जी-हजूरी की आदत नहीं थी बस अपना काम जानते थे

(नैवेद्य पुरोहित)
पत्रकारिता में अक्सर दो तरह के लोग मिलते हैं एक वो जो हुक्मरानों की 'जी-हजूरी' में अपनी तरक्की देखते हैं, और दूसरे वो जो सिर्फ अपने काम की 'इबादत' करते हैं। धर्मेश यशलहा दूसरी जमात के नुमाइंदे थे। दैनिक भास्कर के उस शुरुआती दौर में जहाँ हर कोई अपनी जगह बनाने की जद्दोजहद में था, धर्मेश ने अपने 'स्वाभिमान' का दामन कभी नहीं छोड़ा।
धर्मेश का उसूल सीधा था वक्त पर आना, पूरी शिद्दत से अपना काम करना और वक्त पर विदा लेना। वे एक फुल-टाइमर थे और उनका काम इतना प्रभावी था कि संपादक से लेकर मालिक तक उनसे प्रभावित थे। वे कहते हैं, "मेरे काम से सब खुश थे, पर मेरी एक 'खराबी' थी कि मैं किसी की जी-हजूरी करना नहीं जानता था।"
उन दिनों डाक विभाग में उनके साथ स्व. सागरमल मौला जैसे लोग भी थे। धर्मेश आज भी बेबाकी से याद करते हैं कि कैसे कुछ लोग तो सिर्फ 'जी-हजूरी' के दम पर टिके हुए थे। जिन्हें न तो ढंग से न्यूज़ बनाना आता था, न ही हेडिंग देना। सारा काम हम लोग करते थे और जब वो खुद कुछ करते, तो उसमें ढेर सारी गलतियाँ होती थीं। पर उनकी एक खूबी थी वो बहुत 'जी-हजूरी' करते थे।
दफ्तर में जब भी मालिकों का आना होता, तो चाटुकारिता का एक अलग ही मंज़र दिखता। लेकिन धर्मेश अपनी मेज पर टिके रहते। वे कहते हैं, "मेरी आदत थी कि चाहे सामने कोई भी हो, मैं कभी जी-हजूरी के लिए खड़ा नहीं होता था। मेरा मानना था कि अगर मेरा काम पुख्ता है, तो मुझे किसी की खुशामद करने की जरूरत नहीं।"
यह उनकी इसी बेबाकी का नतीजा था कि संपादक यतीन्द्र भटनागर जी ने उन पर भरोसा जताया। उनका अनुशासन और उनकी 'साफगोई' ही उनकी असली पहचान बन गई थी। भले ही वे किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं बने, लेकिन उनकी काबिलियत का लोहा हर कोई मानता था। यहाँ तक कि जब उन्होंने बाद में इस्तीफा दिया, तो संस्थान ने उन्हें एक पॉजिटिव 'प्रमाण पत्र' देकर विदा किया क्योंकि उनके काम में उंगली उठाने की गुंजाइश किसी के पास नहीं थी।
यह कहानी आज के दौर के पत्रकारों के लिए एक बड़ा सबक है कि कलम की ताकत तभी बचती है जब उसे स्वाभिमान की स्याही मिले। (अगली किस्त में पढ़िए:धर्मेश जी और संपादक भटनागर जी के अटूट भरोसे का किस्सा जिसने उस दौर के खेल डेस्क पर एक अलग ही हलचल मचा दी थी) #दैनिक_भास्कर_इंदौर_लॉन्चिंग_टीम_के_गुमनाम_नायक #सीरीज_10 #डीबी_कॉर्प #गुमनाम_नायक #धर्मेश_यशलहा

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