इंदौर में 'स्वर शतकम' कार्यक्रम, संघ के १०० साल !

(नैवेद्य पुरोहित)
माँ अहिल्या की नगरी इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 'स्वर शतकम' कार्यक्रम का आयोजन इंदौर के दशहरा मैदान पर शुक्रवार 03 जनवरी 2025 को किया गया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की गूंज और संघ के आदर्शों का अद्भुत संगम देखने को मिला।
संघ सुप्रीमों का प्रेरक उद्बोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संघ प्रमुख डॉ. मोहन मधुकरराव भागवत ने उपस्थित स्वयंसेवकों और प्रबुद्धजनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "हमारी रण संगीत परंपरा जो विलुप्त हो गई थी अब फिर से लौट आई है। महाभारत में पांडवों ने युद्ध के समय घोष किया था, उसी तरह संघ ने भी इसे पुनः जागृत किया है।" साथ ही मुस्लिम द्रुपद गायक मोइनउद्दीन डागर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि वह बताते थे कि यह कितनी कठिन तपस्या है एक-एक सुर लगना चाहिए। लाठी चलाने का महत्व पर भी उन्होंने प्रकाश डाला और कहा, "डंडा चलाने का उद्देश्य झगड़ा करना नहीं है, बल्कि यह उस स्थिति से निपटने के लिए है जब कोई हमारे सामने आकर गिर जाए, तो हम उसकी मदद कर सकें। लाठी चलाने वाले व्यक्ति को वीर वृत्ति प्राप्त होती है, वह कभी नहीं डरता।"
घोष वादन का भव्य प्रदर्शन दशहरा मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में मालवा प्रांत के 28 जिलों से आए 868 घोष वादकों ने शंख, नगाड़ा, बांसुरी और ढोल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ अपनी कला का प्रदर्शन किया।
इस आयोजन में मुझे भी शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जहां मैंने अनेक गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की। विशेष रूप से मेरे दादाजी के मित्र और वरिष्ठ भाजपा नेता, लोकतंत्र सेनानी ओमप्रकाश जी फरकिया से भेंट हुई। उनसे प्राप्त आशीर्वाद और उनके अनुभवों ने मुझे प्रेरित किया। यह आयोजन न केवल संघ के शताब्दी वर्ष का उत्सव था, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और व्यापकता को समझने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान करता है। इंदौर की इस पवित्र भूमि पर संस्कृति, समर्पण और संगठन का यह अनुपम संगम सदैव स्मरणीय रहेगा। #राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ #संघ_के_१००_साल #मोहन_भागवत #आर_एस_एस #मालवा_प्रांत

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