मेरी डिग्री, मेरा सफर: बेनेट यूनिवर्सिटी का 7वां दीक्षांत समारोह
15 नवंबर 2025 यह तारीख मेरे जीवन में हमेशा एक सुनहरी मोहर की तरह चमकती रहेगी। क्योंकि इसी दिन, बेनेट यूनिवर्सिटी का 7वां कॉन्वोकेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, और मैं आधिकारिक तौर पर ग्रैजुएट हो गया। एक साधारण-सा कागज़ का टुकड़ा हाथ में आया, लेकिन उसके पीछे तीन सालों की मेहनत, संघर्ष, यादें, दोस्तियाँ, प्यार और सपने छिपे हुए थे।
इंदौर से ग्रेटर नोएडा: एक परिवार की यात्रा, एक सपना -
गुरुवार की शाम मैं भोपाल से इंदौर के लिए निकला। शुक्रवार शाम ठीक 5 बजे मैं, पापा, मम्मी और नायशा हम चारों इंदौर से हज़रत निजामुद्दीन के लिए ट्रेन पकड़ चुके थे। उस वक्त ट्रेन के डिब्बे में बैठा मैं सभी पुराने फोटोज देख रहा था और सोच रहा था कितनी जल्दी आज का दिन आ गया! शनिवार की अलसुबह हम निज़ामुद्दीन स्टेशन पहुंचे। बाहर की ठंडी हवा ने कंपकंपा दिया। फटाफट कैब बुक की और सीधे सुबह 6:30 बजे ग्रेटर नोएडा में हमारे होटल पहुँचे, जिसे मैंने पहले से ही बुक कर रखा था। जल्दी से नहाकर तैयार हुआ। सफेद शर्ट, काली पैंट, टाई, हॉफ जैकेट और ऊपर से ब्लैक ब्लेज़र पहनकर मैं तैयार था। आईने में खुद को देखकर लगा, "हाँ, आज का दिन मेरा है।"
सुबह 9 बजे हम बेनेट यूनिवर्सिटी पहुंचे। सिक्योरिटी चेक इन के बाद जैसे ही कैंपस में कदम रखा मेरे भीतर बीते तीन सालों के हजारों फ्लैशबैक दौड़ पड़े। पहली क्लास...पहला असाइनमेंट…पहली मीटिंग…पहली कॉलेज यात्रा…पहला क्लब…पहली दोस्ती…पहला नाइटआउट…पहली उपलब्धि...पहला मंच…ये सब अचानक सामने किसी फिल्म की तरह चलने लगा। अभी कल ही तो मैं एक फ्रेशर बनकर इस कैंपस में आया था…और आज एक एलुमनाई बनकर बाहर निकल रहा हूँ।
कभी सोचा ही नहीं था कि 3 साल इतनी जल्दी बीत जाएंगे। और सच कहूँ तो साल 2020 में कोरोना महामारी के बाद ये पूरे 5 साल कैसे उड़ गए शायद किसी को पता ही नहीं चला। कॉलेज लाइफ के ये तीन साल का खूबसूरत सफर अब फिर कभी नहीं लौटेगा। मेरी अंडरग्रैजुएशन की तीन साल की यात्रा पूरी मस्ती से भरी हुई, हँसी-ठिठोली से भरी हुई, नई सीखों से भरी हुई, नई जिम्मेदारियों से भरी हुई…और हाँ पढ़ाई भी जमकर हुई।
खैर, कैंपस पहुंचने के बाद सबसे पहले प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन किया। फिर हम सभी ने साथ में नाश्ता किया। उसके बाद मैं, जिया और माही हम तीनों कैंपस में काफी देर तक घूमते रहे। हर एक जगह पर रुककर उन लम्हों को उन यादों को दोबारा महसूस कर रहे थे, जिन्हें हमने कभी जीया था। वो क्लासरूम...वो गलियारे…वो फोटो पॉइंट…वो हॉस्टल...वो मेस…वो ग्राउंड...सब जैसे आज हमारे इंतजार में खड़े थे। फिर मैं सभी दोस्तों से मिला मेरे एनएसएस के साथी, स्टूडेंट काउंसिल के लोग, मेरे जूनियर्स और वो सभी जिनके साथ मेरा बेनेट का सफर इतना खास बन पाया।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी और एक बड़ा मंच -
इस बार दीक्षांत समारोह में गोदरेज ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के मालिक नादिर बी. गोदरेज मुख्य अतिथि थे। साथ ही ओयो ग्रुप ऑफ होटल्स के संस्थापक रितेश अग्रवाल भी मौजूद थे। बेनेट यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन में इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह जैसी नामी हस्तियां आ चुकी है। स्टेज जगमगा रहा था। भाषण हो रहे थे। प्रेरक बातें कही जा रही थीं। कुछ चुनिंदा विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया, हर कोर्स के टॉपर बच्चे को।
फिर आया वो दर्द…जो शायद हमेशा रहेगा? -
इन सब खुशनुमा पलों के बीच मेरे दिल का एक कोना आज भी खाली है। क्योंकि मेरा कोर्स बीएजेएमसी हिंदी ऑनर्स जो हिंदी पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था। जिसकी फीस टाइम्स ग्रुप ने अंग्रेज़ी पत्रकारिता के मुकाबले तीन गुना कम रखी थी,जिस पर मुझे बड़ा गर्व था, वही कोर्स वर्ष 2023 में बंद करवा दिया गया। मैं इस कोर्स के आखिरी बैच का विद्यार्थी था। हम कुल 8 विद्यार्थी थे। जिसमें से किसी को भी गोल्ड मेडल नहीं मिला क्योंकि कोर्स को ही खत्म कर दिया गया। दर्द इस बात का है कि मैंने पहला दिन से ही ठान रखा था कि मुझे गोल्ड मेडल चाहिए इसके लिए तीन साल भरपूर मेहनत भी की। 25,500 रुपये की वार्षिक मेरिट स्कॉलरशिप हर साल बचाकर रखी। तीन साल की स्कॉलरशिप याने 76,500 रुपये। और हम 8 में से सबसे ज्यादा मार्क्स भी मेरे ही थे सीजीपीए 8.1 लेकिन बिना मेडल के यह कसक शायद हमेशा रहेगी। फिर भी दिल कहता है कि हिंदी पत्रकारिता को किसी गोल्ड मेडल से नहीं, बल्कि हम सभी आठ बच्चों के सफर से हमारी और हमारे हिंदी के शिक्षकों की मेहनत से, शब्दों से सम्मान मिलेगा।
वो पल आ ही गया जब मेरा नाम पुकारा गया -
दिनभर बीत गया शाम के 5 बज रहे थे। लाइन में खड़े सैकड़ों छात्र। सभी की पारिवारिक गर्व से चमकती हुई आंखें। स्टेज पर जगमगाते चेहरों के बीच मेरा नाम अनाउंस हुआ। मैं स्टेज पर पहुंचा। वाइस चांसलर डॉ. राज सिंह सर ने मुस्कुराकर मुझे डिग्री थमाई। फिर दोस्तों के साथ खूब सारी तस्वीरें खिंचवाईं। क्लासरूम से ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स लिए और फिर जल्द से होटल लौट आए।
वापसी की यात्रा
इस बार हमारे साथ माही भी इंदौर चल रही थी। ग्रेटर नोएडा से मथुरा की कैब बुक की। रात 8:30 तक हम मथुरा स्टेशन पहुँच चुके थे। ट्रेन सुबह 6:45 पर इंदौर पहुँचने वाली है। बाहर से मैं शांत था, पर भीतर बहुत कुछ चल रहा था। अलविदा बेनेट...अलविदा टाइम्स ग्रुप...अलविदा वो दुनिया जहां मैंने खुद को पहचाना। मैं ग्रैजुएट तो हो गया…लेकिन ऐसा लग रहा हूं कि जीवन का असली इम्तेहान तो अब शुरू होगा। अब तक जो था वह तो मेरा गोल्डन पीरियड था। अब ज़िन्दगी के असली संघर्ष, असली चुनौतियाँ सामने आएंगी। परन्तु जिस तरह अब तक हर परीक्षा में फर्स्ट क्लास पास हुआ हूँ उसी तरह आगे भी अपने प्रदर्शन को बेहतरीन बनाए रखने का प्रयास करता रहूंगा।
आभार उन सभी का जिन्होंने इस सफर में मेरा हाथ थामे रखा। मेरे परिवार का, मेरे दोस्तों का, मेरे मार्गदर्शकों का, मेरे शिक्षकों का, मेरी यूनिवर्सिटी का, मेरे सभी शुभचिंतकों का…आप सभी का दिल से धन्यवाद। आप सबकी वजह से यह सफर इतना खूबसूरत बना। आप सभी का समर्थन ही मेरी आगे की यात्रा में एक बड़ी ताकत रहेगा। धन्यवाद।
~ नैवेद्य पुरोहित
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बहुत बधाई ग्रेजुएट होने की नैवेद्य,
ReplyDeleteतुम हिंदी पत्रकारिता का नाम हिंदुस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में रोशन करोगे ऐसा मेरा और मेरे अलावा कई सारे लोगों का मानना है, कर्म पथ पर आगे बढ़ते चलो, रास्ता खुद मिल जाएगा और मंज़िल भी।
बहुत बहुत धन्यवाद, आपका आशीर्वाद और स्नेह सदा यूंही बना रहें 🙌🏼❤️
Deleteढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं आने वाले भविष्य के लिए।
ReplyDeleteखूब पढ़ो....अच्छा लिखो।
बहुत आशीर्वाद।
बहुत बहुत धन्यवाद आपका आशीर्वाद और स्नेह सदा यूंही बना रहें मैम 🥰🙌🏼
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