आर्ट ऑफ लिविंग ने 2024 को मेरे लिए यादगार साल बना दिया !

(नैवेद्य पुरोहित) कभी-कभी जिंदगी में कुछ पल ऐसे आते हैं जो हमारी पूरी सोच, हमारा नज़रिया और हमारी आत्मा को अंदर से बदल देते हैं। मेरे लिए 2024 ऐसा ही एक साल रहा। इस साल मैंने आर्ट ऑफ लिविंग की YES!+ वर्कशॉप में हिस्सा लिया, और यह अनुभव मेरे जीवन का सबसे खास और यादगार बन गया।
शुरुआती संकोच और पहला अनुभव अप्रैल 2024 की बात है। एनएसएस की तरफ से पहली बार टाइम्स ग्रुप की बेनेट यूनिवर्सिटी में आर्ट ऑफ लिविंग YES!+ वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा था। जब मैंने इस वर्कशॉप के बारे में सुना, तो दिल में एक झिझक थी। बड़ी वजह थी इसकी फीस - ₹2500। मुझे लगा कि मेरे लिए यह ज़रूरी थोड़ी ना है यह तो उन लोगों के लिए है जो अवसाद से ग्रस्त है...जीवन से थक चुके है....मुझे इसकी क्या जरूरत मेरी ज़िंदगी में तो सब अच्छा ही खुशहाल चल रहा है....! एक सवाल था मन में कि क्या यह वर्कशॉप वाकई इस रकम के लायक होगी ? क्या इससे मेरी जिंदगी में कोई फर्क पड़ेगा ? हालांकि, एक एनएसएस स्वयंसेवक और वर्कशॉप आयोजक होने के नाते मैंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला कर लिया। उस वक्त मेरे मन में बस यही था कि यह बस मात्र एक 'जिम्मेदारी' सी है और मुझे इसे निभा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेनी है। लेकिन मैं ये नहीं जानता था कि यह जिम्मेदारी मेरे लिए जिंदगी का सबसे खूबसूरत अनुभव बनने वाली है। जब मैंने पहली बार वर्कशॉप पूरी की, तो मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने मेरे मन से हर तरह का बोझ हटा दिया हो। वो हल्कापन, वो शांति और वो खुशी मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। ऐसा लगा कि मेरी आंखें एक नए नजरिए से खुल गई हैं। चारों तरफ बस सकारात्मकता और खुशहाली नजर आने लगी। ऐसा लगा जैसे इस दुनिया में कोई बुराई है ही नहीं।
सुदर्शन क्रिया का जादू ! वर्कशॉप का सबसे खास हिस्सा था - सुदर्शन क्रिया। यह दुनिया की सबसे पावरफुल ब्रीदिंग टेक्नीक कही जाती है और इसे करने के बाद मैंने समझा कि क्यों यह इतनी शक्तिशाली है। पहली बार जब मैंने इसे किया तो ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरी आत्मा अंदर से शुद्ध हो गई हो। शरीर के अंदर जितनी भी नकारात्मकता थी सब बाहर निकल गई सुदर्शन क्रिया के बाद सारी भावनाएं बह जाती है मन एकदम हल्का शांत सा लगने लगता है। हालांकि पूरी प्रक्रिया के दौरान रोना बहुत आता है। सुदर्शन क्रिया ने मुझे सिखाया कि: कैसे तनाव को दूर करके एक शांत और स्थिर मन प्राप्त किया जाए। कैसे हर परिस्थिति को स्वीकार करके खुशी को महसूस किया जाए। कैसे खुद पर भरोसा करके आत्मविश्वास बढ़ाया जाए। कैसे रिश्तों में प्यार और समझदारी लाई जाए। और सबसे अहम, कैसे हर चीज में सकारात्मकता को देखा जाए। इस वर्कशॉप में सिखाए गए कुछ नॉलेज प्वाइंट्स थे जैसे: लोगों को वैसे ही स्वीकार करो जैसी वे हैं। बिलॉन्गिंगनेस का सिद्धांत। अपेक्षाएं खुशी को कम कर देती हैं। डिमांड्स प्यार को खत्म कर देती हैं। ये बातें मेरे दिल में गहराई तक उतर गईं। मुझे लगा जैसे अब मैं हर परिस्थिति में कुछ अच्छा देख सकता हूं। मेरे आस-पास सब कुछ सुंदर और सकारात्मक लगने लगा।
दूसरी बार का अनुभव: दोगुनी खुशी और उत्साह अप्रैल की उस पहली वर्कशॉप के बाद मैं खुद को ज्यादा शांत, खुश और फोकस्ड महसूस कर रहा था। नवंबर 2024 में इस वर्कशॉप का हमने फिर से आयोजन करवाया तो मैं बेहद उत्साहित हो गया था। मेरे लिए तो इस बार वर्कशॉप पूरी तरह से मुफ्त थी क्योंकि आर्ट ऑफ लिविंग का एक नियम है कि जो भी एक बार इस वर्कशॉप को कर लेता है, वह इसे पूरी दुनिया में कहीं भी किसी भी समय बिना किसी शुल्क के फिर से कर सकता है। लेकिन इस बार का अनुभव मेरे लिए खास इसलिए भी था क्योंकि इस बार वर्कशॉप को सफल बनाने के लिए पहले के मुकाबले हमारी पूरी टीम ने जी-जान लगा दी थी। वंश गुप्ता, आँचल मित्तल, नितिन अमन, अदिति शर्मा और अर्थ सक्सेना के साथ मिलकर हम लोगों ने 60 प्रतिभागियों को इस वर्कशॉप में रजिस्टर करवाया। अप्रैल में जहां 30 लोग थे वहीं नवंबर में संख्या दोगुनी हो गई। अब 2025 के लिए हमने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है जो कि रेगुलर हर हफ़्ते फॉलोअप सेशन के साथ हमें पूरा होते दिख रहा है। इस वर्कशॉप ने मेरे अलावा कई सारे बच्चों के जीवन को इतना बदल दिया है कि हम चाहते है ज्यादा से ज्यादा लोग इसका हिस्सा बनें। अप्रैल 2025 में, हम इसे फिर से बेनेट यूनिवर्सिटी में आयोजित कर रहे हैं। इस बार हमारा लक्ष्य है 121+ प्रतिभागी है।
दोनों टीचर्स: सरलता की मिसाल मेरे लिए इस वर्कशॉप को जो चीज और भी खास बना गई वह थे हमारे टीचर्स - सिद्धार्थ कर सर और अश्वनी अरोड़ा सर। इन दोनों का व्यक्तित्व इतना सरल, सादगीपूर्ण और विनम्र रहा कि उनकी बातें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति को अपने दिल में एक सुकून मिलता रहा। आप यह जानकर हैरान हो सकते हैं कि ये दोनों नासा के एस्ट्रोनॉट्स, तिहाड़ जेल के कैदियों, आईआईटी-आईआईएम के विद्यार्थियों और भी देश-विदेश के बड़े-बड़े नामी लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग का यह कोर्स सिखाते हैं। 180 से ज्यादा देशों में दुनियां को ज़िंदगी जीने की कला, आर्ट ऑफ लिविंग सिखाने वाले यह टीचर्स का उनकी बातों में, उनके व्यवहार में कहीं भी घमंड का नामोनिशान नहीं दिख रहा था। दोनों के चेहरे पर हमेशा एक सच्ची मुस्कान रहती है, जो हर व्यक्ति को पूरे समय प्रेरित करती रही। कोई भी व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत निजी समस्या लेकर उनके पास सहज ही चला जाता था और वे उसकी समस्या का समाधान मिनटों में कर देते थे। हर व्यक्ति को उन्होंने अपना समझा 'बिलॉन्गिंगनेस' का सिद्धांत वह भावना लोगों में जगाई।
आर्ट ऑफ लिविंग वर्कशॉप ने न केवल स्ट्रेस, टाइम और रिलेशनशिप मैनेजमेंट सिखाया बल्कि हमारा आत्मविश्वास बढ़ाया और जीवन को नई दिशा देने वाली तकनीकों से परिचित करवाया। 16 नवंबर शनिवार के दिन इस वर्कशॉप के प्रतिभागियों ने सेवा प्रोजेक्ट के अंतर्गत गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव में सरकारी स्कूल का दौरा किया। इस प्रोजेक्ट में वहां बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने और उनकी जरूरतों को पूरा करने का हमने एक छोटा सा प्रयास किया था। एनएसएस वॉलंटियर्स और आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिभागियों ने सरकारी स्कूल के उन बच्चों के लिए 40 नोटबुक्स बनाईं, जो कि पुराने पन्नों और अनुपयोगी कागजों से तैयार की गई थीं। ये नोटबुक्स बच्चों के लिए हमने सजाई भी थी।
उन छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ साझा किए गए क्षणों ने पूरे माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया था। इस दौरान हमने बच्चों को चॉकलेट्स और कपकेक्स भी वितरित किए जिनसे उनकी खुशी दोगुनी हो गई। बच्चों की उस मुस्कान ने हर व्यक्ति को खुशी और आत्मसंतोष का अनुभव कराया। बिलॉन्गिंगनेस के इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि जाति, धर्म, रंग-रूप या आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर हर व्यक्ति को समान रूप से अपनाना चाहिए। बिलॉन्गिंगनेस का यह पाठ हर व्यक्ति को अपना मानने और भेदभाव से मुक्त समाज बनाने की प्रेरणा देता है। इस बार लगातार ध्यान और सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कर रहे मेरे साथ कई प्रतिभागियों ने भी इसे अपनी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बना लिया है। इन क्रियाओं ने उनके तनाव को कम किया और उन्हें मानसिक शांति का अनुभव कराया।
एक अनमोल निवेश! यह वर्कशॉप मेरे लिए एक ऐसा निवेश बन गई है जिसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती। ₹2500 की फीस भले ही शुरुआत में मुझे ज्यादा लगी हो लेकिन आज मैं महसूस करता हूं कि यह वर्कशॉप इससे कई गुना ज्यादा कीमती है। आखिर में, मैं अपने आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षकों को तहेदिल से धन्यवाद देना चाहता हूं। उन्होंने न केवल मुझे एक नई दिशा दी, बल्कि मेरे जीवन को और भी ज्यादा खुशियों और शांति से भर दिया। अगर आप भी अपने जीवन में एक ऐसा अनुभव चाहते हैं, जो आपको अंदर से बदल दे तो मैं आपको इस वर्कशॉप में हिस्सा लेने की सलाह दूंगा। यह सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि एक जिंदगी बदलने वाला अनुभव है। #आर्ट_ऑफ_लिविंग #ArtOfLiving #यस_प्लस_वर्कशॉप #YES!+Workshop #सुदर्शन_क्रिया #एनएसएस #PersonalGrowth #PositiveVibes

Comments

  1. नैवेद्य तुम अच्छा लिखने लगें हो, ब्लॉग पढ़कर आर्ट ऑफ लिविंग के प्रति आकर्षण महसूस हो रहा है और ऐसा लगता हैं कि हमें भी एक बार इसे करना चाहिए। यह सब आप जैसे युवा बच्चों के आने वाले जीवन को सकारात्मकता का संदेश देता हैं

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

20 की उम्र में चारधाम पूरे, रिश्तों का पंचधाम भी जी लिया!

जड़ों से जुड़ाव की पुकार: एक बार फिर कुलदेवता के दरबार में!

मन की शांति का रहस्य: स्वीकार्यता है!