एक पत्रकार के बेबाक सवाल पर ठिठक गए थे प्रधानमंत्री

(नैवेद्य पुरोहित)
दैनिक भास्कर के इंदौर संस्करण की शुरुआती टीम में सुरेश राठौर वह नाम था जिनकी गिनती उन पत्रकारों में होती थी। जहां अपनी पहचान केवल खोजी खबरों से नहीं उनके फक्कड़ और बेबाक स्वभाव से भी होती थी। सत्ता के सामने झुकना उनके स्वभाव में नहीं था यही कारण था कि उनकी पत्रकारिता में एक अलग ही तेवर दिखाई देता था। यह किस्सा 1984 के बाद उस दौर का है जब देश में नई राजनीतिक परिस्थितियाँ बन रही थीं। राजीव गांधी देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार इंदौर आने वाले थे।
एक खबर जिसने बदल दिया पूरा कार्यक्रम - प्रधानमंत्री बनने के बाद राजीव गांधी की इंदौर यात्रा तय हुई थी। उस समय पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। ठीक इसी दौरान इंदौर पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा। बाद में उसकी पहचान एक खालिस्तानी आतंकी के रूप में हुई। घायल होने के बाद उस आतंकवादी का एमवाय में इलाज चल रहा था। यह खबर अत्यंत संवेदनशील थी। पत्रकारिता का असली काम ही ऐसे सच को सामने लाना होता है जिसे सत्ता या प्रशासन छिपाना चाहे। इसी खबर को सबसे पहले फ्रंट पेज पर ब्रेक किया सुरेश राठौर साहब ने। जब यह खबर दैनिक भास्कर के पहले पन्ने पर प्रकाशित हुई तो राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। उस खबर के बाद प्रधानमंत्री का वह दौरा तत्काल स्थगित कर दिया गया था। एक स्थानीय अख़बार के लिए यह बहुत बड़ी एक्सक्लूसिव खबर थी। लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू होती है।
इंदौर एयरपोर्ट पर वह ऐतिहासिक मुलाकात - कुछ समय बाद जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी इंदौर आए, तब देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम थे। उस समय इंदौर के कलेक्टर अजीत जोगी हुआ करते थे। दैनिक भास्कर का एक प्रतिनिधिमंडल भी एयरपोर्ट पर मौजूद था। उसमें 4-5 पत्रकार शामिल थे, जिनमें दादाजी राजेन्द्र पुरोहित भी थे। जैसे ही राजीव गांधी विमान से उतरे, उन्होंने कलेक्टर से एक सवाल पूछा, "व्हेयर इज़ मिस्टर सुरेश राठौर?" कलेक्टर अजीत जोगी ने इशारा करते हुए कहा, “सर, वो रहे…मैं उन्हें बुलाता हूँ।” लेकिन राजीव गांधी ने तुरंत कहा, “नहीं…मैं खुद उनके पास जा रहा हूँ।”
प्रधानमंत्री और पत्रकार आमने-सामने - प्रधानमंत्री सीधे राठौर साहब के पास पहुँचे और कहा, “मिस्टर राठौर…” राठौर साहब ने सहजता से जवाब दिया, “यस सर” राजीव गांधी ने पूछा, “आप मुझे पहचानते हैं?” राठौर साहब मुस्कुराए, “हाँ सर ” फिर प्रधानमंत्री ने वह सवाल किया जो शायद उनके मन में लंबे समय से था, “जो खबर आपने छापी थी…वह खबर आपको कहाँ से मिली?” राठौर साहब ने बेहद शांत स्वर में जवाब दिया, “सर, यह बहुत गोपनीय बात है… लेकिन खबर बिल्कुल फैक्ट थी।” राजीव गांधी ने कुछ क्षण राठौर साहब को देखा और फिर कहा, “राठौर…आई विल हेल्प यू (मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूं) बोलो क्या चाहिए तुमको?” यह एक प्रधानमंत्री का प्रस्ताव था देश के सबसे शक्तिशाली पदों में से एक पर बैठे व्यक्ति की ओर से एक पत्रकार को यह कहा जा रहा था। लेकिन राठौर साहब का जवाब उतना ही सीधा था, “सर, कुछ नहीं।” राजीव गांधी ने इशारे से कहा, “मनी-मनी 💸...बुढ़ापे में काम आएगा।”
वह सवाल जिसने सबको चुप कर दिया - इस पर राठौर साहब ने अचानक एक ऐसा सवाल पूछ लिया जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा, “सर… आपको बुढ़ापा आएगा?” एक पल के लिए माहौल बिल्कुल शांत हो गया। प्रधानमंत्री राजीव गांधी कुछ क्षण उन्हें देखते रहे। फिर हल्की मुस्कान के साथ बोले, “आई डोंट नो…” तब राठौर साहब ने कहा, “सर, जब आपको ही नहीं मालूम कि आपको बुढ़ापा आएगा या नहीं…तो मुझे कैसे मालूम कि मेरा बुढ़ापा आएगा? जब यह ही तय नहीं कि बुढ़ापा आएगा या नहीं आएगा, तो फिर उस पैसे का क्या करेंगे?” कुछ क्षण के मौन के बाद राजीव गांधी ने बस इतना कहा, “एज़ यू लाइक” और बातचीत वहीं समाप्त हो गई।
विधि की विडंबना- समय के साथ जब इस घटना को हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो एक अजीब-सी विडंबना सामने आती है। उस दिन एयरपोर्ट पर हुई बातचीत में “बुढ़ापे” का जो ज़िक्र हुआ था, वह मानो जीवन की अनिश्चितता का एक प्रतीक बन गया। विधि की विडंबना देखिए न तो राजीव गांधी को बुढ़ापा नसीब हुआ और न ही सुरेश राठौर साहब को। 1991 में राजीव गांधी बम विस्फोट में इस दुनिया से विदा हो गए। और वर्षों बाद 2008 में राठौर साहब भी अचानक आए हृदयाघात के कारण शांत हो गए। उस दिन एयरपोर्ट पर पूछा गया वह एक सवाल, “सर, आपको बुढ़ापा आएगा?” आज एक गहरे जीवन-सत्य की तरह याद आता है। (अगली किस्त में पढ़िए: वह प्रसंग जब 80 हजार रुपये से भरा बैग प्रेस कॉम्प्लेक्स में राठौर साहब को मिलता है और वे ढूंढ कर उसके मालिक को वापस लौटा देते है!) #दैनिक_भास्कर_इंदौर_लॉन्चिंग_टीम_के_गुमनाम_नायक #सीरीज_05 #डीबी_कॉर्प #गुमनाम_नायक #दिवंगत_पत्रकार_सुरेश_राठौर

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