पश्चिम बंगाल यात्रा वृत्तान्त चुनाव के समय बंगाल की धड़कनें

यात्राएँ महज़ स्थानों को नहीं, स्वयं को भी नापती हैं। अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रिपोर्टिंग के लिए मैं इंदौर से कोलकाता की ओर निकला, तो मन में एक ही संकल्प था कि अब तक टेक्स्ट फॉर्मेट में रिपोर्ट करता था, अब वीडियो रिपोर्टिंग में भी हाथ आज़माना है। साथ में थे दो माइक आईडी एक टाइम्स ऑफ इंदौर का और दूसरा देश के पहले राजनीति पर केंद्रित दैनिक अखबार पॉलिटिक्सवाला का। यह यात्रा सिर्फ चुनावी कवरेज नहीं थी यह एक युवा की अपने आप से मुठभेड़ थी अपनी सीमाओं को पहचानने और उन्हें लाँघने की कोशिश थी। इस वृत्तान्त में वह सब कुछ है जो मैंने देखा, सुना और महसूस किया चाहे वह कोलकाता के केएमसी दफ्तर के बाहर किसी बुज़ुर्ग की पीड़ा हो, एक विधायक का साक्षात्कार हो, या फिर जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रांगण में न्यूज़लॉन्ड्री की टीम के साथ बिताए कुछ यादगार पल। इस यात्रा वृत्तांत के बाद अगले कुछ दिनों तक आप लोगों को पश्चिम बंगाल की ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ने को मिलेगी। जिन विधानसभा क्षेत्रों में जाने का मौका मिला वहां की राजनीतिक हालत आप सभी को जानने को मिलेगी। आइए, चलते हैं उस यात्रा पर जो इंदौर से शुरू होकर बंगाल की गलियों में, लोकल ट्रेन में, रैपिडो और यादों में बिखर गई।
12 अप्रैल 2026 - इंदौर से कोलकाता की इंडिगो फ्लाइट क्रमांक 6E-6566 रात 8 बजकर 30 मिनट पर उड़ान भरने के लिए तैयार थी। मन में असंख्य उम्मीदें, कुछ आशंकाएँ और एक अजीब-सी बेचैनी थी। जब विमान ने उड़ान भरी तो नीचे शहर की जगमग रोशनियाँ धीरे-धीरे छोटी होती गईं और ऊपर आकाश में अँधेरा बढ़ता चला गया। रात 10:40 पर कोलकाता के नेताजी सुभाषचंद्र बोस हवाई अड्डे पर मैं उतरा कैब बुक कर करीब 11:30 पर मैं कोलकाता के बिधान सरोनी इलाके में विवेकानंद केंद्र पहुँचा। वहाँ के केयरटेकर बलराम दा पहले से सूचित थे उनसे पहले ही बात हो चुकी थी। उन्होंने मुझे कमरा दिखाया और एक आत्मीय मुस्कान के साथ विदा ली। उस रात विवेकानंद केंद्र में बिस्तर पर लेटते हुए मन में बस एक ही बात थी कि कल से बंगाल की चुनावी धड़कन जो सुनने का मौका मिलेगा। नींद आई, पर देर से।
13 अप्रैल 2026 - सुबह तैयार होकर निकल पड़ा अनजान लोगों से बात करने। सबसे पहले कोलकाता के फेमस रेस्टोरेंट ब्रांड 'भूतेर राजा दिलों बार' पहुंचा। वहां काम करने वाले बुजुर्ग कर्मचारी बुद्धदेव ने बताया कि हुगली में जहां वे रहते है विधायक आसित मजूमदार ने पिछले 5 साल में कुछ काम नहीं किया। सब सरकार एक ही है जो आते है वो लूट के चले जाते है। आम आदमी के लिए कुछ नहीं करते है। उनके मुताबिक इस बार सरकार पलट जाएगी। "पालटानों दरकार, चाई बीजेपी सरकार" का यह नारा हर जगह आसानी से कोलकाता की सड़कों पर देखा जा सकता है। इसके बाद मैं केएमसी (कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) के दफ्तर की तरफ निकला। कोलकाता की गलियाँ अपने आप में खूबसूरत है। सड़कों पर पुरानी पीली टैक्सियाँ, केबल से चलने वाली ट्राम, पुरानी ऐतिहासिक इमारतें और दीवारों पर राजनीतिक नारे। मैंने केएमसी के दफ्तर के बाहर चाय की टपरी पर आम लोगों से बात करने की कोशिश की। एक बुज़ुर्ग ने जो कोई 82 वर्ष के थे उन्होंने कहा, "बिना पैसे के यहाँ कुछ होता ही नहीं।" तो लगा जैसे पूरे शहर का दर्द उनकी आवाज़ में उतर आया हो। उन्होंने साफ़ कहा दोनों पार्टियाँ बोगस हैं। इतने सालों में उनका पसंदीदा मुख्यमंत्री कौन था तो इस पर उनका जवाब बुद्धदेव भट्टाचार्य का था। कमोबेश जिस भी व्यक्ति से मैंने बुद्धदेव भट्टाचार्य के कार्यकाल की बात की तो सभी खुश और संतुष्ट नज़र आए। लोग चाह रहे है कि सरकार बदले पर साथ ही लोग इंटरव्यू देने से डरते है किसी का भी डायरेक्ट नाम लेने से डरते हैं। एक दूसरे व्यक्ति ने केएमसी के दफ्तर के अंदर की बात बताई और कहा, "टीएमसी बहुत गुंडागर्दी वाली पार्टी है।" इतना कहकर वह चुप हो गए, जैसे दीवारों के भी कान हों। थोड़ी देर बाद मुझे केएमसी के ही उप-महापौर अतिन घोष के दफ्तर में बैठने का अवसर मिला। मुझे वहाँ उनसे इंटरव्यू की उम्मीद थी। उपमहापौर जो क्षेत्रीय पार्षद होने के साथ विधायक भी है! इनके पीए उत्पल दा से उपमहापौर की उपलब्धता अनुसार इंटरव्यू के लिए आग्रह किया तो उन्होंने कुछ देर वहीं बैठने के लिए कहा। इस बीच वहीं ऑफिस में 19 साल का लड़का आयुष शॉ जो फर्स्ट टाइम वोटर है उससे मुलाकात हुई। मैंने मौके का फायदा उठाकर उसे इंटरव्यू के लिए पूछा और वह राज़ी भी हो गया। वह लड़का टीएमसी का कट्टर समर्थक निकला मैंने जो भी सवाल उससे पूछा तो वह ममता दीदी और टीएमसी सरकार की योजनाओं का बखान करने लगा। पांच मिनट तक उसके साथ इंटरव्यू करने के बाद मैं वहां से निकल पड़ा। जाते-जाते उस लड़के ने कहा कि भैया शाम को हम यहाँ से एमएलए कैंडिडेट के लिए रैली निकालेंगे, आप उसमें ज़रूर आइएगा। मैंने उसे कहा मैं ज़रूर आऊंगा। फिर एक जगह मिष्टीदोई खाई और सुजीत देबनाथ जो कोलकाता नगर निगम के बिल्डिंग सेक्शन में असिस्टेंट मैनेजर है उनसे मेरी भेंट हुई। इस भले इंसान ने जिस स्थान पर मुझे जाना था वहां कौनसी बस जाएगी यह ढूँढने में मेरी भरपूर मदद की। जब बस नहीं मिली तो रैपिडो से बाइक बुक करवाई और तब तक भी वे रुके रहे जब तक मैं सुरक्षित नहीं चला गया। निस्वार्थ भाव से भले लोग आज भी इस दुनिया में मौजूद हैं।
रैपिडो पर बैठकर प्रभात खबर अख़बार के दफ्तर जाते वक्त गाड़ी चालक प्रदीप प्रधान से बात हुई। मूलतः ओडिशा के इस व्यक्ति का जन्म और अब तक का जीवन कोलकाता में गुज़रा। जब इंदौर का ज़िक्र निकला तो उन्होंने बंगाली लहजे में कहा, "मैं दो बार इंदौर आया हूँ और आपका शहर बहुत साफ है।" मैंने धन्यवाद किया। फिर कोलकाता में गंदगी की बात छेड़ी, तो वे तपाक से बोले, "पहले थी साफाई! जबसे ममता दीदी आई हैं, साफ-सफाई हुई ही नहीं। खाली पैसा लूटने में लगे रहते हैं।" 19 आरएन मुखर्जी रोड़ पर प्रभात खबर के ऑफिस पहुंचकर स्थानीय संपादक कौशल किशोर त्रिवेदी जी से आत्मीय मुलाकात हुई। यह मुलाकात इस पूरी यात्रा की एक अनमोल धरोहर बन गई। मेरे लिए वे एक मेंटॉर की तरह मुझसे बात करते रहे। "जो करना है, ईमानदारी से करना और कठिन परिश्रम करते रहना। अकेली ईमानदारी और परिश्रम से अंबानी तो नहीं बन सकते, पर तुम कोशिश करना कि ईमानदार बने रहो।" उनका यह भी कहना था, "अगर किसी दूसरे का भला नहीं कर सकते तो उसका बुरा भी मत करना। बेवजह किसी को परेशान मत करना। इससे एकदम सुकून से जीना आ जाएगा और नींद अच्छी आएगी।" मैं उनके लिए चटपटी सेव का पैकेट भी लेकर गया था, वो उन्हें भेंट किया। उन्होंने भी मुझे चाय-नाश्ता और कोलकाता का प्रसिद्ध वेजिटेबल चॉप खिलाया साथ में कलाकंद भी। वहाँ से निकलकर एक जगह कचौरी खाई। फिर मेट्रो से हावड़ा गया, वहां रेलवे स्टेशन पर अगले दिन मिदनापुर की ट्रेन की जानकारी ली। फिर हावड़ा ब्रिज के पास फोटो खिंचवाए वीडियो बनाए और सरकारी बस से विक्टोरिया मेमोरियल के लिए निकल पड़ा।विक्टोरिया मेमोरियल के पास एक दोस्त मिला जॉयजित दास, पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर। कोलकाता में वह भी अकेला घूम रहा था। हम दोनों साथ हो लिए, सोमवार होने के कारण विक्टोरिया मेमोरियल में संग्रहालय बंद था। बाहर से फोटो खींचे, थोड़ी देर बात की और चले गए। वापसी के रास्ते में रैपिडो चालक मोहम्मद वाजिब खान जो खिदिरपुर में रहते है उनसे बात हुई। वहां से विधायक फिरहाद हकीम है जो मंत्री भी है। मैंने जब पूछा, "इस बार किसे जिताओगे?" तो बोले, "टीएमसी को ही जिताएँगे ना भैया।" यह भी बताया कि जबसे भाजपा आई है तबसे नाम बदलने के अलावा कुछ नहीं हुआ। दिलचस्प यह था कि वे मूलतः उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर के रहने वाले थे।
वापस आते वक्त विवेकानंद केंद्र के पास सुबह जिस लड़के का इंटरव्यू लिया था उस आयुष का फोन आया कि भैया रैली हो रही है। मैं वहां गया श्रेया पांडेय को अपार जनसमर्थन मिलते हुए देखा। वहां के स्थानीय नागरिकों से इंटरव्यू किया। फिर उपमहापौर के पीए उत्पल दा को कहा कि इंटरव्यू शेड्यूल करें उन्होंने कहा,"अभी तो बिज़ी चल रहा है आगे देखते है।" रात करीब 11 बजे कमरे में लौटा और सो गया क्योंकि अगले दिन सुबह जल्दी मिदनापुर के लिए ट्रेन पकड़नी थी।
14 अप्रैल 2026 - सुबह रैपिडो से हावड़ा स्टेशन पहुँचा। हावड़ा मिदनापुर लोकल ट्रेन में बैठा और रास्ते में कब झपकी लग गई, पता ही नहीं चला। 11 बजकर 30 मिनट पर मेचेदा रेलवे स्टेशन पर उतरा। वहाँ ना तो ओला और ना ही उबर जैसी सुविधा थी। बस एक ही रास्ता था और वह भी बड़ी मशक्कत का- सरकारी बस। बस पकड़कर चंडीपुर के लिए निकला। मेरे पास बैठा एक लड़का जो चंडीपुर का ही था। उसने बताया कि, "वहाँ कॉलेज है, पढ़ाई है, पर नौकरियाँ नहीं हैं। इसीलिए सबको पलायन करना पड़ता है।" चंदीपुर सीट से पहले सोहम चक्रबर्ती पिछले 5 साल से विधायक थे इस बार टीएमसी ने उत्तम बारिक को यहां से टिकट दिया है। खचाखच भरी बस में एक-दूसरे के पसीने की खट्टी खुशबू हवा में तैर रही थी। दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर मैं चंडीपुर के सप्तर्षि गेस्ट हाउस पहुँचा। वहाँ से तनय सरकार को फोन किया पता चला वे किसी गाँव में प्रचार में हैं। उन्होंने अपने साथी राम को भेजा और मुझसे कहा, "कमरा नंबर 206 में बैठिए, मैं आता हूँ।"
तनय सरकार भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से 2017 बैच के पास-आउट हैं। और लोकेंद्र सिंह सर से उनकी बातचीत तब से बहुत अच्छी है। 6 साल ऑल इंडिया रेडियो में काम किया, फिर कई चैनलों-एजेंसियों में आखिर में खुद की पीआर एजेंसी खोली जो अभी सफलतापूर्वक चल रही है। उन्होंने अपनी टीम से परिचय कराया, फिर हम सब साथ मिलकर पास के एक रेस्तरां में खाने गए। वहाँ मैंने जीवन में पहली बार कटहल की सब्जी खाई। असली बंगाली चावल, आलू की सब्जी, टमाटर की मीठी-सी चटनी और फ्रायम्स सब कुछ था। इतना खाने के बाद सभी ने कमरे पर ही थोड़ा रेस्ट किया। शाम को उत्तम बारिक के साथ मेरा इंटरव्यू शेड्यूल था। चंडीपुर-नंदीग्राम रोड स्थित मुरादपुर के आगे हंसचरा नाम के गाँव में इंटरव्यू हुआ। विधायक उत्तम बारिक को देखकर लगा ही नहीं कि यह आदमी विधायक हैं! एकदम ज़मीन से जुड़े एक कार्यकर्ता समान उनका पहनावा था। वरना मध्यप्रेश के विधायकों के तो ठाठ बांट ही कुछ और है। यहां तो गली का पार्षद भी 25 लाख की फॉरच्यूनर से सस्ती गाड़ी में नहीं बैठता। मुझे जानकारी मिली कि ये विधायक एक शिक्षक के बेटे हैं साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। पटाशपुर विधानसभा से 5 साल विधायक थे और इस बार टीएमसी ने उन्हें चंडीपुर से टिकट दिया है।
तनय भैया का बहुत धन्यवाद उनकी बदौलत यह साक्षात्कार संभव हो पाया। साक्षात्कार के बाद शाम 6 बजे तक मैं फ्री हुआ। तनय भैया ने कोलकाता की बस में बिठाया। जब हम बस स्टैंड पर खड़े थे तब उन्होंने अचानक मेरी शर्ट की जेब में कुछ रुपए डाल दिए। सच में एकदम भावुक कर देने वाला पल था वह। किसी दूसरे राज्य में आप जाओ वहाँ इतनी आत्मीयता के साथ आपसे व्यवहार हो गदगद हो गया था मैं तो। मैंने उनसे कहा कि हमारे यहां छोटे बच्चों को ऐसे पैसे देते है। मैं आपके घर आऊंगा तब समझेंगे हम अभी ऐसे अच्छा नहीं लगता है। उन्होंने कहा बेटा पूरा बंगाल मेरा घर है और तुम मेरे घर आए हो। मैं सेव का पैकेट देना उन्हें भूल गया था बस से फटाफट उतरकर उन्हें दिया और फौरन बस में चढ़ा। बस में टीवी पर हिंदी में 'बाहुबली' फिल्म चल रही थी और लोग बड़े चाव से देख रहे थे। रात 7 बजकर 30 मिनट पर चाय-नाश्ते के लिए बस रुकी वहाँ कचौरी, समोसा और बैंगन की तली हुई चीज़ खाई। बस में दो और यात्री मिले जो मेरे ठीक पास बैठे हुए थे। एक थे शिवकुमार बैरा जो जयपुर में आईटीसी कंपनी में पिछले 25 साल से काम कर रहे थे रहने वाले नंदीग्राम के पास एक गाँव के थे। जब मैंने पूछा वोट देने आएँगे? तो बोले, "नहीं।" आखिरी बार कब वोट दिया था तो उनका जवाब सुनकर मैं चौंका।उन्होंने कहा,"10-12 साल हो गए।" उनका अंदाज़ा था कि अबकी बार पश्चिम बंगाल की हवा अलग है, ममता दीदी को बहुत ताकत लगानी पड़ रही है। दूसरे व्यक्ति थे सत्यजित डे पेशे से सिविल इंजीनियर मिदनापुर जिले के रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि जितना इन्वेस्ट होता है उसका 50% से ज़्यादा तो नेता खा जाते हैं। वे भी वोट देने के इच्छुक नहीं थे। रात 10 बजे करीब कोलकाता पहुँचा। वहां से रैपिडो बुक कर विवेकानंद केन्द्र पहुंचा। रैपीडो ड्राइवर रथीन राउत जो पार्ट टाइम रैपीडो चलाता है और फुल टाइम रेडीमेड गारमेंट्स इंडस्ट्री में प्रोडक्शन मैनेजर है। उससे बात की तो पता चला उसका भाई रौनक कोलकाता के वार्ड नंबर 34 में बीजेपी का मीडिया कन्वीनर है। रैपीडो वाले का कहना था कि वह 10 साल से वोट ही नहीं डाल पाए हैं क्योंकि टीएमसी वाले वोटिंग के दो दिन पहले सबके घर जाकर जबरदस्ती वोटर आईडी कार्ड लेकर चले जाते हैं। इस वजह से उन्हें इतने सालों में आज तक वोट डालने का मौका ही नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा, "एकदम चोर एमएलए है यहां का।" थकान इतनी हो चुकी थी कि 10:45 बजे कमरे में जाते ही सो गया।
15 अप्रैल 2026 - सुबह उठकर नहा धोकर तैयार हुआ बाहर निकल कर देखा तो शहर एकदम सजा हुआ था। दुकानें सजी हुईं, लोग नई पोशाकें पहने घूम रहे थे। पता चला आज बांग्ला नववर्ष है - पोइला बैशाख। उपमहापौर अतिन घोष के चीफ इलेक्शन एजेंट शाश्वत बोस से मैंने इंटरव्यू के लिए बात की तो उन्होंने मना कर दिया कि आज बहुत बिज़ी है इंटरव्यू नहीं हो पाएगा। इतने मेरे पास प्रज्ञानंद चौधरी जी का कॉल आ गया। उन्होंने कल रात को ही मुझे मैसेज लिखा था और कहा था कि आप 4:00 प्रेस क्लब कोलकाता पहुंच जाना। मैंने भी उन्हें स्वीकृति दे दी थी। फिर रैपिडो से मैं निकला कोलकाता की प्रसिद्ध लाली छंगाणी की कचौरी खाने। रैपिडो चालक साहिल खान उर्फ रेहान थे। उन्होंने बताया कि उनके इलाके के विधायक ने पिछले 5 सालों में बहुत काम किया है। पहले सड़कें नहीं थीं, अब बन गई हैं। उनके लहजे से साफ़ झलक रहा था कि वे टीएमसी के कट्टर समर्थक हैं। छंगाणी के यहां स्वाद बड़ा लाज़वाब था। फिर बड़ा बाज़ार के कलाकार स्ट्रीट पर बॉम्बे सैंडविच खाया, बहुत ही लज़ीज़ था। सैंडविच वाले ने बताया कि बंगाल में चुनाव के वक्त बड़ी धाँधली होती है। यहां मनी पॉवर मसल पॉवर से हर चुनाव जीता जाता है। यह क्षेत्र जोड़ासाँको विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहाँ तीन उम्मीदवार हैं: भरत कुमार तिवारी, विजय उपाध्याय और विजय ओझा तीनों ब्राह्मण हैं। विजय उपाध्याय और विजय ओझा के जीतने के प्रबल अवसर हैं। यानी तय है 'विजय' की ही होगी 'विजय'! यहाँ क्षेत्रीय पार्षद मीनादेवी पुरोहित हैं जो वर्षों से ज़मीनी स्तर पर जनता से जुड़ी रही है। एक विचलित करने वाला दृश्य देखा जब मुख्य सड़क पर ही लोग पेशाब करते दिखे। जहां शौचालय जैसा भी कुछ नहीं है और आस पास सबने मौन साध रखा था। जहां शौचालय बने भी है तो वहां कोई दीवार ही नहीं है आदमी आराम से खड़े रहकर खुलेआम लघुशंका करता है। यह देखकर मन थोड़ा उदास हुआ। दोपहर बाद कुछ मीठा खाने की तलब हुई पास में ही हल्दीराम था। वहां रसगुल्ला खाया पर इंदौर के गीता भवन स्थित रसगुल्ला हाउस वाले से अच्छा नहीं था। लेकिन हाँ, 'छेना चॉकलेट' नाम की एक मिठाई ज़रूर ट्राय की और उसका स्वाद वाकई ग़ज़ब का था। वहां से रैपिडो बुक कर शाम 4 बजकर 30 मिनट पर मैं प्रेस क्लब कोलकाता पहुंचा।
दो मिनट बाद ही प्रज्ञानंद चौधरी जी भी आ गए। 76 वर्षीय बेहद विनम्र और ज़मीन से जुड़े हुए इंसान। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में दो बार सदस्य रह चुके हैं। जब एनयूजेआई (नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया) का बँटवारा नहीं हुआ था तब वे उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वर्तमान में वेस्ट बंगाल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के अध्यक्ष हैं। काफी देर तक उनसे बातचीत हुई रिपोर्टर के तौर पर वे वित्तीय बीट कवर करते हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि रामभुवन सिंह कुशवाह जी और ओमप्रकाश फरकिया जी से मेरी बात करवाओ। मैंने दोनों को फोन किया। काफी समय बाद एक-दूसरे से बात करके सब बहुत प्रसन्न हुए। प्रज्ञानंद जी ने थम्स अप पिलाई और मेरी रिपोर्टिंग के बारे में पूछा। फोटो खिंचवाने के बाद जाते वक्त मैंने उन्हें भी इंदौरी सेव का पैकेट थमा दिया।
थोड़ी देर बाद प्रेस क्लब में ही राज मिठौलिया जी से मुलाकात हुई। वे एनयूजेआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके है, बरसों तक प्रेस क्लब कोलकाता के अध्यक्ष थे और पिछले 15 साल से प्रेस क्लब के चुनाव अधिकारी हैं। यह एकमात्र ऐसे व्यक्ति है जो कभी किसी चुनाव में नहीं हारे। कभी-कभी कुछ मुलाकातें यूँ ही अनायास हो जाती हैं और सदैव स्मरणीय रहती हैं। मैंने उनके साथ फोटो खिंचवाई। फिर वहाँ से रोहित झा भैया को फोन किया जो इस वक्त न्यूज़लॉन्ड्री में प्रोड्यूसर हैं और पहले दूरदर्शन में काम करते थे। उनका स्टेटस देखकर पता चला था कि वे भी कोलकाता में हैं। फोन पर बात की तो उन्होंने लोकेशन भेज दी। मैं कोलकाता की पीली टैक्सी में बैठकर विक्टोरिया मेमोरियल के पास पहुँचा। टैक्सी चालक 25 साल से कोलकाता में रहने वाला पर वोटर आईडी बिहार का बना हुआ है। समय-समय पर वे वोट देने भी जाते हैं। उनका कहना था कि, "जबसे ममता दीदी आई हैं मनमर्ज़ी बढ़ गई है। गुंडागर्दी बढ़ गई है। पहले वाला मुख्यमंत्री सही था।" उस शाम रोहित भैया व्यस्त थे उन्होंने मैसेज कर सूचित किया कि हम कल दोपहर में जादवपुर यूनिवर्सिटी में मिलते हैं मैंने हाँ कर दी। रैपिडो से वापस विवेकानंद केंद्र आया। रास्ते में गाड़ी चालक प्रीतम थे जो टॉलीगंज के निवासी है उनके विधायक अरूप बिस्वास है। प्रीतम के अनुसार पिछले 5 सालों में क्षेत्र में बहुत विकास हुआ। "टॉलीगंज से तो बस एक ही नाम है अरूप बिस्वास। वही जीतेंगे।" पर दिलचस्प बात है कि प्रीतम खुद कभी किसी को वोट नहीं देते! वे हमेशा नोटा पर बटन दबाते हैं।
रात को स्वामी विवेकानंद का पैतृक घर देखने गया जहाँ उनका जन्म हुआ था। लगभग 8 बजने वाले थे, बाहर से फोटो खींची, अंदर गया तो पता चला कल सुबह 10 बजे आइएगा। फिर बाहर निकलकर 'डोसा इन' नाम के रेस्टोरेंट में गया पूर्णतः शाकाहारी। मिक्स वेज पिज़्ज़ा डोसा और एक कोल्ड कॉफी ऑर्डर की। दोनों का स्वाद बहुत अच्छा था। खाने के बाद रेस्टोरेंट के मालिक से बात की उनसे कहा, "इस बार मानिकतला से श्रेया पांडेय को जिता रहे हैं क्या?" तो वे बोले, "हम दूसरी जगह रहते हैं, हमें यहाँ की राजनीति नहीं पता।" अगले दिन समीर घोष जी से मिलना था, फिर दक्षिणेश्वर काली मंदिर जाना, रामकृष्ण मिशन और विवेकानंद जी का पैतृक घर के साथ कॉफी हाउस भी देखकर एयरपोर्ट के लिए निकलना था। इसीलिए रात में जल्दी सो गया।
16 अप्रैल 2026 - सुबह साढ़े पांच बजे उठा। तैयार होकर समीर घोष जी से मिलने उनकी दी हुई लोकेशन के लिए कैब बुक की। सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर निकला। रास्ते में ट्रैफिक जाम भी मिला आधे घंटे बाद सुबह करीब पौने सात बजे 'प्रमोद निकेतन' पहुँचा। कैब चालक का कहना था, "इस बार चुनाव में टीएमसी ही जीतेगी ज़्यादा चर्चा उसी की है। पर ये भाजपा वाले आखिर में खेल कर देते है! कुछ कह नहीं सकते। आप देखिएगा बिहार जैसा हाल इधर भी हो सकता है।" मैं जिस इलाके से निकला था और जहाँ पहुंचा उनमें ज़मीन-आसमान का फर्क था। यह नया कोलकाता था तुलनात्मक रूप से साफ-सुथरा, ऊँची-ऊँची नई इमारतें और एक विकसित इलाका। समीर घोष जी के घर पहुँचा। उन्हें हुगली के लिए बस पकड़नी थी तो हम रास्ते में ही पैदल चलते-चलते बातें करते रहे। उन्हें अफसोस हुआ कि वे मुझे चाय नहीं पिला पाए। वे सेवानिवृत्त सेना अधिकारी हैं। 2006 में कोलकाता आ गए, यहाँ टाटा कंपनी में काफी साल काम किया। अब भाजपा की कैंपेनिंग के लिए काम करते हैं। मूलतः हुगली में तारकेश्वर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया, "वहाँ भाजपा का उम्मीदवार मजबूत है पर कोऑर्डिनेशन कमज़ोर है।" मेन रोड़ तक हम साथ आए, जाते वक्त उनके साथ फोटो खींचा फिर उन्होंने मुझे सतरंगी सी कोलकाता की सरकारी बस में बिठाया और वे भी खुद हुगली की दूसरी बस में बैठ गए। मैं बस से बिधान नगर तक गया वहाँ से ऑटो रिक्शा लेकर शोभाबाज़ार मेट्रो स्टेशन पहुंचा और फिर मेट्रो से सीधे दक्षिणेश्वर मंदिर। आज का मौसम भी शानदार था बारिश होने वाली थी। हर तरफ बादल ही बादल थे। सुबह से सूरज चाचू ने दर्शन नहीं दिए थे। मेट्रो से बाहर का नज़ारा बेहद खूबसूरत लग रहा था।
मंदिर परिसर पहुंचकर मोबाइल और जूते लॉकर में रखे और दक्षिणेश्वर काली मंदिर की वास्तुकला, शिल्पकला को निहारता रहा। सच में अद्भुत। दर्शन महज़ 10 मिनट में हो गए। मंदिर परिसर में 12 बड़े-बड़े शिवलिंग बने हुए हैं, काली माता की मूर्ति जो सिंहासन पर विराजमान है वाकई अद्वितीय। पुजारी ने फल, साड़ी, लाल फूल और सिंदूर की डिबिया दी। मैंने अपने घरवालों को, नानाजी के यहाँ, बुआजी को, अपने बेस्ट फ्रेंड को और मेरे कुछ खास लोगों को वीडियो कॉल पर मंदिर परिसर के दर्शन करवाए। मेरे मामाजी ने मंदिर परिसर से मिट्टी मंगवाई थी एक डिब्बे में मिट्टी भरकर ले आया। फिर रैपिडो से विवेकानंद केंद्र गया, प्रसाद और सब चीज़ें रखकर पैदल ही स्वामी विवेकानंद जी के पैतृक घर की ओर निकला जो एक अत्यंत सुंदर संग्रहालय में परिवर्तित हो चुका है। वहाँ 15 मिनट की एक अद्भुत एनिमेटेड 3डी फिल्म देखी जो स्वामी जी के अमेरिका में हुए प्रसिद्ध भाषण पर आधारित थी। आनंद आ गया। उनका पैतृक घर बहुत सुंदर तरीके से संरक्षित किया गया है। बहुत सारी जानकारी हासिल हुई स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को सूर्योदय से ठीक 6 मिनट पहले हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनकी माताजी ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी और फिर ऐसा मस्तीखोर बच्चा पैदा हुआ कि उसकी ऊर्जा को शांत करने के लिए माताजी को ठंडा पानी बच्चे के माथे पर डालना पड़ता था।
म्यूजियम के बाहर फोटो खींचवाकर मैं कॉलेज स्ट्रीट स्थित कॉफी हाउस गया। वहां का एस्थेटिक ही अलग है काफी पुराना, ऐतिहासिक दीवारों पर सुंदर पेंटिंग्स। कोल्ड कॉफी और ऑनियन पकोड़ा खाया फिर रोहित झा भैया से मिलने चल पड़ा। आज सुबह फिर उन्होंने टेक्स्ट किया था, "1 बजकर 30 मिनट पर जादवपुर यूनिवर्सिटी, गेट नंबर 3।" रोहित भैया बेनेट यूनिवर्सिटी में 2022 में आए थे एमयूएन के लिए। तब वे दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से बीए इकनॉमिक्स कर रहे थे। बाद में आईआईएमसी नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया, फिर दूरदर्शन में काम किया और अब न्यूज़लॉन्ड्री में प्रोड्यूसर हैं। काफी समय बाद मेरी उनसे मुलाकात होनी थी मन में बहुत उत्साह था। जादवपुर यूनिवर्सिटी पहुँचकर 5 मिनट इंतज़ार किया और रोहित भैया आ गए। वहां उनकी सहयोगी न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्टर सुहासिनी बिस्वास थी जो कोलकाता की ही है। न्यूज़लॉन्ड्री की संपादक मनीषा पांडे जादवपुर यूनिवर्सिटी में एक विशेष शो के लिए आने वाली थीं जिसमें विभिन्न विचारधाराओं के छात्रों से बात होनी थी। एबीवीपी, एसएफआई, टीएमसीपी, लेफ्ट विंग, रैशनल सब चाहिए थे। रोहित भैया, सुहासिनी और मैं हम तीनों शो के लिए अच्छी लोकेशन और छात्रों को ढूँढने निकले। बीच में कोल्ड्रिंक पी उमस बहुत ज्यादा थी, बादल चारों तरफ छाए थे। दोपहर 3 बजे तक सारा काम निपट गया। मनीषा पांडे मैडम आ चुकी थीं, शूट चालू हो गया। मुझसे जितनी मदद हो सकती थी मैंने रोहित भैया और सुहासिनी का सहयोग किया। अब विदा का समय था।
रोहित भैया के साथ फोटो खींचवाई, फिर मैं गेट नंबर 3 के बाहर खड़ा हुआ और रैपिडो बुक की शाम लगभग 5 बजकर 15 मिनट पर विवेकानंद केंद्र पहुँचा। केयरटेकर बलराम जी को बुलाया चाबी दी कमरा खाली किया। जब बिल की बात की तो बलराम जी ने साफ मना कर दिया और कहा, "कुछ भी नहीं।" मेरा मन नहीं माना 5 दिन रहा था, इतना मान-सम्मान मिला तो दान-धर्म के रूप में जो भी मन से निकला उन्हें दे दिया। बचे हुए 3 सेव के पैकेट थे जो बलराम जी को दिए और कहा आप प्रवीण जी को और अरविंद जी को भी दे देना। अंत में बलराम जी के साथ सेल्फी ली, फिर एयरपोर्ट के लिए कैब बुक की। कैब चालक जो सुंदरबन डेल्टा के पास दक्षिण 24 परगना जिले की कुलतली विधानसभा में रहते है। यहां के विधायक गणेशचंद्र मंडल के बारे में बोले, "पिछले 5 साल में इस व्यक्ति ने कुछ नहीं किया। सारा पैसा अपनी जेब में भरा।" उनके इलाके में न अस्पताल है, न कॉलेज लगभग हर चीज़ के लिए कोलकाता आना पड़ता है। मैं एयरपोर्ट पहुँचा फिर सिक्योरिटी चेकइन से के बाद अंदर 'उड़ान यात्री कैफे' में गया। वहाँ बेहद सस्ती दरें थीं, 20 रुपए का समोसा, 20 रुपए की कॉफी, 20 रुपए की ही स्वीट ऑफ द डे। एयरपोर्ट पर इतनी कम दरों में पहली बार खाया। वरना 250-300 से कम का। कुछ मिलता नहीं है एयरपोर्ट पर। गेट नंबर 101 के सामने बैठकर पूरी यात्रा का आत्म-मंथन करता रहा।
एक आत्म-परीक्षा के तौर पर इस यात्रा में मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि अच्छा फैसला लिया कि चुनाव के समय पश्चिम बंगाल हो आया। पहली बार वीडियो फॉर्मेट में रिपोर्टिंग कर रहा था अब तक हमेशा टेक्स्ट फॉर्मेट में की थी। वीडियो रिपोर्टिंग में कहाँ गलत था, क्या-क्या गलतियाँ की हैं इस पर मैंने ध्यान दिया। बहुत सारी चीज़ें मालूम पड़ीं कहाँ सुधार की आवश्यकता है, आगे से कौन-सी बातों का ध्यान रखना है। एक बात तो मैं दावे से कह सकता हूँ कि अगली बार जब पश्चिम बंगाल आऊँगा, तब मेरे पास दो-तीन नहीं, आराम से 25-30 लोगों का एक अच्छा सर्किल बन चुका है। किसी बात की कोई टेंशन नहीं रहेगी।
जहाँ तक चुनाव का सवाल है पश्चिम बंगाल की हवा बदल रही है। फिर भी कोई दावे के साथ नहीं कह सकता क्योंकि क्रिकेट और राजनीति में कब क्या हो जाए, किसी को नहीं पता। इस यात्रा को सफल बनाने में सर्वप्रथम रामभुवन सिंह कुशवाह जी का बहुत-बहुत धन्यवाद उन्हीं की बदौलत मुझे प्रज्ञानंद चौधरी जी का नंबर मिला और विवेकानंद केंद्र में 5 दिन तक ठहरने की व्यवस्था हो पाई। Pankaj Mukati Politicswala सर का भी आभार जिन्होंने मुझे प्रभात खबर कोलकाता के संपादक कौशल किशोर त्रिवेदी जी से मिलवाया उनसे भी अच्छा ज्ञान अर्जित हुआ। लोकेन्द्र सिंह सर का भी धन्यवाद जिन्होंने मुझे तनय सरकार (Tanay Sarkar) का नंबर दिया और तनय सरकार की बदौलत ही मैं पश्चिम बंगाल के एक विधायक का साक्षात्कार कर पाया। तनय जी ने मिदनापुर जिले में एकदम बड़े भाई की तरह खाने से लेकर वापस सुरक्षित कोलकाता पहुँचाने तक अतिथि सत्कार बखूबी किया। कुलगुरु Vijay Manohar Tiwari सर का भी धन्यवाद जिन्होंने मुझे तीन लोगों के नंबर दिए थे। जिसमें से दो लोग कहीं व्यस्त थे उनसे बात तो हुई पर मिल नहीं पाया। तीसरे व्यक्ति समीर घोष जी थे जो आखिरी दिन सुबह मिले और उन्होंने भी बहुत-सी बातें बताईं।
इन सभी लोगों के अलावा इस यात्रा में हर उस छोटे-बड़े व्यक्ति का योगदान शामिल है जिससे मैं मिला। चाहे वह कैब वाला हो, रैपिडो वाला हो, या फिर 19 साल का फर्स्ट टाइम वोटर आयुष शॉ हो, या फिर उपमहापौर के पीए उत्पल दा, या विधायक स्वयं उत्तम बारीक। सभी का योगदान है शामिल इस यात्रा में किसी एक की बदौलत ये कभी संभव नहीं हो पाता। मेरे परिजनों, शिक्षकों, शुभचिंतकों का भी धन्यवाद जिनके आशीर्वाद, दुआओं और प्यार की वजह से मेरी यह यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। धन्यवाद। ~ नैवेद्य पुरोहित National Union of Journalists (India) National Union of journalists India-NUJI IFJ - International Federation of Journalists Prabhat Khabar Politicswala Politics Politicswala-mp India Vivekananda Kendra #यात्रा_वृत्तांत #पश्चिम_बंगाल #विधानसभा_चुनाव_2026 #कोलकाता #मिदनापुर #चंडीपुर #जोड़ासांको #बिधान_सरोनी #मानिकतला #स्वामी_विवेकानंद #रामकृष्ण_मिशन #रसगुल्ला #मिष्टीदोई #उत्तम_बारीक #प्रज्ञानंद_चौधरी #राज_मिठौलिया #कौशल_किशोर_त्रिवेदी #प्रभात_खबर #तनय_सरकार #रीच_क्राफ्ट_पीआर #टीएमसी #बीजेपी #सीपीआई

Comments

Popular posts from this blog

20 की उम्र में चारधाम पूरे, रिश्तों का पंचधाम भी जी लिया!

जड़ों से जुड़ाव की पुकार: एक बार फिर कुलदेवता के दरबार में!

मन की शांति का रहस्य: स्वीकार्यता है!