जब दैनिक भास्कर की खबर से हिल गया पीएमओ: खेतान ग्रुप और वो "भोपाल गैस त्रासदी"का डर

(नैवेद्य पुरोहित)
पत्रकारिता में अक्सर कहा जाता है कि खबर वो है जिसे कोई दबाना चाहे। साल 1985 के आसपास रतलाम में एक बहुत बड़ा औद्योगिक दंगल चल रहा था। एक तरफ थे कलकत्ता के बड़े उद्योगपति शैलेश खेतान (स्व.घनश्यामदास बिड़ला परिवार के दामाद), जो अपना विशाल रेडको खैतान बैनर के तहत 'खेतान केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स' उद्योग लगा रहे थे। दूसरी तरफ थीं जयंत विटामिन्स की मालकिन प्रेरणा ठाकुर, जिनकी जिद थी, कि यह उद्योग रतलाम में न आए। मामला कोर्ट-कचहरी से होता हुआ आर-पार की लड़ाई सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया थी। इसी बीच 'नईदुनिया' के रतलाम दफ्तर ने एक बड़ी योजना बनाई। उन्होंने एक विस्तृत आलेख तैयार किया कि कैसे इस उद्योग से भयानक जहरीली का गैस' का रिसाव हो सकता है और भोपाल जैसी गैस त्रासदी दोबारा रतलाम में घट सकती है। लेकिन, खेल तब बिगड़ा जब जयंत विटामिन्स के प्रबंधक ने नईदुनिया की 'अपेक्षाओं' को पूरा करने से मना कर दिया। वो सारे गोपनीय दस्तावेज और आलेख रमेश मिश्र 'चंचल' के हाथ लग गए। मिश्र ने तुरंत वो दस्तावेज इंदौर में मनमोहन अग्रवाल जी को भेजे और कहा, "इसे फ्रंट पेज पर लगाना है।" उस रात इंदौर न्यूज़ रूम में हड़कंप मच गया। प्रधान संपादक यतीन्द्र भटनागर, रोमेश जोशी, सागरमल मौला और गोकुल शर्मा सबके फोन मिश्र जी के पास खनखनाने लगे। सब डरे हुए थे कि इतना बड़ा धमाका करेंगे तो कोर्ट के चक्कर कौन काटेगा? रमेश मिश्र ने अपनी चिर-परिचित बेबाकी से जवाब दिया, "साहब, ये स्टोरी तो नई दुनिया में भी लगने वाली है, अब देख लो आपको पीछे रहना है या आगे!"
अगले दिन धमाका हो गया। भास्कर में यह खबर फ्रंट पेज पर 'बॉटम बैनर' में लगी। उसी दिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जावरा में सभा थी। हेलीपैड पर भास्कर की सैकड़ों प्रतियां बांटी गईं। खबर का असर ये हुआ कि दिल्ली से PMO का फोन सीधा CPCB और MPCB के पास पहुँचा और अगले ही दिन खेतान ग्रुप की NOC निरस्त कर दी गई। करोड़ों का प्रोजेक्ट धराशायी हो गया और जिद्दी खेतान को अपना उद्योग खरगोन के निमरानी में शिफ्ट करना पड़ा। लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई, इस धमाके के बाद दिल्ली और कलकत्ता के बड़े वकीलों के जरिए दैनिक भास्कर को भारी-भरकम नोटिस भेजे गए। इसके बाद से खैतान के प्रेसिडेंट जे एल जाजू की मिश्र जी का दबंग शख्सियत को पहचाना और पक्की मित्रता में बदल गया,आज भी दोनों अच्छे सौहार्द से मिलते हैं।एक अच्छा इंसान होता हैं जो सत्य के लिए डिगता नहीं है। (अगली किस्त में पढ़िएगा: जब दिल्ली और कलकत्ता से नोटिस आए, तो इंदौर के वकील तो घूमने का बहाना ढूंढ रहे थे, लेकिन प्रधान संपादक यतीन्द्र भटनागर जी ने बंद कमरे में मिश्र जी के साथ मिलकर वो कौन सा 'ब्रह्मास्त्र' (जवाब) तैयार किया कि फिर कभी नोटिस की दस्तक नहीं हुई?) #दैनिक_भास्कर_इंदौर_लॉन्चिंग_टीम_के_गुमनाम_नायक #सीरीज_35 #डीबी_कॉर्प #गुमनाम_नायक #रमेश_मिश्र_चंचल

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