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Showing posts from April, 2023

'एग्जाम स्ट्रेस' के दौर में किस तरीके से संयम के साथ रहा जा सकता है ?

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अभी तक मेरे जितने भी ब्लॉग्स आपने पढ़े ज्यादातर मेरी अलग-अलग यात्राओं पर , प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर या किसी इवेंट के बारे में थे पर आज का विषय मैंने 'एग्जाम स्ट्रेस' को लिया है। इसकी बड़ी वजह यह है क्योंकि मेरे कॉलेज के फर्स्ट ईयर की फाइनल एग्जाम्स आ रही है। हिन्दी पत्रकारिता के मेरे प्रथम वर्ष के द्वितीय सत्र की एंड सेमेस्टर एग्जाम 12 मई से शुरू हो रही हैं। इस कारणवश मैं अब न कोई यात्रा करूंगा न किसी इवेंट का हिस्सा बनूंगा और न ही किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के अब मैं अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर देना चाहता हूं। परीक्षा को लेकर जितनी परवाह खुद एक विद्यार्थी नहीं करता है उससे ज़्यादा उसके घरवाले , रिश्तेदार-नातेदार , आस-पड़ोस के लोग करते है और जब बात परीक्षा के परिणाम की आती है तो एक आम विद्यार्थी ज्यादा उत्सुक नहीं होता वह धीर गंभीर रह कर शांत रूप से परिणाम का इंतजार करता है लेकिन उसके आसपास चारों तरफ ऐसे लोगों का घेरा बन जाता है जो हद से ज्यादा उत्सुक रहते है। ये वो लोग होते है जिन्हें मैं 'चाय से ज्यादा केतली गर्म वाले' कहना चाहूंगा। बहरहाल , चंद दिनों मे...

"कुछ पल बैठना चाहिए बुजुर्गों के पास , हर चीज़ गूगल पर नहीं मिलती"

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कहते है कि दुनिया का सबसे फायदेमंद सौदा होता है बुजुर्गों के पास बैठना, चंद लम्हों के बदले वो आपकों बरसों का तजुर्बा देते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस इकाई शनिवार 22 अप्रैल को नोएडा के सेक्टर 105 स्थित 'आँगन Elderly Home' में सेवा करने गई। वृद्धाश्रम शब्द सुनके मन में एक टीस पैदा होती है कि संसार में ऐसी जगह क्यों है ? जिस अवस्था में माता पिता को अपने बच्चों की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है ऐसे में उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है। मां बाप के कर्ज़ को बच्चे कभी उतार नहीं सकते वे आजीवन ऋणी होते है अपने मां बाप के यह सभी बातों का भान होने के बावजूद आज भी कई बच्चें अपने माता पिता को वृद्धाश्रम छोड़ आते है और वे बेबस माता पिताओं को अपने बच्चों से दूर अपनी ज़िंदगी वृद्धाश्रम में गुज़ारनी पड़ती है। खैर , कल मेरा दूसरी बार वृद्धाश्रम जाना हुआ। पहली बार लगभग 2 महीने पहले जब वृद्धाश्रम गया था तो सन्न रह गया था उन सभी की दर्दभरी कहानी जानकर और उनसे वादा करके आया था कि आपका यह बालक आप लोगों से मिलने आते रहेगा। अब कल जब वापिस 2 महीने बाद वहां जाना हुआ तो ह...

प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए बैंबू टूथब्रशेस एक बेहतर उपाय है

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क्या आपने कभी सोचा है जिस प्लास्टिक के टूथब्रश से आप अपने दांत रोज सुबह साफ करते हैं वह पर्यावरण और आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक है ! जी हां यह सुनकर आप एक बार आश्चर्य जरूर करेंगे पर वास्तव में प्लास्टिक से बने जिन बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के टूथब्रूशेस का आप इस्तेमाल कर रहे हैं वो हमारे पर्यावरण और अपनी सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। यहां तक कि बाजार में जो सस्ते टूथब्रश मिलते है वो ज्यादा घटिया क्वालिटी के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। इन प्लास्टिक ब्रश के विकल्प में बेनेट यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाले संगठन 'इनैक्टस' एक नया प्रोजेक्ट लाया है 'की'। 'की' एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ पेड़ , पौधा या लकड़ी है। इस प्रोजेक्ट 'की' के डायरेक्टर बेनेट यूनिवर्सिटी के बीटेक सेकेंड ईयर के छात्र अवधान त्यागी है। उनसे जब इस मामले को लेकर चर्चा हुई तो उनका कहना है , "हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि देश में बैंबू ब्रशेस को प्राथमिकता मिले ऐसा नहीं है कि हमारे देश में बैंबू के ब्रशेस का इस्तेमाल नहीं कि...

बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस इकाई ने आईआईटी दिल्ली में लहराया अपना परचम !

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हर वर्ष आईआईटी दिल्ली की एनएसएस यूनिट अपना सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव 'काइज़ेन' आयोजित करवाती है जिसे संभवतः किसी एनएसएस यूनिट द्वारा भारत का सबसे बड़ा सामायिक आयोजन माना जाता है। इस बार यह कार्यक्रम 31 मार्च से 02 अप्रैल तक आयोजित किया गया था। विभिन्न प्रतियोगिताओं कार्यशालाओं गोष्ठियों का हर बार की तरह इस बार भी आयोजन किया गया था। बस बदला था तो सिर्फ़ एक पहलू कि बेनेट यूनिवर्सिटी ने पहली बार इस आयोजन में भाग लिया था। उल्लेखनीय है कि बेनेट यूनिवर्सिटी में एनएसएस को शुरू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है और शुरू होते ही एनएसएस बी यू ने झंडे गाढ़ दिए हैं ! काइज़ेन फेस्ट में बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस टीम ने पैरोडी मेकिंग कंपटीशन में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। आखिर काइज़ेन होता क्या है? यह एक जापानी शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है काइ + ज़ेन जिसका अर्थ होता है बदलाव + अच्छे के लिए...ऐसा कोई भी बदलाव जो किसी अच्छे कार्य के लिए किया गया हो वह जापानी में 'काइज़ेन' कहलाता है। बहरहाल , यह काइज़ेन नामक फेस्ट के पीछे हम लोगों की एक लंबी कहानी है मुझे याद है आज से बीस-पच...

आज का मुख्यधारा का मीडिया सरकार का गुलाम क्यों है : परंजॉय गुहा ठाकुरता

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"पत्रकारिता दुनिया में सबसे जोखिमभरा और खतरनाक पेशा है।" "समाज के पहरेदार होते है पत्रकार।" "भारत को केवल एक ही ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जिसने कभी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है वह है माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी।" यह सब कहना है देश के वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता का। उक्त बातें उन्होंने विगत दिनों 21 मार्च को बेनेट यूनिवर्सिटी के टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया में अतिथि शिक्षक के तौर पर कही। मुद्दा था "डिजिटल युग में मीडिया नैतिकता" का...और व्याख्यान करने वाले देश के प्रसिद्ध स्वतंत्र खोजी पत्रकार परंजॉय थे। वैसे तो गेस्ट लेक्चर पहले भी हमारे कई बार हुए है पर इस बार कि जो 'मास्टरक्लास' यह थी वैसी आज तक नहीं हुई। जितने सवाल इस बार बच्चों द्वारा पूछे गए उतने पहले किसी भी गेस्ट लेक्चर में नहीं पूछे गए...जितनी ध्यान से इस बार बच्चे सुन रहे थे उतनी ध्यान से आज तक किसी भी गेस्ट लेक्चरर को नहीं सुना गया। सभी के दिलों दिमाग में बेहद खास जगह बना गया ये गेस्ट लेक्चर ! विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार का कहना था कि हमारे...