भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अनावरण
क्या भारतीय कालगणना के अनुसार समय मापन आज भी संभव है?
(नैवेद्य पुरोहित)
सोमवार 01 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना जब डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अनावरण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालयों और विभिन्न संस्थानों के छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे। वैदिक घड़ी के साथ एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया, जो भारतीय कालगणना की परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास है।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी क्या है? -
यह भारत की प्राचीन समय प्रणाली पर आधारित है इसमें एक दिन (सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक) में 30 मुहूर्त होते हैं। दो सूर्योदय के बीच 30 मुहूर्त (घंटे), 30 काल (मिनट) और 30 काष्ठा (सेकंड) होती है। यह घड़ी किसी भी स्थान के अक्षांश, देशांतर और स्थानीय सूर्योदय के आधार पर वैदिक समय की सटीक गणना करती है। यह घड़ी विक्रम संवत जैसे स्वदेशी कैलेंडर को पुनः चर्चा में लाने का प्रयास है। घड़ी की गणना सूर्य की स्थिति पर आधारित है। मोबाइल ऐप इसके डेटा को डिजिटल स्वरूप में प्रस्तुत करता है।
क्या आज सब कुछ वैदिक घड़ी से संभव है?
वैश्विक स्तर पर ‘ग्रीनविच मीन टाइम (GMT)’ और ‘भारतीय मानक समय (IST)’ का उपयोग हो रहा है। ऐसे में वैदिक घड़ी को मुख्यधारा में लागू करना तकनीकी और सामाजिक दृष्टि से बहुत कठिन है। सरकारी दफ़्तर, रेल, विमानन, व्यापार और डिजिटल नेटवर्क पूरी तरह IST पर निर्भर हैं। ऐसे में वैदिक घड़ी को पूर्ण रूप से अपनाना अभी संभव नहीं दिखता। यह सिर्फ शिक्षा, शोध, और सांस्कृतिक आयोजनों में भारतीय समय गणना को समझाने का माध्यम बन सकती है।
निश्चित तौर पर यह भारतीय पहचान से जोड़े रखने वाली एक पहल है, पर सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ प्रतीकात्मकता बन कर रह जाएगी? यह वैदिक परंपरा को पुनः जीवित करने का प्रयास है। यद्यपि वर्तमान व्यवस्था में इसे पूरी तरह लागू करना कठिन है, लेकिन यह कदम युवाओं और शोधकर्ताओं को हमारी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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