'एग्जाम स्ट्रेस' के दौर में किस तरीके से संयम के साथ रहा जा सकता है ?
अभी तक मेरे जितने भी ब्लॉग्स आपने पढ़े ज्यादातर मेरी अलग-अलग यात्राओं पर , प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर या किसी इवेंट के बारे में थे पर आज का विषय मैंने 'एग्जाम स्ट्रेस' को लिया है। इसकी बड़ी वजह यह है क्योंकि मेरे कॉलेज के फर्स्ट ईयर की फाइनल एग्जाम्स आ रही है। हिन्दी पत्रकारिता के मेरे प्रथम वर्ष के द्वितीय सत्र की एंड सेमेस्टर एग्जाम 12 मई से शुरू हो रही हैं। इस कारणवश मैं अब न कोई यात्रा करूंगा न किसी इवेंट का हिस्सा बनूंगा और न ही किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के अब मैं अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर देना चाहता हूं। परीक्षा को लेकर जितनी परवाह खुद एक विद्यार्थी नहीं करता है उससे ज़्यादा उसके घरवाले , रिश्तेदार-नातेदार , आस-पड़ोस के लोग करते है और जब बात परीक्षा के परिणाम की आती है तो एक आम विद्यार्थी ज्यादा उत्सुक नहीं होता वह धीर गंभीर रह कर शांत रूप से परिणाम का इंतजार करता है लेकिन उसके आसपास चारों तरफ ऐसे लोगों का घेरा बन जाता है जो हद से ज्यादा उत्सुक रहते है। ये वो लोग होते है जिन्हें मैं 'चाय से ज्यादा केतली गर्म वाले' कहना चाहूंगा। बहरहाल , चंद दिनों मे...