संपादक संघ द्वारा नववर्ष पत्रकार मिलन समारोह का शानदार आयोजन!
(नैवेद्य पुरोहित)
बुधवार दिनांक 08 जनवरी 2025 को "संपादक संघ, मध्यप्रदेश (रजि.)" द्वारा आयोजित नववर्ष पत्रकार मिलन समारोह ने पत्रकारिता के प्रति समर्पण, सत्य और जनहित के मूल्यों को न केवल पुनः परिभाषित किया, बल्कि इसे एक प्रेरणादायक मंच प्रदान किया। इंदौर के मालगंज चौराहे पर नीमा धर्मशाला के सामने होटल अरिहंत दाल बाटी इस ऐतिहासिक समारोह का साक्षी बना। बड़ी संख्या में पत्रकारों की उपस्थिति ने इसे यादगार बना दिया। कार्यक्रम में नेशनल यूनियन जर्नलिस्ट ऑफ़ इंडिया (एनयूजेआई) के नवनिर्वाचित सदस्यों का सम्मान और समाजसेवा में अनुकरणीय योगदान देने वाले वरिष्ठजनों का अभिनंदन भी किया गया।
संपादक संघ: राष्ट्रवादी विचारधारा का ध्वजवाहक
संपादक संघ, मध्यप्रदेश (रजि.) पत्रकारों एकमात्र ऐसा मंच है जहां पत्रकारिता को समर्पित तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियाँ कार्य कर रही हैं। यह संगठन राष्ट्रवादी विचारधारा और जनसरोकार की पत्रकारिता के उद्देश्य को लेकर संगठित हुआ है। समाज और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित संपादक संघ का यह आयोजन पत्रकारिता के मूल्यों को सुदृढ़ करने और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करने वाला साबित हुआ।
एनयूजेआई अध्यक्ष सुरेश शर्मा का प्रेरणादायक संबोधन
नेशनल यूनियन जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया (एनयूजेआई) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार सुरेश शर्मा का संबोधन इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। उन्होंने कहा, "पत्रकारिता का धर्म सत्य और तथ्य पर आधारित जनसरोकार की पत्रकारिता करना है।" एनयूजेआई के गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह संगठन 1972 में पत्रकारों के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित किया गया। आपातकाल के दौर का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा, "देश में दो विचारधाराएँ चलती है - वामपंथी और राष्ट्रवादी। आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने सभी ट्रेड यूनियनों को समर्थन के लिए बुलाया था। उस समय इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्यूजे) ने समर्थन दिया, लेकिन उस ज़माने में एनयूजेआई की लीडरशिप ने साफ मना कर दिया। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने उन्होंने कहा कि यह संविधान के खिलाफ है लोकतंत्र के खिलाफ है। आप चाहे अभी गिरफ्तार कर लें या गेट से बाहर करने के बाद गिरफ़्तार कर लीजिएगा, लेकिन हम इसका समर्थन नहीं करेंगे।" श्री शर्मा ने आगे जनसरोकार की पत्रकारिता का महत्व बताया और कहा, "पत्रकार का काम सूचना देना नहीं है बल्कि फाइलों में दबी हुई चीज़ों को बाहर निकालना है हमें वो बात करनी है जो पब्लिक के लिए हो। अगर कोई पत्रकार मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की चापलूसी करता है, तो वह पत्रकार नहीं है वह एक 'भांड' है। हमारा काम फाइलों में दबी सच्चाई को उजागर करना, सवाल पूछना और समाज के मुद्दों को उजागर करना है ।"
एनयूजेआई के नवनिर्वाचित सदस्यों का सम्मान
इस कार्यक्रम में एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर भोपाल से प्रकाशित दैनिक शिखर वाणी प्रधान संपादक सुरेश शर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले महेंद्र दुबे और आभा निगम का सम्मान किया गया। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि पहली बार प्रदेश से किसी व्यक्ति को एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली हैं।
वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल राजदेव का विशेष सम्मान
कार्यक्रम में सिंधी समाज के वरिष्ठ समाजसेवी पूर्व पार्षद और दैनिक स्वदेश के पूर्व संचालक रहें श्यामलाल राजदेव को उनके सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके द्वारा किए गए कई सारे शवों के अंतिम संस्कार और समाजसेवा के अन्य कार्य प्रेरणादायक रहे हैं। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा, "तुम साथ न दो मेरा चलना मुझे आता है, हर आग से वाकिफ हूँ, जलना मुझे आता है!" उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि पत्रकारिता का अर्थ केवल खबर लिखना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है।
संपादक संघ के उपाध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र पुरोहित ने लगभग 55 साल से भी ज्यादा पुराने किस्से को साझा किया और सभी से उन्होंने जोर देकर अपील कर कहा, "कलम की धार कभी कमज़ोर न होने दें इसे हमेशा समाजहित और राष्ट्रहित के लिए उपयोग करें।" वरिष्ठ फोटोजर्नलिस्ट राजू रायकवार ने कहा, "जिनके घर में संपन्नता हो वहीं पत्रकारिता करें।" उनका यह बयान पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति पर एक सटीक टिप्पणी है। उनकी बात से यही समझ में आता है कि जिन लोगों के पास आर्थिक संसाधन नहीं हैं, वे इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए बड़ा संघर्ष करते हैं। यह बात पत्रकारिता के क्षेत्र में व्याप्त विषमता और आर्थिक असमानता को उजागर करती है।
यादगार संचालन और जीवंत संवाद
दैनिक स्वदेश के वरिष्ठ पत्रकार राजेश यादव ने अपनी विशिष्ट शैली में कार्यक्रम का संचालन किया। उनकी ऊर्जा और अनोखे अंदाज ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के अंत में दैनिक दोपहर के वरिष्ठ पत्रकार चंपालाल गुर्जर ने उपस्थित सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।
स्मरणीय आयोजन और दाल-बाफले का स्वाद
कार्यक्रम के समापन के बाद सभी ने स्वादिष्ट दाल, बाफले और लड्डू का आनंद लिया, जिसने आयोजन को और अधिक यादगार बना दिया। यह पूरा कार्यक्रम समाज और पत्रकारिता के मूल्यों को समर्पित रहा। यह आयोजन केवल एक प्रोग्राम नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों और जनसरोकार को पुनः स्थापित करने का उत्सव था। संपादक संघ का यह प्रयास पत्रकारिता में अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्रहित को बढ़ावा देने का प्रतीक बनकर सामने आया। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक पवित्र दायित्व भी है।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए, जिनमें लघु एवं मझौले समाचार पत्रों के भीष्म पितामह ओमप्रकाश फरकिया, स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, धार प्रेस क्लब के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, नेताजी सुभाष मंच के मदन परमालिया, डॉ. राजेंद्र सचदेव, संतोष बाजपेई, नारायण जोशी, दिनेश सालवी, अशोक बड़गुर्जर, अर्जुन राठौर, नकुल पाटोदी, कमलेश्वर सिंह सिसोदिया, संजय लाहोटी, ओमप्रकाश जैन, मुकेश भार्गव, चेतन गंधे, गोविंद गुर्जर, देवीलाल गुर्जर, शरद मिश्रा, अतुल शाह, योगेश राजदेव और सहज राजदेव सहित बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।









ऐसे ही बढ़िया लिखते रहो... और विद्वान और गुणी लोगों के साथ जितना सिख सकते हो सीखने की कोशिश करो, सीखते रहो.... अच्छा पत्रकार बन कर देश का नाम रौशन करो
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