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Showing posts from February, 2026

कला समीक्षक दीपक पगारे से खास बातचीत: यायावरी और जीवन की अनकही कहानियां

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भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के अपने सामुदायिक रेडियो स्टेशन "रेडियो कर्मवीर 90.0 एफएम - जो करता है जन गण मन की बात।" रेडियो कर्मवीर के कार्यक्रम 'अक्षर अक्षर बात चली है' के लिए सुप्रसिद्ध कला समीक्षक दीपक पगारे जी से बातचीत का अवसर मिला। चर्चा के केंद्र में थी लेखिका डॉ. बिनय राजाराम की पुस्तक “यायावरी” लेकिन बात केवल पुस्तक तक सीमित नहीं रही, वह जीवन, यात्रा और संवेदना तक बढ़ती चली गई। संवाद के दौरान उनकी साहित्यिक यात्रा, कला समीक्षा की गंभीरता और शब्दों के प्रति उनकी तपस्या को करीब से समझना अपने आप में सीख थी। और फिर जब यह पता चला कि वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की प्रथम बैच 1990-91 के विद्यार्थी रहे हैं यानी हमारे ‘सुपर डुपर सीनियर’ तो यह मुलाक़ात औपचारिक नहीं आत्मीय हो गई। एक तरफ डबिंग रूम में लगे माइक थे, दूसरी तरफ अनुभव की दशकों पुरानी रौशनी। सोच रहा था संस्थान केवल इमारतों से नहीं बनते बल्कि ऐसे लोगों की साधना से बनते हैं। ~ नैवेद्य पुरोहित #दीपक_पगारे #स्वदेश_ज्योति #डॉ_ब...

अनुभव सिन्हा की नज़र से बलात्कार और समाज का एक डरावना आईना

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कल शाम भोपाल के सिनेपोलिस आशिमा मॉल में अपनी दोस्त कीर्ति शर्मा के साथ मैंने फिल्म अस्सी देखी। आर्टिकल 15, मुल्क, थप्पड़, भीड़ जैसी मूवीज़ के बाद अनुभव सिन्हा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वो एक ज़िंदा ज़मीर के साथ काम करने वाले कलाकार हैं। यह फिल्म देखते वक्त सीना भारी हो जाता है और यही इसका मकसद भी है। हर बीस मिनट में लाल रोशनी - फिल्म की सबसे ताकतवर सिनेमाई ज़ुबान यह है कि हर बीस मिनट में पर्दे पर एक लाल रोशनी चमकती है। यह विज़ुअल ट्रिक है दर्शकों को याद दिलाने के लिए कि हिंदुस्तान में हर बीस मिनट में एक बलात्कार होता है। रोज़ाना अस्सी। साल में तीस हज़ार। अनुभव सिन्हा यह आंकड़ा आपके ज़ेहन में ठोकना चाहते हैं और वो कामयाब भी होते हैं। जब वो लाल रोशनी आती है, तब दिल में एक धक्का लगता है कि अपनी मातृभूमि पर जिन लोगों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए क्या इसीलिए कि यहां हर बीस मिनट में अभी, इस लम्हे, कहीं कुछ बुरा हो रहा होगा। मनोज पाहवा का किरदार: मीठी ज़ुबान में ज़हर - मनोज पाहवा ने जो किरदार उनकी परफॉर्मेंस रूह को हिला देती है। एक सीन में वो अपने बेटे के साथ बाहर छोले भटूरे खाने जात...

भीमबैठका: जब छः दोस्त, कोई प्लान नहीं, और दिनभर का सफ़र जो ज़िंदगी भर याद रहेगा !

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कुछ दिन ऐसे ही शुरू होते हैं बिना किसी सोच के, बिना किसी तैयारी के और फिर वो दिन आपकी ज़िंदगी का एक हसीन पन्ना बन जाता है जिसे आप बार-बार पलट के देखते हैं। मेरे लिए शुक्रवार 20 फरवरी का दिन भी कुछ ऐसा ही था। सुबह की वो अचानक प्रेरणा - सुबह क्लास में हम छः दोस्त बैठे थे मैं, आर्या शर्मा, संस्कृति शर्मा, भूमि सिंह, सौम्या वारदे और कमलेश कुलमी और न जाने कैसे बीच कन्वर्सेशन में ही किसी ने छेड़ी वो बात जो हम सब के दिल में थी, "चलो कहीं चलते हैं आज!" दो उपाय थे मनुभान टेकरी या भीमबैठका गुफाएँ लेकिन सभी का मन लगभग भीमबैठका की तरफ झुका हुआ था। आँखों में एक ही समय में वो चमक आई जो किसी भी सच्चे एडवेंचरर की पहचान होती है। बात ख़त्म, फ़ैसला हो चुका था और हम सभी 11:30 बजे विश्वविद्यालय से निकल लिए बिना एक पल सोचे। जब रास्ता ख़ुद बनता गया - हम लोग कैंपस के बाहर अभी शूटिंग एकेडमी तक भी नहीं पहुँचे थे कि एक बड़ा सा ट्राला पीछे से आता दिखा। छः नज़रें एक साथ पीछे उस ट्रक पर पड़ीं और छः हाथ एक साथ उठ गए लिफ्ट माँगने के लिए। ड्राइवर रुका और बैठ गए सब। हम सभी ट्रक में लिफ्ट मांगकर पहल...

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’ की सारगर्भित पुस्तक चर्चा, स्व-बोध और स्वराज्य के विचारों पर हुआ मंथन

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(नैवेद्य पुरोहित) छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के पावन अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में पत्रकारिता विभाग के कॉन्फ़्रेंस हॉल में लेखक लोकेन्द्र सिंह की चर्चित पुस्तक “हिन्दवी स्वराज्य दर्शन” पर एक विशेष पुस्तक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। फाल्गुन मास में दोपहर 3 बजे आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन उद्यांश पांडेय ने किया एवं अतिथि शिक्षिक विजयश्री नेमा की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह पुस्तक मूलतः एक यात्रा वृत्तांत है, जिसमें ऐतिहासिक दृष्टिकोण का समावेश करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज के दुर्गों की दर्शन-यात्रा का जीवंत और प्रेरक वर्णन प्रस्तुत किया गया है। चर्चा के दौरान बताया गया कि लेखक ने पुणे से लगभग 50 किलोमीटर दूर रायरेश्वर पहाड़ी से अपनी ऐतिहासिक यात्रा आरंभ की। यहीं वह पावन स्थल है जहाँ किशोर अवस्था में शिवाजी महाराज ने अपने साथियों के साथ हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का संकल्प लिया था। चर्चा में पुरंदर दुर्ग से प्रतापगढ़ तक विभिन्न किलों के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। पुरंदर के युद्ध में मुरारबाजी देशपांडे क...

अपने घर की ओर: बेनेट यूनिवर्सिटी का सालाना जलसा Uphoria 2026

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एक ख़ुशबू, एक आवाज़, एक याद जो वक़्त के साथ धुंधली नहीं पड़ती बल्कि और गहरी होती जाती है। भारत के सबसे पुराने और बड़े मीडिया घराने द टाइम्स ग्रुप की ग्रेटर नोएडा स्थित बेनेट यूनिवर्सिटी मेरे लिए कुछ ऐसी ही जगह है। पिछले चार दिन से मैं दिल्ली एनसीआर में था। मगर ये कोई आम सफ़र नहीं था। ये एक वापसी थी उस घर की तरफ़, जहाँ मैंने ज़िंदगी जीना सीखा। मेरी अपनी यूनिवर्सिटी के वार्षिक उत्सव "युफोरिया 2026" में एक एलुमनाई की हैसियत से शिरकत करने का मौक़ा मिला था। नवंबर 2025 में जब मेरा दीक्षांत समारोह हुआ था, उसी रोज़ मैंने अपने दिल में एक क़रार कर लिया था कि मैं उन लोगों में से नहीं बनूँगा जो किसी जगह से निकलते हैं तो वापस पलट कर नहीं देखते! जो रिश्ते ज़िंदगी ने मुझे यहाँ दिए, उन्हें महज़ यादों की किताब में या डायरी के पन्नों में बंद नहीं बंद नहीं रखूंगा कभी! रहे सहे में इस बेहतरीन मिलन से बेहतर बहाना क्या हो सकता था एक ही परिसर में एक ही महफ़िल में सभी से मुलाक़ात। जूनियर, सीनियर, अलुम्नाई, प्रोफ़ेसर सब एक साथ। मन में ठान चुका हूं कि हर साल युफोरिया पर अपनी हाज़िरी तो लगेगी। पहला दि...

विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर एमसीयू में रेडियो कार्यशाला आयोजित

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(नैवेद्य पुरोहित) विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के नालंदा पुस्तकालय स्थित धर्मगंज सभागार में रेडियो विषयक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर BBC Media Action की पत्रकार एवं यूनेस्को कंसल्टेंट सुश्री शेफाली चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को रेडियो पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। कार्यशाला की शुरुआत करते हुए उन्होंने अपने रेडियो सफर का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि सितंबर 1999 में एक दिन घर से हॉस्टल लौटने के बाद उन्हें डॉ. पवित्र श्रीवास्तव का फोन आया, जिससे उन्हें भोपाल में चल रहे ‘युववाणी’ कार्यक्रम के इंटरव्यू की जानकारी मिली। सौभाग्य से उनका चयन हो गया और वहीं से उनकी रेडियो यात्रा की शुरुआत हुई। सुश्री चतुर्वेदी ने रेडियो के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेडियो और डाइटिंग में समानता है दोनों में निरंतरता, धैर्य और अनुशासन जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि रेडियो पर कही जाने वाली हर बात श्रोता के लिए “स्प्रिंग बोर्ड” की तरह होती है, जो उसे नई दिशा दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा क...

कजरौटा: विंध्य की धरती पर कला का महाकुंभ

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(नैवेद्य पुरोहित) जब सफर की शुरुआत होती है तो मंजिल का अंदाज़ा नहीं होता, लेकिन रास्ते में मिलने वाले तज़ुर्बे ज़िंदगी भर याद रहते हैं। ऐसा ही सतना की ये यात्रा मेरे लिए सिर्फ़ एक कार्यक्रम में शिरकत नहीं थी। ये एक अहसास था, एक तजुर्बा था, जो दिल में घर कर गया। 29 जनवरी की रात 10 बजे मैं जब भोपाल जंक्शन से रेवांचल एक्सप्रेस में बैठा तो दिल में एक अजीब सी कशमकश थी। मेरी मित्र रिया सेनानी जो आकार वेलफेयर सोसाइटी की सदस्य है। उसने मुझे इस कजरौटा भारतीय कला महोत्सव के लिए आमंत्रित किया था। मेरे मन में सबसे पहला यह आया कि आखिर ये कजरौटा शब्द का मतलब क्या है? ढूंढा तो मालूम पड़ा कि पुराने समय में कजरौटा एक पारंपरिक पात्र कंटेनर समान होता था जिसमें काजल रखा जाता है, खासकर बच्चों की आँखों के लिए, जिसमें एक डंडी लगी ढक्कन होती है। जो लोहे, पीतल या तांबे जैसी धातुओं से बना होता था और भारतीय संस्कृति में इसका खास महत्व था जो बुरी नजर से बचाने के लिए लोग इस्तेमाल करते थे। खैर, पहली बार किसी टियर-3 शहर में इतने बड़े पैमाने पर कला का जश्न होने जा रहा था। पहला दिन - 30 जनवरी की सुबह 6:35 बज...