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Showing posts from December, 2024

हिमाचल की बर्फीली वादियों में 7 दिवसीय एनएसएस कैंप का अनमोल अनुभव

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(नैवेद्य पुरोहित) कहते हैं, हर यादगार यात्रा की शुरुआत एक छोटे से सपने से होती है। ऐसा ही एक सपना हमने एनएसएस कैंप के लिए देखा था। कैंप के नाम पर यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने हमारे जीवन में कई खूबसूरत पल जोड़ दिए। यह 7 दिन का स्पेशल एनएसएस कैंप था जो हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित पुलगा गांव में आयोजित किया गया था। इसका आयोजन बेनेट यूनिवर्सिटी (टाइम्स आफ इंडिया ग्रुप) की एनएसएस यूनिट ने किया जो हम सभी की मेहनत और प्रतिबद्धता का नतीजा था। शुरुआत की कहानी आज से करीब एक महीने पहले सबकुछ तब शुरू हुआ जब हमने अपने डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स, डॉ. तनवीर अहमद सर को एनएसएस कैंप का प्रस्ताव दिया। यूजीसी की गाइडलाइंस में एनएसएस कैंप अनिवार्य है। उन्होंने तुरंत कहा था, "कसोल चलते हैं फिर।" इसके बाद की तैयारियां किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं थी। हमने तय किया कि हम वहां 25 से अधिक गतिविधियां करेंगे। हमारी पूरी टीम ने अपने फाइनल एंड सेमेस्टर परीक्षाओं के बावजूद इस कैंप को एक वास्तविकता बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की। इस कैंप की योजना और क्रियान्वयन के...

आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं: क्या हम संवादहीन हो गए हैं?

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(नैवेद्य पुरोहित) पिछले 24 घंटे में इंदौर शहर ने एक भयावह स्थिति देखी, जहां पांच युवाओं ने अपनी जिंदगी को खत्म कर लिया। इनमें एक गेम डिज़ाइनिंग का छात्र, एक कर्ज में डूबा युवक, एक छात्रा (जो स्कूल होमवर्क न भेज पाने के कारण तनाव में थी), एक अन्य नाबालिग छात्रा और एक नर्स शामिल हैं। हर घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर समाज में ऐसा क्या हो रहा है जो युवा अपनी जिंदगी से हार मान रहे हैं। इन घटनाओं ने न केवल पीड़ित परिवारों को सदमे में डाला, बल्कि पूरे समाज को झकझोर दिया है। युवाओं की बढ़ती आत्महत्या: एक गंभीर समस्या ऐसी घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि समाज के एक टूटे हुए हिस्से का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। हर आत्महत्या एक ऐसी कहानी है जिसे सही समय पर न तो सुना गया और न ही समझा गया। इसके कई कारण हो सकते हैं:- 1. मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी: तनाव, अवसाद, व्यर्थ की चिंता जैसी समस्याओं को अक्सर लोग अनदेखा कर देते है। यहीं चीज़ आगे चलकर जब अपना विकराल रूप धारण करती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं। 2. आर्थिक तनाव: कर्ज़ का बोझ, नौकरी में असफलता और जीवनयापन के संघर्ष ऐसे मु...

20वें जन्मदिन की यादगार दास्तान!

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जन्मदिन का दिन हमेशा से ही मेरे लिए खास रहा है, लेकिन इस बार मेरा 20वां जन्मदिन हर मायने में अलग और यादगार साबित हुआ। जब से मैंने ग्रेटर नोएडा के बेनेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू की है, तब से पिछले दो साल से मेरा जन्मदिन वहीं मन रहा था, परिवार से दूर। आखिरी बार 2021 में घरवालों के साथ जन्मदिन मनाया था। हालांकि, घरवालों से दूर होने का दुःख इतना नहीं होता था जितना मेरी छोटी बहन नायशा की कमी का महसूस होता था। मेरे लिए जन्मदिन का सबसे खास उपहार - नायशा आज से 11 साल पहले मुझे जन्मदिन पर अपने माता-पिता के द्वारा एक ऐसा उपहार दिया गया जो कि मेरा सबसे बड़ा महत्वपूर्ण और बेस्ट गिफ्ट हैं जिसे कोई नहीं बदल सकता। मेरा और मेरी बहन का जन्मदिन एक ही दिन आता है, 11 दिसंबर। फर्क बस इतना है कि मेरा जन्म 2004 की रात 10 बजे हुआ और नायशा का 2013 की सुबह 10 बजे। हर साल हम दोनों साथ में केक काटते थे। वह मेरी सबसे बड़ी खुशी और मेरा सबसे अनमोल तोहफा है। इस बार भी मुझे लगा कि मैं उससे दूर रहूँगा, लेकिन मेरे दोस्तों माही, जिया और जयंत ने कहा कि मुझे इस बार अपने घर जाना चाहिए। यहीं से मेरे इस यादगार ...

फेसबुक का मानवाधिकारों पर दोहरा रवैया: विश्व मानवाधिकार दिवस पर एक विश्लेषण

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(नैवेद्य पुरोहित) विश्व मानवाधिकार दिवस पर यह सवाल उठाना बेहद जरूरी है कि क्या टेक दिग्गज कंपनियां मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभा रही हैं? फेसबुक, जो कभी बोलने की आजादी का प्रतीक माना जाता था, आज मानवाधिकारों और नफ़रत फैलाने वाली सामग्री के प्रति अपने दोहरे रवैये के कारण कटघरे में है। न्यूज़लॉन्ड्री की वरिष्ठ पत्रकार निधि सुरेश के एक लेख में बताया गया है कि फेसबुक पर भारत में सत्ताधारी दल और उससे जुड़े लोगों के भड़काऊ बयानों और नफ़रत भरे कंटेंट पर कार्रवाई न करने का आरोप है। भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने फरवरी माह में एक भड़काऊ भाषण दिया था, जिसकी रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर जमकर साझा की गई। इस भाषण को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को उकसाने वाली घटना के तौर पर माना गया, जिसमें 53 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 200 के करीब घायल हुए। जून में, फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने अपनी कंपनी के 25,000 कर्मचारियों के साथ मीटिंग के दौरान इसी भाषण का सरसरी तौर पर ज़िक्र, सोशल मीडिया और हिंसा के बीच के रिश्ते को रेखांकित करते हुए किय...

ई-सिगरेट: आधुनिक जहरीले नशे की लत!

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(नैवेद्य पुरोहित) सरकार की सख्ती के बावजूद बाजार में खुलेआम उपलब्ध हैं 'वेप्स' भारत सरकार ने साल 2019 में ई-सिगरेट को प्रतिबंधित कर एक बड़ा कदम उठाया था। "इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन का निषेध) अधिनियम, 2019" के तहत न केवल इनके उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाई गई, बल्कि इसके उल्लंघन पर कड़ी सजा और जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, आज यह जहरीली लत बाजार में आसानी से उपलब्ध है। वेप्स और ई-सिगरेट आधुनिक नशे का नया रूप है जो कि युवाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका हैं। सरकार की नीयत मजबूत, लेकिन जमीनी हकीकत अलग भारत सरकार ने ई-सिगरेट के खिलाफ कड़े कानून बनाए है। पहली बार उल्लंघन पर एक लाख रुपये का जुर्माना और एक साल की जेल का प्रावधान है, जबकि दोबारा पकड़े जाने पर जुर्माना पांच लाख रुपये और तीन साल की जेल हो सकती है। इतने नियम कानून होने के बावजूद आज बाजार में ई-सिगरेट उतनी ही आसानी से उपलब्ध हैं जैसे कोकीन, एमडीएमए और अन्य अवैध नशीले पदार्थ। किशोरों को जकड़ती यह ज...