प्रेरणा का स्रोत: रामभुवन सिंह कुशवाह की पत्रकारिता यात्रा

(नैवेद्य पुरोहित) पत्रकारिता की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ कलम के धनी नहीं, बल्कि अपने संघर्ष, साहस और समाज के प्रति समर्पण से अगली पीढ़ियों के लिए जीती-जागती प्रेरणा बन जाते हैं। 82 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और शोधकर्ता श्री रामभुवन सिंह कुशवाह उन्हीं में से एक हैं। हाल ही में मुझे अपने मित्र शिवम तिवारी और हर्ष कर्णवाल के साथ उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मुलाकात हमारे लिए केवल एक संवाद नहीं, बल्कि अनुभवों और सीख का ऐसा अनमोल खजाना साबित हुई जिसे हम जीवनभर संजोकर रखेंगे।
आपातकाल का संघर्ष और जेल यात्रा बातचीत के दौरान जब उन्होंने आपातकाल के दिनों की स्मृतियाँ साझा कीं, तो हम स्तब्ध रह गए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उस दौर में मीसा के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लगभग 20 महीनों तक जेल में रखा गया। एक-एक दिन कठिनाइयों और संघर्षों से भरा था, लेकिन उनका संकल्प अटूट था। पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ है। अगर इसके लिए जेल भी जाना पड़े तो वह कीमत बहुत छोटी है। उनके चेहरे पर गर्व की मुस्कान और आत्मविश्वास हमें यह समझा रहा था कि पत्रकार की असली ताकत उसकी कलम और सच के प्रति उसकी निष्ठा होती है। विदेश यात्राएँ और प्रतिनिधित्व कुशवाह जी ने हमें विदेश में उनके अनुभव भी सुनाए। उन्होंने बताया कि जब नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (NUJI) के अध्यक्ष अच्युतानंद मिश्र जी थे, तब उन्हें पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बेल्जियम भेजा गया। वहाँ उन्होंने भारत की पत्रकारिता का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा उन्होंने मॉरीशस, तुर्की, थाईलैंड, नेपाल, हॉलैंड, लक्समबर्ग, मिस्र, श्रीलंका, जापान, कोरिया, मलेशिया, वियतनाम, जर्मनी, आयरलैंड सहित अनेक देशों की यात्राएँ कीं। इन यात्राओं के किस्से सुनाते समय उनकी आँखों में वही चमक दिखाई दी, जो एक जिज्ञासु युवा पत्रकार की होती है।
स्वदेश ग्वालियर की यादें अपने करियर के शुरुआती दिनों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे स्वदेश, ग्वालियर में संवाददाता रहे, तब संसाधन बेहद सीमित थे। सच को सामने लाना जोखिम भरा काम था। पत्रकारिता तभी सार्थक होती है जब वह सत्ता से सवाल पूछे और समाज को आईना दिखाए।
साहित्यिक योगदान और लेखन लेखक के तौर पर उन्होंने कई पुस्तकों लिखी उनकी चर्चित रचनाओं में ‘मध्यप्रदेश : आज और कल’, ‘मध्यप्रदेश विकास वार्षिकी’, ‘चुनाव के आस-पास’ (राजनीतिक डायरी) और ‘बेटे लौट आओ’ (व्यंग्य संग्रह) जैसी कृतियाँ शामिल हैं। भाषा और राजनीति पर उनकी गहरी पकड़ है और वे लंबे समय से विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी से भी जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे विवेकानंद केन्द्र मध्यभारत प्रांत के प्रमुख है। पत्रकारिता में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया है। उन्हें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पत्रकारिता पुरस्कार और विश्वभारती पत्रकारिता सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। मुलाकात के अंत में जब उन्होंने हमें अपना साहित्य और विवेकानंद साहित्य भेंट किया, तो वह क्षण हमारे लिए बेहद भावनात्मक और आत्मीय था। 82 वर्ष की आयु में भी उनकी ऊर्जा, स्पष्टता और सकारात्मक सोच हमें यह सिखाती है कि उम्र केवल एक संख्या है, सीखने और सिखाने का जुनून ही इंसान को जीवंत बनाता है। आज जब मीडिया को लेकर अक्सर निराशा और नकारात्मकता की बातें सुनने को मिलती हैं, तब रामभुवन सिंह कुशवाह जैसे वरिष्ठ पत्रकार यह भरोसा दिलाते हैं कि सच्चाई और समर्पण के साथ पत्रकारिता अब भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है। नकारात्मक सोच कभी आगे नहीं बढ़ाती। जोखिम लो, सच के लिए खड़े रहो और ईमानदारी से अपनी कलम को समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल करो। मेरे लिए और मेरे मित्रों के लिए यह मुलाकात केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक सीख थी। हम अपने आपको सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें वरिष्ठ पत्रकार रामभुवन सिंह कुशवाह जी का सान्निध्य मिला। उनका संघर्ष, उनका अनुभव और उनका आशीर्वाद हमारे लिए आने वाले जीवन की राह को आलोकित करता रहेगा। #रामभुवन_सिंह_कुशवाह_ #पत्रकारिता #आपातकाल #विदेश_यात्रा #पत्रकार_जीवन #प्रेरणा #साहित्य #संघर्ष_से_सफलता

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