छात्र शक्ति के आगे झुका बेनेट यूनिवर्सिटी प्रशासन, ‘काला कानून’ लिया वापस
(नैवेद्य पुरोहित)
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित टाइम्स ग्रुप की बेनेट यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध आखिरकार रंग लाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15 नवंबर की शाम 7 बजे सभी विद्यार्थियों को एक मेल भेजा जिसमें 'मौसम की खराब स्थिति' के कारण 15 नवंबर 2024 की रात से यूनिवर्सिटी कैंपस में नए नियम लागू किए जाने का उल्लेख था। इस नए नियम के मुताबिक छात्रों को नए हॉस्टल समय, यूनिवर्सिटी फूड आउटलेट जल्दी बंद करने और रात में फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध समेत दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य लिखा था। फूड डिलीवरी पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर उठे विवाद में छात्रों ने जमकर हंगामा किया। हजारों छात्रों ने प्रदर्शन किया इसके दबाव के आगे प्रशासन ने इस 'काले कानून' को अगले ही दिन हटाने की घोषणा की।
आखिर क्या था पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों से बेनेट यूनिवर्सिटी के छात्रों में असंतोष चरम पर था। हॉस्टल में खाने की खराब गुणवत्ता, रिपीटेड मेनू और फिर अंत में फूड डिलीवरी पर लगाए प्रतिबंध ने छात्रों को आगबबूला कर दिया था। प्रशासन के इस कदम से छात्रों को अपने पसंद के भोजन तक पहुंच नहीं मिल पा रही थी, जिसके चलते उन्होंने विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना। विरोध इस कदर बढ़ चुका था कि छात्र शक्ति के आगे यूनिवर्सिटी प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्हें यह अहसास हुआ कि यह फैसला ग़लत था ! अगले ही दिन 16 नवंबर को हर चीज़ की अनुमति दे दी गई। विद्यार्थियों को अब फिर से फूड डिलीवरी की सुविधा का लाभ मिलने लगा और कैंपस फूड आउटलेट्स भी देर रात तक खुले रहे।
यूनिवर्सिटी के विभिन्न क्लबों और सोसाइटियों ने अपने सदस्यों को सूचित किया है, "अब जब विश्वविद्यालय ने छात्रों की मांगें मान ली हैं तो प्रदर्शन में भाग लेने की आवश्यकता नहीं है। सभी से अपील की गई कि वे यूनिवर्सिटी के माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखें और उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाएं।हमारा विश्वविद्यालय हमारा दूसरा घर है। इसे बचाए रखना और इसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।" प्रशासन ने भी छात्रों से अपील की है कि वे यूनिवर्सिटी की गरिमा और संरचना का सम्मान करें।
बेनेट यूनिवर्सिटी में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में कानपुर निवासी भारतीय जनता युवा मोर्चा के सक्रिय युवा नेता चित्रांश गुप्ता ने कहा, "कॉलेज वाले हमें अपने कमरे में खाना पकाने की भी अनुमति नहीं देते है, न ही इंडक्शन, केटल जैसे उपकरणों के उपयोग की अनुमति है, जिससे कि हम मैगी, पोहा ऐसी चीज़ें तक नहीं बना सकते। और सभी जानते हैं कि मेस का खाना कैसा है...! (व्यंग में) हम सभी अपने परिवार से दूर रहते हैं, फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट है और पिछले 3 महीनों से इस एनवायरनमेंट में एडजस्ट होने की कोशिश कर रहे हैं। हम अपने मां दादी या घरवालों के हाथों का बना खाना नहीं खा रहे हैं, हमें अपना पैसा खर्च करने का अधिकार है। गलत यह था कि रात 10 बजे के बाद फूड डिलीवरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया! यह हमारे माता-पिता का पैसा है, मेस फीस देने के बाद हम मजबूरी में बाहर से खाना खरीदते हैं क्योंकि मेस का खाना खराब है। ऊपरवाले का लाख शुक्र हैं कि यूनिवर्सिटी ने यह फैसला वापस ले लिया है!"
बेनेट यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब भी छात्र एकजुट होते है तो किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। यह घटना न केवल उनकी एकता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि छात्र शक्ति के सामने प्रशासन भी झुकने को मजबूर हो सकता है।
आगे की राह
अब छात्रों और प्रशासन दोनों के सामने एक चुनौती है कि विश्वविद्यालय के वातावरण को शांतिपूर्ण और स्वस्थ बनाए रखना। छात्रों ने अपने हक की लड़ाई जीत ली है, लेकिन यह जिम्मेदारी भी उनकी ही है कि वे इस माहौल को सकारात्मकता के साथ बनाए रखें।
#छात्र_शक्ति #बेनेट_यूनिवर्सिटी #टाइम्स_ग्रुप #काला_कानून





Comments
Post a Comment