विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर एमसीयू में रेडियो कार्यशाला आयोजित
(नैवेद्य पुरोहित)
विश्व रेडियो दिवस की पूर्व संध्या पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के नालंदा पुस्तकालय स्थित धर्मगंज सभागार में रेडियो विषयक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर BBC Media Action की पत्रकार एवं यूनेस्को कंसल्टेंट सुश्री शेफाली चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को रेडियो पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यशाला की शुरुआत करते हुए उन्होंने अपने रेडियो सफर का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि सितंबर 1999 में एक दिन घर से हॉस्टल लौटने के बाद उन्हें डॉ. पवित्र श्रीवास्तव का फोन आया, जिससे उन्हें भोपाल में चल रहे ‘युववाणी’ कार्यक्रम के इंटरव्यू की जानकारी मिली। सौभाग्य से उनका चयन हो गया और वहीं से उनकी रेडियो यात्रा की शुरुआत हुई।
सुश्री चतुर्वेदी ने रेडियो के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेडियो और डाइटिंग में समानता है दोनों में निरंतरता, धैर्य और अनुशासन जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि रेडियो पर कही जाने वाली हर बात श्रोता के लिए “स्प्रिंग बोर्ड” की तरह होती है, जो उसे नई दिशा दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष या आपदा वाले क्षेत्रों में जब संचार माध्यम बाधित हो जाते हैं और सब जगह जैमर लगा दिए जाते हैं, तब कम्युनिटी रेडियो सूचना का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरता है।
कार्यशाला के दौरान उन्होंने "खिड़की मेहंदी वाली" नामक रेडियो शो सुनाया और प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास भी करवाया, जिससे विद्यार्थियों को रेडियो प्रस्तुति और संपादन की बारीकियों को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी के लिए सत्र ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। साथ ही रेडियो पत्रकारिता के प्रति नई समझ विकसित करने वाला अनुभव था।
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