कला समीक्षक दीपक पगारे से खास बातचीत: यायावरी और जीवन की अनकही कहानियां
भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के अपने सामुदायिक रेडियो स्टेशन "रेडियो कर्मवीर 90.0 एफएम - जो करता है जन गण मन की बात।" रेडियो कर्मवीर के कार्यक्रम 'अक्षर अक्षर बात चली है' के लिए सुप्रसिद्ध कला समीक्षक दीपक पगारे जी से बातचीत का अवसर मिला। चर्चा के केंद्र में थी लेखिका डॉ. बिनय राजाराम की पुस्तक “यायावरी” लेकिन बात केवल पुस्तक तक सीमित नहीं रही, वह जीवन, यात्रा और संवेदना तक बढ़ती चली गई।
संवाद के दौरान उनकी साहित्यिक यात्रा, कला समीक्षा की गंभीरता और शब्दों के प्रति उनकी तपस्या को करीब से समझना अपने आप में सीख थी। और फिर जब यह पता चला कि वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की प्रथम बैच 1990-91 के विद्यार्थी रहे हैं यानी हमारे ‘सुपर डुपर सीनियर’ तो यह मुलाक़ात औपचारिक नहीं आत्मीय हो गई।
एक तरफ डबिंग रूम में लगे माइक थे, दूसरी तरफ अनुभव की दशकों पुरानी रौशनी। सोच रहा था संस्थान केवल इमारतों से नहीं बनते बल्कि ऐसे लोगों की साधना से बनते हैं।
~ नैवेद्य पुरोहित
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सही सोच रहे हो नैवेद्य बाबू संस्थान केवल इमारतों से नहीं बनते...... ऐसे लोगों की साधना से बनते है
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