दैनिक भास्कर के साथ 'सेकंड इनिंग' और वर्ल्ड चैंपियनशिप की वो ऐतिहासिक गूंज!
(नैवेद्य पुरोहित)
वक्त का पहिया घूमकर वापस वहीं आता है जहाँ से सफर शुरू हुआ था। 1983 से लगातार डेढ़ साल काम करने के बाद में ₹200 के स्वाभिमान की खातिर भास्कर छोड़ने वाले धर्मेश यशलहा का नाता इस संस्थान से कभी पूरी तरह टूटा नहीं। सालों बाद, जब धर्मेश बैडमिंटन की दुनिया का एक बड़ा नाम बन चुके थे तब दैनिक भास्कर और उनके बीच एक नई और 'प्रोफेशनल' पारी की शुरुआत हुई। यह पारी थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंदौर की कलम और कैमरे का लोहा मनवाने की।
साल 2009 में हैदराबाद में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का आयोजन हुआ। यह भारत के लिए एक बड़ा मौका था और दैनिक भास्कर के लिए इसकी रिपोर्टिंग का जिम्मा संभाला धर्मेश जी ने। लेकिन इस बार वे सिर्फ एक रिपोर्टर नहीं थे।
धर्मेश बताते हैं, "मैंने वहां रिपोर्टिंग और फोटोग्राफी, दोनों की जिम्मेदारी निभाई। उस समय वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे बड़े इवेंट को कवर करना और साथ ही बेहतरीन फोटोज़ निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी।" दैनिक भास्कर वालों ने भी उनके इस हुनर की कद्र की और उन्हें रिपोर्टिंग के साथ-साथ फोटोग्राफी का भी अलग से पारिश्रमिक दिया।
हैदराबाद वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद धर्मेश यशलहा ने भारत में होने वाले लगभग सभी बड़े बैडमिंटन मुकाबलों और राष्ट्रीय स्पर्धाओं को दैनिक भास्कर के लिए कवर किया। कभी उनके नाम बाय-लाइन के साथ खबरें छपतीं, तो कभी 'खेल संवाददाता' के रूप में उनकी समीक्षाएं पाठकों तक पहुँचतीं।
वे याद करते हैं, "जब तक पारिश्रमिक मिलता रहा, मैंने पूरी शिद्दत से काम किया। लेकिन जब रिपोर्टिंग और समीक्षाओं पर पारिश्रमिक देने की परंपरा बंद होने लगी तो मैंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।" यह उनका वही पुराना तेवर था जो काम की कीमत और कलम की गरिमा से कोई समझौता नहीं करता था।
धर्मेश ने 'खेल हलचल' और 'नईदुनिया' के लिए भी बहुत लिखा, जहाँ उनकी सचित्र रिपोर्टिंग बहुत सराही गई। आज भी उनके पास उन ऐतिहासिक मैचों की यादें और तस्वीरें महफूज़ हैं, जो इंदौर की खेल पत्रकारिता की एक विरासत हैं।
(अगली किस्त में पढ़िए: इस श्रृंखला के किरदार धर्मेश यशलहा पर आखरी किस्त जिसमें बात होगी कि कैसे एक मैच में शटल गिनने की छोटी सी बात ने धर्मेश जी का नाम 'गिनीज़ बुक' में दर्ज करा दिया...! 61 साल के यशलहा साहब रिटायरमेंट की इस उम्र में आज भी फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए अपनी पत्रकारिता को ज़िंदा रखे हुए है।)
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