अभिनव अमृत: यादों और आशीर्वादों से भरी एक संगीतमय संध्या
(नैवेद्य पुरोहित)
शहर की आत्मा में बसने वाली संगीत की वो परंपरा जिसे अभिनव कला समाज ने दशकों से सहेजकर रखा है उसके 75वें वर्ष में प्रवेश का ये अवसर भावुक कर देने वाला रहा। “अभिनव अमृत” महोत्सव के शुभंकर लोगो का लोकार्पण इंदौर की सांस्कृतिक विरासत की झलक थी। मुख्य अतिथि पूज्य गोस्वामी गोकुलोत्सव महाराज ने जब कहा कि “हर छोर में है इंदौर का गौरव”। यह कार्यक्रम संस्था के इतिहास के खूबसूरत पड़ाव को दिखा रहा था और हम सब वहाँ उपस्थित इस बात के साक्षी हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कथक के महान गुरु 86 वर्षीय पद्मश्री से सम्मानित डॉ. पुरु दाधिच जी से इस दौरान मुलाकात हुई, कुछ पल बातचीत का अवसर मिला और उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ ये मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद खास रहा। ऐसे गुरुओं का सान्निध्य मिलना ही अपने आप में सौभाग्य है। कार्यक्रम के दौरान मंच पर जब पुराने स्वर्णिम दिनों की बातें हुईं पांच-पांच घंटे तक चलने वाली संगीत सभाएं, पंडित रविशंकर जी का अद्भुत साधना से भरा वादन—तो लगा जैसे वो दौर फिर से जीवित हो उठा हो। इस बीच भाई जय दवे से भी आत्मीय मुलाकात हुई। कार्यक्रम के पश्चात देर तक भिया पंकज क्षीरसागर के साथ बैठकर लम्बी, दिल से जुड़ी बातचीत हुई वो पल सच में यादगार बन गए। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और कथक की मनमोहक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने माहौल को पूरी तरह सुरमयी बना दिया। हर प्रस्तुति में समर्पण और साधना साफ झलक रही थी।
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