हम लोग समाज सेवा नहीं करते, हम कॉन्टेंट बेचने के बिज़नेस में हैं - शैलेंद्र तिवारी

(नैवेद्य पुरोहित) माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के पत्रकारिता विभाग में 19 नवंबर 2025 को “चेंजिंग न्यूज़रूम” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र के वक्ता पीपुल्स समाचार पत्र समूह के नेशनल एडिटर शैलेंद्र तिवारी थे। कार्यक्रम स्मार्ट क्लासरूम में प्रातः 11:00 बजे आयोजित हुआ और दो घंटे तक चला। व्याख्यान के दौरान वक्ता ने एक बेहद सटीक और चर्चा योग्य बात कही, “हम लोग समाजसेवा नहीं करते, हम कॉन्टेंट बेचने के बिज़नेस में हैं।’’ यही बात पूरे सत्र की नींव बनी, जिसके इर्द-गिर्द आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों, तकनीक, ऑडियंस और न्यूज़रूम के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा हुई।
न्यूज़रूम में कुछ भी स्थाई नहीं- शैलेंद्र तिवारी ने कहा कि आज के न्यूज़रूम में कुछ भी स्थाई नहीं है। टेक्नोलॉजी इतनी तेज़ी से बदल रही है कि उसे अपनाना ही सबसे बड़ा सर्वाइवल का सवाल बन गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बजाज और नोकिया जैसी कंपनिया अपने-आप को अपडेट नहीं कर पाई, इसलिए बाज़ार से बाहर हो गई। वहीं सैमसंग ने तकनीक अपनाई और आगे बढ़ गया। यही पत्रकारिता पर भी लागू होता है। अगर पत्रकार तकनीक में पीछे रह गया, तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इन्फॉर्मेशन का समुद्र- उन्होंने कहा कि आज इन्फॉर्मेशन का एक ऐसा समुद्र है, जिसमें पत्रकार का असली चैलेंज यह है कि वह इस समुद्र से कितना और क्या चुनता है। कितना लेना है यह आपके ऊपर है। जिस तरह बांध के पानी को संभालने वाला क्षेत्र “कैचमेंट एरिया” कहलाता है, उसी तरह पत्रकार की खबर कितने लोगों तक प्रभाव डालेगी, यह उसके ऑडियंस कैचमेंट पर निर्भर करता है। ऑडियंस ही तय करती है खबर- ट्रेडिशनल जर्नलिज़्म की परंपरा बदल गई है। पहले यह पत्रकार तय करता था कि क्या खबर बनेगी, लेकिन आज खबर ऑडियंस तय करती है। न्यूज़रूम में एडिटर की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाले 5 सालों में उसकी टीम को कौन-कौन सी तकनीकी स्किल्स चाहिए होंगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स का केस स्टडी- उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2000 के पहले न्यूयॉर्क टाइम्स बैंकरप्ट होने वाला था, लेकिन उसने खुद को डिजिटल रूप में बदला, अपनी ऑडियंस को प्राथमिकता दी और 700 मिलियन डॉलर का प्रॉफिट किया। उनका कहना था, “ऑडियंस के लिए रिस्पॉन्सिबल रहना और कंटेंट के प्रति ईमानदार होना ही सफलता का आधार है।” ब्रांड और ऑडियंस की निरंतरता पर उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम लोग समाज सेवा नहीं करते हैं। हम कंटेंट बेचने के बिज़नेस में हैं।” आज असली सवाल यह है कि ब्रांड 24 घंटे में से कितनी देर तक ऑडियंस के साथ खड़ा है? आपका कंटेंट कितने समय तक विज़िबल है। आज मीडिया हाउसेस की सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं: - 1. सैलरी देना 2. टेक्नोलॉजी के सब्सक्रिप्शन इन्हीं दो चीज़ों में सबसे ज्यादा खर्चा हो रहा है। दोनों की लागत लगातार बढ़ रही है। मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट बनने की जरूरत- उन्होंने कहा कि अब एक पत्रकार को मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट बनना ही होगा। कॉन्टेंट राइटिंग पर उन्होंने बेहतरीन बात कही, “अगर आप 1100 शब्द की कॉपी को 1 लाइन में लिख सकते हो और एक लाइन की बात को 1100 शब्दों में विस्तार से बता सकते हो तब आप सच में लिखना जानते हो।” अगर पागलपन जीना हो, तो पत्रकारिता में आना - उन्होंने कहा, “जर्नलिज्म पैशन का बिज़नेस है। पत्रकार को फुल एटीट्यूड होना चाहिए।” यहां एटीट्यूड और ईगो में फर्क है। “ईगो बेहद फ्रेजाइल है, सबसे ज्यादा तकलीफ इसी से आती है।” जो इंडस्ट्री आपको पसंद है, उसके बदलावों को समझना होगा। यह दुनिया तेज़ी से बदल रही है। अगर जिंदगी में शौक पूरे करना चाहते हो, पागलपन जीना है, तो पत्रकारिता में आओ। अगर टेक्नोलॉजी को लीड करना चाहते हो, तो पूरी दुनिया आपके लिए खुली है। जर्नलिज़्म एक तरह से पीआर बिज़नेस है। आपका नॉलेज ही आपका सर्वाइवल तय करता है।
अंत में कही गई शायरी- उन्होंने वसीम बरेलवी साहब की एक सुंदर शायरी सुनाई, “कौन-सी बात कब, कहां, कैसे कही जाती है… अगर यह सलीका आ जाए, तो हर बात सुनी जाती है।” यह विशेष व्याख्यान छात्रों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा। शैलेंद्र तिवारी ने साफगोई से बेहद सरल भाषा में बताया कि पत्रकारिता आज तकनीक, बाजार और ऑडियंस इन तीनों के बीच कैसे संतुलन बना रही है। बदलते समय के साथ खुद को बदलना ही पत्रकार का भविष्य सुरक्षित करेगा। #शैलेंद्र_तिवारी #पीपुल्स_समाचार #चेंजिंग_न्यूज़रूम #विशेष_व्याख्यान #पत्रकारिता_विभाग #माखनलाल_चतुर्वेदी_राष्ट्रीय_पत्रकारिता_विश्वविद्यालय #भोपाल

Comments

  1. सही है ये बात की हम लोग कंटेंट बेचने के बिजनेस में है, शैलेन्द्र तिवारी जी अनुभवी व्यक्ति है उन्होंने सही कहा है नए पत्रकारों को इस सच्चाई को हमेशा ध्यान रखना चाहिए

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