माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में पब्लिक सर्विस एडवरटाइजमेंट पर कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन
(नैवेद्य पुरोहित)
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा गुरुवार को “पब्लिक सर्विस एडवरटाइजमेंट” विषय पर कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के तक्षशिला ब्लॉक में स्थित लता मंगेशकर सभागार में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संजय धस्माना (सीईओ एवं क्रिएटिव हेड, संवाद) रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को पब्लिक सर्विस एडवरटाइजिंग (पीएसए) की बारीकियों, क्रिएटिव प्रक्रिया और डिजिटल युग में विज्ञापन के बदलते स्वरूप पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
शुरुआती संबोधन में कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सर ने कहा कि रचनात्मकता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए फ्रांसीसी लेखक ओनरे द बालज़ाक की रचनाओं का उल्लेख किया और बताया कि एक सशक्त लेखक एक ही पंक्ति में गहरे सामाजिक सत्य को व्यक्त कर सकता है, “जहां संपत्ति है, वहां कलह है।” उन्होंने विद्यार्थियों को सृजनात्मक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए शुभकामनाएं दीं।
वहीं संजय धस्माना ने विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई विज्ञापन प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि आज के छात्रों का कार्य स्तर उनके छात्र जीवन से कहीं अधिक बेहतर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रभावी विज्ञापन के लिए “एक सशक्त दृश्य और एक सटीक पंक्ति” ही पर्याप्त होती है। उन्होंने कंटेंट की अधिकता से बचने और साहित्य पढ़ने की आदत विकसित करने की सलाह दी जिससे शब्द भंडार और अभिव्यक्ति क्षमता मजबूत होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल मीडिया आज के दौर में सबसे प्रभावी माध्यम है क्योंकि इसमें दो-तरफा संवाद (टू वे कम्यूनिकेशन) संभव है। पीएसए के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह सामाजिक मुद्दों से जुड़ा होता है और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से ब्रांड निर्माण का एक सशक्त साधन बन सकता है।
क्रिएटिव प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए उन्होंने एजेंसियों में होने वाली ब्रेनस्टॉर्मिंग की प्रक्रिया और वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से विचार विकसित करने की तकनीक समझाई। उन्होंने बताया कि रोजमर्रा के अनुभवों से जुड़े विज्ञापन दर्शकों के साथ अधिक प्रभावी रूप से जुड़ते हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने डिजिटल युग की चुनौतियों, विज्ञापन की बदलती प्रकृति और करियर संभावनाओं से जुड़े प्रश्न पूछे। धस्माना ने कहा कि आज विज्ञापन का क्षेत्र तेजी से पारंपरिक माध्यमों से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है और परिवर्तन ही स्थायी प्रक्रिया है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों द्वारा तैयार विज्ञापनों की प्रस्तुति दी गई, जिनका विश्लेषण करते हुए संजय धस्माना ने उन्हें आवश्यक सुधार और मार्गदर्शन प्रदान किया। संपूर्ण आयोजन ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।
#माखनलाल_चतुर्वेदी_राष्ट्रीय_पत्रकारिता_एवं_संचार_विश्वविद्यालय #भोपाल #संजय_धस्माना #संवाद #पीएसए #सीएसआर



Comments
Post a Comment