‘धुरंधर पार्ट 2 द रिवेंज’ बदले की आग में पहले जैसी लपट नहीं!
(नैवेद्य पुरोहित)
धुरंधर 2 की शुरुआत भगवद गीता के श्लोक कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ से होती है जो दर्शकों को सीधे धर्म कर्म और युद्ध की दुनिया में ले जाता है। शुरुआत ही फिल्म के टोन को गंभीर और आक्रामक तय कर देती है।
फिल्म में आतिफ अहमद का किरदार दिखाया गया है, जो उत्तर प्रदेश के बाहुबली रहे अतीक अहमद से प्रेरित है। राजनीति और अपराध का गठजोड़ यहाँ खुलकर सामने आता है। एक ऐसा चेहरा जो जनता का नेता भी है और ड्रग तस्करी का खिलाड़ी भी।
डायलॉग्स और थीम: फिल्म की असली ताकत -
फिल्म के कई संवाद बड़े प्रभावशाली है जैसे:
1. “बदला लेना आसान नहीं होता, दर्द को हौसले का ईंधन चाहिए होता है और वो ईंधन हर किसी में नहीं होता”
2. “हम मर्द हैं, हमारा काम है लड़ना अपने सपनों के लिए, अपनों के लिए”
3. “मरना तो हम सबको है एक दिन उससे पहले गदर मचा के मरें”
4. “नज़र और सब्र सबसे घातक औजार है हमारे पेशे mei
ये संवाद फिल्म को सिर्फ एक एक्शन ड्रामा के साथ एक एटीट्यूड रिवेंज वाली विचारधारा की कहानी बना देते हैं।
चैप्टर्स में विभाजित बदले की यात्रा -
फिल्म को अलग-अलग चैप्टर्स में बांटा गया है, जो कहानी को एक ग्राफ की तरह आगे बढ़ाते हैं। चैप्टर 1 बर्नट मेमोरी, चैप्टर 2 लुसिफर, चैप्टर 3 घोस्ट्स फ्रॉम द पास्ट, चैप्टर 4 ट्रायल बाय फायर, चैप्टर 5 अननोन मेन, चैप्टर 6 द रिवेंज और आखिर में फाइनल चैप्टर धुरंधर।
“अननोन मेन” का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है एक ऐसा रहस्यमयी व्यक्ति जो धनाधन पाकिस्तान में आतंकियों का सफाया कर रहा है।
सच्ची घटनाओं से जुड़ाव -
फिल्म में भारत में 2016 में हुई नोटबंदी को “ऑपरेशन ग्रीन लीफ” के नाम से दिखाया गया है। यह कहानी को एक रियलिस्टिक और पॉलिटिकल टच देता है।
फिल्म का एक ट्विस्ट तब आता है जब अर्जुन रामपाल का किरदार मेजर इकबाल अपने ही पिता ब्रिगेडियर जहांगीर को मार डालता है। ऐसा लगा जैसे औरंगज़ेब ने अपने पिता शाहजहाँ के साथ क्रूरता की थी वैसा ही आभास हुआ। जब रणवीर सिंह का डायलॉग आता है “ये नया हिंदुस्तान है” तो थिएटर तालियों से गूंज उठता है।
कमजोरियाँ: जहाँ फिल्म पिछड़ गई -
फिल्म का कॉन्सेप्ट और डायलॉग्स मजबूत हैं, लेकिन कुछ चीजें निराश करती हैं। पहली “धुरंधर” में हर एक्शन सीन के साथ दमदार म्यूजिक या पुराने गानों का इस्तेमाल था, जो इस बार गायब है। पहले पार्ट में दिखाया गया “रहमान डकैत” जैसा खतरनाक एक ऑरा वाला विलेन इस बार नहीं दिखता। कोई भी किरदार उस स्तर की टक्कर नहीं दे पाता। इस फिल्म ने जितनी बड़ी उम्मीदें बनाई थीं, वह उन्हें पूरी तरह पूरा नहीं कर पाती।
‘धुरंधर पार्ट 2: द रिवेंज’ एक ऐसी फिल्म है जो अपने डायलॉग्स, पॉलिटिकल टच और मास एंटरटेनमेंट से प्रभावित करती है, लेकिन कंटेंट और इमोशनल डेप्थ में फर्स्ट पार्ट से पीछे रह जाती है। यह फिल्म आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।
⭐ रेटिंग: 2.5/5
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