अध्यक्ष की आसंदी पर मास्टरक्लास: नरेन्द्र सिंह तोमर ने साझा किए अपने अनुभव
(नैवेद्य पुरोहित)
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में 'अध्यक्ष की आसंदी' विषय पर आधारित एक विशेष मास्टरक्लास का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर को पुस्तक भेंट कर की गई।
स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने दिया। उन्होंने कहा कि, “यह मास्टरक्लास का उद्देश्य विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञों से संवाद का मंच तैयार करना है। अध्यक्ष की आसंदी याने जिनका आसन ऊंचा है उनकी जिम्मेदारी भी ऊंची है।" उन्होंने सफलता के दो रूप बताए एक अस्थाई और दूसरी स्थाई। “स्थाई सफलता के पीछे अनेक कारक होते हैं, जो व्यक्ति के चरित्र और कर्म से निर्मित होती है।” अपने राजनीतिक कवरेज के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि, “मैंने देखा है कि जब तोमर साहब प्रदेश अध्यक्ष थे तब प्रदेश भर से कार्यकर्ता भोपाल आते थे और अक्सर शिकायतों से भरे हुए, लेकिन तोमर साहब का फीडबैक हमेशा सकारात्मक रहा है वे सबको सुनते हैं। जितने भरे हुए लोग आते थे, उतने ही खाली होकर लौटते थे।”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और मास्टरक्लास के प्रोफेसर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने अपने व्याख्यान में लोकतंत्र, विद्यार्थी जीवन और जिम्मेदारी के मूल्यों पर गहन विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “जब से विजय मनोहर तिवारी जी का आगमन इस विश्वविद्यालय में हुआ है, तब से उनकी समर्पण भावना स्पष्ट रूप से दिखती है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में विद्यार्थी जीवन से बड़ा और सुनहरा काल कोई नहीं होता, चाहे आगे कितनी भी सफलता क्यों न मिले।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की दुहाई देना आसान है, परंतु उसके पीछे जो त्याग और बलिदान हैं, उसे समझना आवश्यक है। “हम आज जो स्वतंत्र रूप से सांस ले रहे हैं, वह आज़ादी हमें तश्तरी में नहीं मिली यह हमारे पूर्वजों के असंख्य बलिदानों का परिणाम है। इसलिए हर नागरिक को अपना कर्तव्य निष्ठा से निभाना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र चार स्तंभों पर टिका है कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता। पत्रकारिता की भूमिका पर जोर देते हुए वे कहते है कि, “आज के समय में सनसनीखेज खबरों को अधिक महत्व दिया जा रहा है, जबकि पत्रकारिता का दायित्व समाज को सजग बनाना है।” उन्होंने बताया कि जब सरकार कोई कानून बनाती है, तो उसके पीछे एक मंशा और दृष्टिकोण होता है। मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि कुंजीलाल दुबे पहले विधानसभा अध्यक्ष थे, जिन्होंने प्रश्नकाल जैसी महत्वपूर्ण परंपरा की शुरुआत की।
तोमर ने बताया कि वर्तमान विधानसभा में सप्ताह में एक दिन केवल महिला विधायकों के लिए प्रश्नकाल रखा गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की लाइब्रेरी अत्यंत समृद्ध है और अब उसकी सामग्री को डिजिटाइज कर ई-विधानसभा की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यह पेपरलेस बने।
तोमर ने कहा, “अध्ययन की कमी ने राजनीति को विकृत किया है। जिस क्षेत्र में आप काम करें, उससे जुड़े लोगों से संवाद संपर्क बनाए रखना बहुत आवश्यक है। अध्यक्ष का पद सख्ती का नहीं, बल्कि मर्यादा और संतुलन का प्रतीक है।”
उन्होंने अपने उद्बोधन का समापन करते हुए कहा, “हर कदम, हर शब्द हमारे बलिदानियों का सम्मान करे और लोकतंत्र को अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रयास करें। जिस भावना से हम कार्य करेंगे, उसी भावना से समाज हमारी स्वीकार्यता करेगा।”
कार्यक्रम का संचालन प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी ने कुशलतापूर्वक किया और अंत में कुलसचिव पी. शशिकला ने आभार प्रदर्शन किया।
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