दिलजीत दोसांझ की आवाज़ में यह गाना दिल में उतर जाता है। एक दूसरा गाना "मिट्टी के बेटे" तो रूह को छू लेता है। मिथुन का कंपोज़िशन, मनोज मुंतशिर के लफ़्ज़ और सोनू निगम की आवाज़ तीनों मिलकर एक जादू बुनते हैं। "दिल में वतन रखने वाले, सर पे कफ़न भी रखते थे" यह पंक्तियाँ भी सीधे दिल को छू जाती है। कहानी: जल, थल और नभ की जंग - 1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी यह फ़िल्म सिर्फ़ युद्ध नहीं दिखाती, बल्कि फ़ौजियों के परिवारों की तक़लीफ़ें, उनकी मोहब्बत और क़ुर्बानियाँ भी बयान करती है। "सार...

गणतंत्र से गुणतंत्र की ओर एक यात्रा

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तोताराम सनाढ्य की अमर गाथा और भविष्य का आह्वान- 26 जनवरी 2026 का दिन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के लिए महज़ एक औपचारिकता नहीं रहा। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सर का संबोधन एक ऐसी कहानी से शुरू हुआ जो इतिहास के पन्नों में दबी पड़ी थी। एक ऐसे नायक की कहानी जिसका नाम बहुत कम लोग जानते हैं, मगर जिसका संघर्ष हर भारतीय के दिल को झकझोर देने वाला है। विवेक सावरकर मृदुल सर के शानदार संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में कुलगुरु ने तोताराम सनाढ्य की वह गाथा सुनाई जो हमें यह सिखाती है कि गणतंत्र दिवस केवल अतीत की महानताओं को याद करने का दिन नहीं, बल्कि भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है। वो जो इतिहास में खो गए - 1947 से पहले जो लोग लाठियां खा रहे थे, जेलों में सड़ रहे थे, कालापानी की सजा काट रहे थे उनमें से कई नामों को हम जानते है जिनके नाम इतिहास की किताबों में दर्ज हुए। लेकिन उन्हीं दिनों कुछ लोग ऐसे भी थे जो बंधुआ मजदूर की तरह गुलाम बनाकर दूसरे देशों में ले जाए जा रहे थे। 1857 की लड़ाई के बाद भारत को सबसे बड़ी मजदूरी की मंडी के रूप म...

काव्य की कक्षा में पंचामृत: एमसीयू में गूंजी काव्य की मधुर तान

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(नैवेद्य पुरोहित) 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में एक अद्भुत काव्य आयोजन संपन्न हुआ। "काव्य की कक्षा" शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में पांच दिग्गज कवियों ने अपनी रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया। यह हिंदी काव्य परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास था। आज का दिन कई दृष्टियों से ऐतिहासिक था। बसंत पंचमी के साथ-साथ यह दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। लेकिन साहित्य प्रेमियों के लिए इस दिन की विशेष महत्ता इसलिए भी है क्योंकि यह महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की जन्म जयंती भी है। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सर के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जो बात एक हज़ार शब्दों के लेख-संपादकीय और दो घंटे के प्राइम-टाइम शो भी नहीं कह सकते वहीं बात प्रभावी ढंग से एक शायर या कवि कैसे अपनी दो पंक्तियों में गिने चुने दस बारह शब्दों मे...

आलोकनामा - सपनों का सफर: एक यादगार शाम की दास्तान

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जिंदगी में कुछ लम्हात ऐसे होते हैं जो दिल की तख्ती पर हमेशा के लिए नक़्श हो जाते हैं। 6 जनवरी 2026 की शाम भी कुछ ऐसी ही थी एक ऐसा तजुर्बा जो महज़ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अनुभव का एक सैलाब था। आलोक श्रीवास्तव का "आलोकनामा - सपनों का सफर" मुझे एक काव्य-प्रस्तुति नहीं लगी अपितु यह ज़िन्दगी के मुश्किल रास्तों पर चलते हुए कामयाबी की मंज़िलें पाने की एक मुकम्मल दास्तान थी। कार्यक्रम की शुरुआत और तैयारी - माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की तरफ़ से ऐसे 20 विद्यार्थियों को यह खुशनसीब मौक़ा मिला जिनकी साहित्य में गहरी दिलचस्पी है। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सर के मार्गदर्शन में हम भोपाल के रविन्द्र भवन पहुंचे। यह बात ख़ास तौर पर क़ाबिल-ए-ज़िक्र है कि इस कार्यक्रम के तमाम टिकट पहले ही "सोल्ड आउट" हो चुके थे और विश्वविद्यालय प्रशासन ने विशेष रूप से हमारे लिए उपलब्ध करवाए थे। शाम के सात बजे का वक़्त मुक़र्रर था लोगों की आँखों में उम्मीद की चमक साफ़ दिखाई दे रही थी। दैनिक भास्कर मप्र के स्टेट एडिटर सतीश सिंह ने स्वागत उद्बोधन देकर महफ़िल का आग़ा...