माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में “एआई और डीपफेक” पर मास्टरक्लास और प्रायोगिक वर्कशॉप

(नैवेद्य पुरोहित) माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में सोमवार 29 सितम्बर को प्रातः 11 बजे से आयोजित हुई “एआई एंड डीपफेक” विषयक मास्टरक्लास और वर्कशॉप पत्रकारिता में तकनीक के संगम का एक सशक्त उदाहरण थी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रत्युष रंजन (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, चीफ़ एडिटर - डिजिटल सर्विसेज़, एआई इंटिग्रेशन एवं फ़ैक्ट-चेकिंग) थे। कार्यक्रम में व्याख्यान के बाद स्नातकोत्तर और स्नातक के छात्रों के लिए दो अलग-अलग प्रायोगिक सत्र रखे गए, जो समांतर रूप से चले। जिसमें पीटीआई के चीफ़ सब-एडिटर गौरव ललित और आशीषा सिंह राजपूत ने अपनी बात रखी। यह अपनी तरह का पहला ऐसा आयोजन था जिसमें विशेषज्ञों ने न केवल एआई और डीपफेक से जुड़ी थ्योरी बतायीं बल्कि उन्हें पहचानने, सत्यापित करने और पर्दाफाश करने के प्रायोगिक प्रशिक्षण भी विद्यार्थियों को बताएं।
स्वागत उद्बोधन - कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने दिया। उन्होंने कहा कि आज कंटेंट की चौतरफा बाढ़ है उसमें यह जानना कठिन है कि क्या सही है और क्या गलत। उन्होंने न्यूज़रूम और क्लासरूम के फर्क पर ज़ोर दिया। क्लासरूम की टीचिंग और न्यूज़रूम की मारधाड़ बहुत ही अलग है। दोनों में तारतम्य नहीं है। न्यूज़रूम की दुनिया हर दिन बदल रही है वहां आप काम कर रहे है तो सातों इंद्रियां जागृत रखना होगी। न्यूज़रूम से जुड़कर इंडस्ट्री नेटवर्किंग बनाना बेहद जरूरी है। कुलगुरू ने अपनी इच्छा व्यक्त की और कहा कि अगले 3 सालों में ये नेटवर्किंग ऐसी चाहता हूं कि आप कही भी जाए वहां से मैं आपके लिए क्या कुछ मदद कर सकता हूं क्या हम एक-दूसरे का ऐसा सहारा बन सकते है? केवल डिग्री देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं करना है। ये संपर्क हमारे काम आना चाहिए।
मास्टरक्लास - पीटीआई नई दिल्ली के प्रत्यूष रंजन ने मुख्य व्याख्यान में नई पीढ़ी के पत्रकारों को एआई की रफ्तार और उसके साथ जुड़ी चुनौतियों व अवसरों पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने आते ही कहा, “The world outside the campus is very brutal” कैम्पस के बाहर ये दुनिया बहुत क्रूर है इसलिए अपनी तैयारी पहले से रखें। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य वेरिफाइड इन्फॉर्मेशन के जरिए लोगों को जागरूक करना है। पिछले 15 वर्षों में हालात बहुत तेज़ी से बदले है पहले सोशल मीडिया से डील करते थे अब एआई से कर रहे हैं। उनका कहना था, “AI is not a problem it's a survival!” एआई को समस्या मानने की बजाय इसे अपना पर्सनल अस्सिटेंट मानो। एआई से उनका परिचय साल 2020 में हुआ था। उन्होंने बताया कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2020 में जो उन्होंने सीखा था वह अब पुराना हो चुका है 6 महीने जो सीखा वो भी पुराना हो गया है इसलिए निरंतर सीखते रहना अनिवार्य है। सोशल मीडिया पर जो कुछ दिखता है वह "न्यूज़" नहीं, "इन्फॉर्मेशन" है! क्योंकि न्यूज़ में 5W1H और वेरिफिकेशन बहुत ज़रूरी है। फैक्ट चेकिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है अपितु पत्रकारिता के पुराने स्कूल में वापस जाने जैसा है जहां स्रोत जांचो, संदर्भ जाँचो। जितना हो सके पूर्वाग्रह से बचें, क्रिटिकल थिंकिंग अपनाएं। डिजिटल साक्षरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। एआई टूल्स का उपयोग करना आना चाहिए। उन्होंने बताया गूगल लेंस और इनविड जैसी चीज़ें फैक्टचेक के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। तीन बड़े टूल्स गूगल एआई स्टूडियो, नोटबुक एलएम, पिनपॉइंट को उन्होंने प्रमुख बताया।
उन्होंने एआई के स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक उपयोग के भी उदाहरण दिए निरामाई हेल्थ एनालिटिक्स नाम से बंगलौर में एक कंपनी है जिसने एआई का उपयोग ब्रेस्ट कैंसर का शीघ्र पता लगाने में किया और इसका सफलतापूर्वक अर्ली डिटेक्शन हुआ है। ऐसा ही सागू भागू प्रोजेक्ट का ज़िक्र किया जिसने तेलंगाना में किसानों के लिए मिर्ची की पैदावार/उपज में 21% सुधार में मदद की। यह भी एआई की मदद से हुआ। चुनौतियों के साथ-साथ एआई का लाभ भी वास्तविक और बड़ा है अतः पत्रकारों को इसे समझकर जिम्मेदारी से अपनाना चाहिए। प्रत्यूष रंजन ने कई सारे उदाहरण दिए जैसे कि टॉम क्रूस का साल 2020 में डीपफेक वीडियो दिखाकर बताया कि कैसे एक व्यक्ति बैठे-बैठे अपने कमरे से ही हॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार का डीपफेक बना सकता है। साथ ही मिस इन्फॉर्मेशन के नमूने बताए जैसे अलास्का में हवाई जहाज को जैकेट पहनाने वाली तस्वीर, बिहार में वंदे भारत सिटी बस वाली फोटो, पीटीआई के सीईओ विजय जोशी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इंटरव्यू की एक डीपफेक वाली क्लिप ताकि विद्यार्थी समझें कि सच और झूठ के बीच फर्क कितनी सूक्ष्म हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने यह कही, "AI can tell you how to write but a human can tell you what to write"। इस बात की पुष्टि करने के लिए समझाया कि एक दफ़ा उन्होंने एआई को कहा मान लो तुम मनुष्य हो अपनी दो तस्वीरें बनाओ दोनों फोटो उसने पुरुष के बनाए। वहां जो डेटा है वो बायस है। पुरुषों के चित्र बनाने के बाद उन्होंने एआई से सवाल किया कि महिला की तस्वीर क्यों नहीं। कुछ सवाल जवाब हुए और आखिर में एआई ने सॉरी बोला कि गलती हो गई। आपका ये ह्यूमन इंटेलीजेंस हमेशा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को पीछे छोड़ देगा।
प्रायोगिक वर्कशॉप पीटीआई फ़ैक्ट-चेकिंग टीम पीटीआई फैक्ट-चेकिंग टीम के सदस्य चीफ़ सब-एडिटर गौरव ललित और आशीषा सिंह राजपूत ने डीपफेक और फेकन्यूज़ का पर्दाफाश करने के प्रायोगिक सत्र चलाए। गौरव ललित ने स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए नवीन मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग के स्वामी विवेकानंद सभागार में प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने फैक्टचेकिंग के कई टूल्स और विधियों पर डेमो दिया जैसे घोस्टआर्काइव, आर्काइव.टुडे, वेबैक मशीन। उन्होंने हाइव मॉडरेशन टूल, रिसेंबल डिटेक्ट, इलैवन लैब्स, साइट इंजिन, अनडिटेक्टेबल.एआई, विजेट.एआई जैसे उभरते उपकरणों का उल्लेख किया। यह स्पष्ट हुआ कि गूगल लेंस, इनविड और अन्य प्लेटफ़ॉर्म्स का सही तरीके से इस्तेमाल कर के कई स्तरों पर सत्यापन किया जा सकता है जिससे स्रोत, समय, स्थान और मूल रिकॉर्ड की जांच आसानी से मिल सकती है।
निष्कर्ष - आज की “एआई एंड डीपफेक” पर मास्टरक्लास और वर्कशॉप एक स्पष्ट संकेत देती है कि पत्रकारिता अब केवल शब्दों का खेल नहीं रही यह तकनीक के साथ एक समेकित पेशा बन चुकी है। लगातार सीखते रहना पड़ेगा क्योंकि आज का ज्ञान कल पुराना हो सकता है। सोशल मीडिया पर देखी गई जानकारी को सीधे समाचार नहीं मानना चाहिए 5W1H और सत्यापन ज़रूरी है। एआई को अपने सहायक के रूप में अपनाइए। नेटवर्किंग, इंडस्ट्री से जुड़ाव और व्यावहारिक अनुभव क्लासरूम की शिक्षा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय के सभी विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल के साथ-साथ नैतिक और व्यावसायिक समझ भी दी ताकि वे भविष्य के मीडिया परिदृश्य में सक्षम, सजग और जिम्मेदार पत्रकार बनकर उभरें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवित्र श्रीवास्तव और आभार कुलसचिव पी. शशिकला ने माना। #प्रेस_ट्रस्ट_ऑफ_इंडिया #पीटीआई #प्रत्युष_रंजन #गौरव_ललित_आशीषा_सिंह_राजपूत #मास्टरक्लास #वर्कशॉप #एआई_और_डीपफेक #पत्रकारिता #माखनलाल_चतुर्वेदी_राष्ट्रीय_पत्रकारिता_एवं_संचार_विश्वविद्यालय #भोपाल

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  1. ऐसे ही गुणी जनों के सानिध्य में शिक्षा लेकर अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ो

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