बेनेट यूनिवर्सिटी में मेरी तीन साल की अनमोल यात्रा!

आज मैं अपने अंतर्मन की गहराइयों से एक ऐसी कहानी आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ, जो तीन वर्षों के अनुभवों, संघर्षों, सफलताओं और अनगिनत यादों का सम्मोहन है। यह कहानी मेरी केवल एक विद्यार्थी के रूप में ना होकर की बल्कि एक व्यक्ति की है, जिसने खुद को दोबारा खोजा, सीखा, खोया- तथा पाया, और अंततः उस स्थान पर पहुँचा जहाँ से उसकी अगली उड़ान शुरू होगी।
यादें जिन्हें देखकर लगता हैं जैसे कल की ही बात हो! आज दिनांक 28 मई 2025 को देश के सबसे बड़े और पुराने मीडिया हाउस द टाइम्स ग्रुप की बेनेट यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा में मेरा अंतिम दिन था। आँखें बंद करूँ तो साफ दिखता है पापा के साथ वो पहली बार, जब हम एडमिशन के लिए कैंपस विजिट पर आए थे। आलीशान हरा-भरा सर्वसुविधा युक्त कैंपस, ऊंची-ऊंची बिल्डिंग्स, नए-नए लोग….सब कुछ एक नए सफ़र की शुरुआत लग रहा था। अभी तो मेरा एडमिशन हुआ था, अभी तो फ्रेशर्स पार्टी हुई थी, एनुअल फेस्ट की सब चमक-धमक, सेलिब्रिटीज के म्यूजिक कॉन्सर्ट और मेरी आशा भरी आँखों से सबको देखना ये सबकुछ आज भी कल की ही तरह लगता है। तब मैंने सोचा भी नहीं था कि आने वाले तीन साल न जाने कितनी ऊँचाइयाँ, कितने उतार-चढ़ाव और कितनी मधुर यादें दे कर जाएंगे।
पहले दिन से मैं एनएसएस से जुड़ गया था चूंकि उसी समय पहली बार बेनेट यूनिवर्सिटी में एनएसएस शुरू हुआ था। मेरे लिए बड़े गर्व की बात है कि मैं उन कुछ लोगों में था जिन्होंने बेनेट यूनिवर्सिटी में एनएसएस यूनिट की नींव रखी। संस्थापक सदस्य में होने का अनुभव केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी थी। तीन महीने ही बीते थे, जब मुझे सदस्य से प्रमोट कर सबहेड कंटेंट की जिम्मेदारी दे दी गई। कंटेंट के ज़रिए मैं हमारे हर इवेंट की रिपोर्ट्स, न्यूज़लेटर, ईमेल्स और भी डॉक्यूमेंटेशन से जुड़ा काम करता था। हर जज़्बे को शब्दों में पिरोने का अवसर मिला। उस समय विकसित हुई मेरी लेखन कला और संगठनात्मक कौशल आज भी मेरे साथ हैं। पहला साल काफी अच्छा रहा सीजीपीए 8.6 रहा, कई सारे ज़रूरी कौशल विकसित हुए और पढ़ाई भी अच्छे से चली। फर्स्ट ईयर के समर ब्रेक 2023 में खबर आई कि हमारे टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया के डीन प्रोफेसर सुनील सक्सेना सर रिटायर हो गए है। प्रोफेसर सक्सेना एक बहुत अच्छी अनुभवी शख्सियत है उनके स्नेह और मार्गदर्शन का प्रभाव मुझ पर हमेशा कायम रहेगा। उसी बीच यूनिवर्सिटी की सबसे विशेषाधिकार प्राप्त और प्रतिष्ठित बॉडी "स्टूडेंट काउंसिल" के इंटरव्यू के लिए मेरा शॉर्टलिस्ट होना और कई दौर के इंटरव्यू राउंड्स पार करने के बाद 10,000 से ज्यादा बच्चों का नेतृत्व करने के लिए मेरे साथ 40 और लोगों को चुना गया। ये मेरे लिए एक नया अध्याय था।
सबसे बड़ी चुनौती का सामना: मेरे कोर्स BAJMC HINDI - Hons. का अचानक बंद हो जाना ! सफलता के इसी क्रम में अचानक निराशा की लहर भी आयी थी। जब नया शैक्षणिक सत्र 2023-24 शुरू हुआ तब टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया डिपार्टमेंट के नए डीन सर डॉ. संजीव रत्ना सिंह आए, यंग डायनेमिक पर्सनेलिटी है उनकी। मेरे कोर्स बीएजेएमसी हिंदी ऑनर्स को बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के बंद कर दिया गया। यहां तक कि रोज़ाना हम हिंदी वाले छात्रों की कक्षाएँ अंग्रेज़ी वालों के साथ मर्ज होने लगीं। हिंदी पृष्ठभूमि के मेरे साथी जो बिहार, झारखंड, यूपी के इलाकों से ग्रेटर नोएडा आए थे उन्हें बहुत असहज महसूस होने लगा था। मुझे अपने स्ट्रॉन्ग इंग्लिश मीडियम की स्कूली पृष्ठभूमि (न्यू दिगंबर पब्लिक स्कूल - एनडीपीएस, इंदौर) की वजह से ज़्यादा कठिनाई नहीं हुई, पर मेरे अलावा बाकी और 7 साथी थे जिन्होंने हिंदी भाषा में पत्रकारिता की उच्च शिक्षा की चाहत लिए यहाँ प्रवेश लिया था। मैं जानता हूँ उनके अंदर कैसी मायूसी थी, उन्होंने मन ही मन बहुत पीड़ा भी सहन की। मुझे भी बहुत बेकार लग रहा था खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था क्योंकि जिस कोर्स को देखकर मैंने एडमिशन लिया था उसे बिना किसी कारण के अचानक बंद कर दिया गया। हमें यह भी बोला गया कि, "अकेले हिंदी के बल पर तुम कभी आगे बढ़ नहीं पाओगे, इंग्लिश जरूरी है, उसके बिना तुम ग्रो नहीं कर सकते आदि आदि।" मेरे पैरेंट्स स्वयं इंदौर से इस बारे में बात करने यूनिवर्सिटी आए और डीन सर के सामने अपनी बात रखी। उस बातचीत के बाद मैंने खुद जानने की ठानी कि आखिर क्यों मेरे कोर्स हिंदी पत्रकारिता ऑनर्स को यकायक बंद किया गया। जबकि आज भी भारत जैसे देश में हिंदी भाषा के अख़बार, हिंदी भाषा में टीवी चैनल्स और हिंदी भाषा के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स रोज़ फलफूल रहे है। मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि प्रमुख कारण तो फीस का मुद्दा था। जिस साल मेरा एडमिशन हुआ उस साल बेनेट यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निर्णय लिया था कि हिंदी पत्रकारिता के कोर्स को आगे बढ़ाने के लिए अंग्रेजी पत्रकारिता के मुकाबले चार गुना फीस कम कर दी गई थी! अंग्रेज़ी पत्रकारिता के कोर्स की फीस ₹3,25,000 थी, जबकि हिंदी की मात्र ₹85,000! उस पर मेरी 30% स्कॉलरशिप भी थी जो भगवान की कृपा और थोड़ी मेरी मेहनत की वजह से तीनों साल बच गई। जिससे मेरी सालाना ट्यूशन फीस ₹59,500 ही लगी। मेरे बाकी बैचमेट्स अपनी स्कॉलरशिप नहीं बचा पाए थे पर फिर भी इंग्लिश के मुकाबले वह लोग भी चार गुना कम पैसा दे रहे थे और संसाधन पूरे वही सब इस्तेमाल कर रहे थे जो इंग्लिश वाले कर रहे थे। हमने वही सब सुविधाएँ उठाई—एप्पल के मैक लैब्स, टीवी स्टूडियो, रेडियो स्टूडियो और सभी जरूरी संसाधान वो भी चार गुना कम दाम देकर! दूसरा कारण हिंदी पत्रकारिता के लिए अलग से सभी विषयों की फैकल्टी भी रखना। इंग्लिश वाले जहां 40 से 60 बच्चों की क्लास में पढ़ते थे हम आठ बच्चे हिंदी के अलग क्लास में पढ़ते थे। हमारी सभी फैकल्टी अलग थी तो फैकल्टी की सैलरी भी एक कारण रही होगी। गौरतलब है कि इसी दौरान टाइम्स ग्रुप के मालिक दोनों भाई समीर जैन और विनीत जैन के बीच पूर्णतः बंटवारा भी हुआ था। जिसमें बेनेट यूनिवर्सिटी की देखरेख शुरुआत से विनीत जैन के हाथ में थी। अमूमन मैनेजमेंट को यहां हिंदी पत्रकारिता वाले मेरे कोर्स को आगे चलाने में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था अंततः उन्हें निर्णय लेना पड़ा। इसी वजह से मैं बीएजेएमसी हिंदी ऑनर्स का चौथा और आख़िरी बैच बन गया, अब यह कोर्स स्थायी रूप से बंद हो चुका है। खैर, पिछले सत्र से तो अब बीएजेएमसी में से जर्नलिज्म का "जे" भी हटा चुके हैं और डिग्री का नाम बीएएमसी हो चुका है। अपने जीवन के 3 साल के पूरे आनंद से भरपूर यादगार कॉलेज लाइफ में एकमात्र कड़वा अनुभव मेरा यही था।
उस साल 2024, मेरे सेकंड ईयर में मैंने ठान रखी थी कि हर जगह मुझे एक्सप्लोर करना है स्टूडेंट काउंसिल के साथ मेरा नाम "एंटी रैगिंग कमेटी" के लिए भी रिकमेंड हुआ था और 10,000 से ज्यादा बच्चों में स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव मेंबर के तौर पर इस गोपनीय कमेटी का सदस्य मैं बन गया था। स्टूडेंट काउंसिल के सभी इवेंट्स की रिपोर्ट, ईमेल्स, न्यूजलेटर और सभी चीजों का कंटेंट देने के साथ ही उस समय नैक के लिए भी हमने रिपोर्ट्स बनाई थी क्योंकि तब बेनेट यूनिवर्सिटी को नैक ग्रेड नहीं मिली थी। काउंसिल में मिली कई जिम्मेदारियों ने मेरे अंदर नेतृत्व करने की भूख को और बढ़ाया। इन सभी चीज़ों के साथ एनएसएस में भी मेरा प्रमोशन हुआ और मैं वर्ष 2023-24 के लिए वाइस प्रेसिडेंट - कंटेंट बना दिया गया। उसी सत्र के आखिर में अप्रैल 2024 में एनएसएस के बैनर तले बेनेट यूनिवर्सिटी में हमने पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग की वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ कीं और खुद ने भी पहली बार व्यक्तिगत रूप से ‘सुदर्शन क्रिया’ का अनुभव लिया। पूरा साल अच्छे से निकला सीजीपीए भी 8.1 रहा और आखिरी साल के लिए भी स्कॉलरशिप बच गई अब स्कॉलरशिप से संबंधित किसी प्रकार का कोई लोड नहीं था। स्टूडेंट काउंसिल से फेयरवेल मिला फेलिसिटेशन हुआ उस समय की हमारी एसडब्ल्यूओ अनुपमा चुघ मैडम ने मेरी ट्रॉफी पर "समझदार" का टाइटल लिखवाया। चुनौतियों से भरे उस सत्र में भी हर एक उपलब्धि ने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाया।
सेकंड ईयर खत्म होने के बाद समर वैकेशन 2024 में मैं और मेरी दोस्त जिया जैन ने इंटर्नशिप के लिए इच्छुक छात्रों के तौर पर नामांकन दिया था। हमें उस समय इंटर्नशिप करने के लिए बाध्यता नहीं थी क्योंकि 100 मार्क्स की अनिवार्य इंटर्नशिप आखिरी सेमेस्टर में होती है। उसके बावजूद भी मैंने और जिया ने अपना नाम लिखवा दिया था फिर इंटरव्यू हुआ और उसी दिन हमें पता चल गया कि हमारा सिलेक्शन टाइम्स नेटवर्क के न्यूज़ लाइब्रेरी डिपार्टमेंट में न्यूज़ लाइब्रेरी इंटर्न के तौर पर हुआ है। यही दो महीने की इंटर्नशिप वह मोड़ था जहाँ मैं एक बड़े मीडिया हाउस की सच्चाई से रूबरू हुआ। अपने डिपार्टमेंट के अलावा न्यूजरूम में भी कनेक्शन्स बनाए, मेटाटैगिंग, वीडियो एडिटिंग, आर्काइविंग के साथ डेटा मैनेजमेंट सीखा। इंटर्नशिप खत्म होने के बाद जब नया सेशन शुरू हुआ तब मैंने स्टूडेंट काउंसिल छोड़ दी थी क्योंकि मैं आखिरी साल थोड़ा ज्यादा एंजॉय करना चाहता था और जितना एक्सप्लोर करना था लगभग सभी कर चुका था। लेकिन एनएसएस मैंने नहीं छोड़ा था क्योंकि यह एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। बचपन से ही समाज के प्रति संवेदनशीलता और कुछ कर गुजरने का एक जज़्बा रहा है। अपने तीसरे साल मुझे सीनियर मोस्ट वाइस प्रेसिडेंट पीआर एंड फाइनेंस का पद मिला।
सेशन शुरू ही हुआ था और मुझे 10 दिन के इंडोनेशिया इमर्शन प्रोग्राम के लिए चयनित किया गया। 12 देशों के 125 प्रतिभागियों के बीच मेरा ग्रुप ‘द बेस्ट ग्रुप’ के अवॉर्ड से सम्मानित हुआ। इंडोनेशिया की संस्कृति, स्नार्कलिंग, समुद्री कछुओं की रक्षा, मैंग्रोव्स प्लांटेशन और भी कई सारे अनुभव अविस्मरणीय है। इस ग्लोबल नेटवर्किंग ने मेरे दृष्टिकोण को वृहद किया। इंडोनेशिया से आने के बाद पढ़ाई के साथ एनएसएस के सभी कामकाज चलते रहे और आर्ट ऑफ़ लिविंग की दूसरी बार दोगुनी सफलता दर के साथ हमने वर्कशॉप आयोजित की। दिसंबर 2024 में एनएसएस से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के पुलगा गांव में हमारा 7 दिवसीय एनएसएस स्पेशल कैंप हुआ। यह कैंप एक अलग ही लेवल का अनुभव था 8000 फीट ऊपर माइनस 20 डिग्री में भारी बर्फबारी के बीच हम लोग सेवा करने गए थे। बहुत अलग ही फीलिंग थी वो वाकई हमेशा के लिए एक यादगार चीज।
अब आखरी सेमेस्टर में सभी बच्चे इंटर्नशिप ढूंढ रहे थे यूनिवर्सिटी का प्लेसमेंट बोर्ड भी अपना काम कर रहा था। मेरे भी सभी दोस्तों की इंटर्नशिप लग रही थी किसी की मुंबई, किसी की गुड़गांव तो कोई अपने पापा की कंपनी में कर रहा था। मेरी इंटर्नशिप का कुछ अता-पता नहीं चल पा रहा था। सैकड़ो से भी ज्यादा आवेदन लगभग सभी जगह दिए थे लेकिन कहीं से कोई रिस्पांस नहीं आया। मेरी जिद्द थी कि बिना किसी गॉडफादर के मुझे इंटर्नशिप चाहिए और वापस टाइम्स नेटवर्क में न्यूज़ लाइब्रेरी डिपार्टमेंट में भी नहीं जाना था। आखिरी 8 दिन बचे थे सभी जगह फॉर्म्स भरने और कई दौर के इंटरव्यू राउंड्स के बाद मेरे पास एक कंफर्मेशन मेल आया कि मुझे पॉलिसी, रिसर्च, आउटरीच और मीडिया इंटर्न के तौर पर दिल्ली विधानसभा के माननीय विधायक गोपाल राय के कार्यालय में चयनित किया जाता है। मैंने फटाफट कंफर्मेशन मेल प्लेसमेंट बोर्ड को भेजा और फिर 01 मार्च 2025 से लेकर 31 अगस्त 2025 तक मेरी 6 महीने की हाइब्रिड/ वर्क फ्रॉम होम इंटर्नशिप चल रही है। आगे की राह अब मास्टर्स के लिए मीडिया की फील्ड में देश में सर्वोच्च संस्थान आईआईएमसी- नई दिल्ली के लिए एग्जाम दी थी उसका भी रिजल्ट आ गया। अभी काउंसलिंग फॉर्म भर दिया है देखते हैं किस राउंड में सिलेक्ट हो पाते हैं। आरक्षण की वजह से यदि सिलेक्ट ना भी हो पाए क्योंकि जनरल केटेगरी होने का नुकसान सभी भली-भांति जानते हैं! इस वजह से प्लान बी तैयार है माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल में एमए इन डिजिटल जर्नलिज्म का भी फॉर्म भर चुका हूं। तीन साल पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगा, वास्तव में मैंने बहुत कुछ सीखा, समझा और पाया है! इस बहुत कुछ पाने के पीछे का त्याग मेरे घरवालों ने किया। उन्होंने बहुत कुछ खोया तीन साल मेरी उपलब्धियों के पीछे परिवार ने जो त्‍याग किया चाहे वो किसी भी रूप में हो — वार-त्योहारों, शादी-ब्याव, जन्मदिन, सालगिरहों, पारिवारिक मिलनों और इन सब से हटकर भी देखें तो घर में मेरी अनुपस्थिति जो उन्होंने महसूस की होगी, मेरे होने के बाद भी घर से दूर मेरी कमी को जो सहा होगा यह सिर्फ मेरे घरवाले जानते है! मैंने भी दादाजी के साथ बैठकर घंटों बातें करना, दादी के हाथ का खाना, मम्मी के हाथ की डिशेस, पापा से सभी विषयों पर बात करना और नायशा के साथ खेलना यह सब मैंने भी खोया। लेकिन आज जहां मैं खड़ा हूं और जो चीज मेरे पास है तो कहीं से भी बेनेट यूनिवर्सिटी में आना मेरे लिए घाटे का सौदा तो नहीं रहा बल्कि बहुत ज्यादा मुनाफा प्रदान करने वाला रहा। ऊपर लिखी बातें जो मैंने खोई ईश्वर ने वह मुझे अनुकूल रूप से ब्याज सहित वापस दी! मेरे दोस्त जो मैंने कमाए...मेरे रिश्ते जो यहां मैंने अपने व्यवहार से स्थापित किए...घर से दूर होकर भी मेरे लिए घर ही है वह लोग! उनके साथ की गई हर वो बातें उनके साथ बिताए गए हर वो लम्हें मेरे हृदय, मन मस्तिष्क पर सदैव अमिट हस्ताक्षर की तरह अपनी छाप छोड़ गए है वो लोग...। आज बेनेट यूनिवर्सिटी के साथ यह सफर खत्म हो चुका है मेरा ग्रेजुएशन कंप्लीट अब सिर्फ कॉन्वोकेशन पर डिग्री लेने एक आखरी बार कॉलेज जाना होगा आज से चार-पांच महीने बाद जब हमारा दीक्षांत समारोह होगा तब।
दिल से शुक्रिया उन सभी लोगों को जिन्होंने मेरे चरित्र को गढ़ने में और मेरी पर्सनैल्टी को ज़रूरी स्किल्स के साथ विकसित करने में अपना बेमिसाल योगदान दिया। हर उस शख्स को मेरा कोटि-कोटि धन्यवाद। मेरा परिवार जिसने मेरी हर चाहत और मेहनत को असीम धैर्य और संयम के साथ सहा। मेरे सभी शिक्षकों, फैकल्टीज, ऑथोरिटीज जिन्होंने मेरी हर जिज्ञासा को शांत किया। मेरे सभी दोस्तों, एनएसएस की टीम, स्टूडेंट काउंसिल की टीम जिनके साथ बिताया गया हर पल अब यादों का हिस्सा हैं। यह अंत नहीं, सिर्फ़ एक नई शुरुआत है। जिस कॉलेज ने मुझे घर से दूर भी घर जैसा अनुभव दिया, वही अब मेरे लिए स्मृतियों का मंदिर बन गया है। मेरी कहानी, मेरे लेख, मेरे अनुभव इन सबने मुझे आत्मविश्वास, साहस और संयम सिखाया है। अब नए सफर की ओर कदम बढ़ेगा नए सपनों, नए उद्देश्यों और नए संकल्पों के साथ। यह यात्रा यहीं नहीं रुकने वाली जो खोया, जिसे पाया, उसे संजोया। अब आगे की राह समय ही गढ़ेगा, लेकिन यादें, सीख और आभार का भाव हमेशा साथ रहेगा। जीवन की दिशा अब किसी ओर ले जाएगी आगे की राह क्या रहती है यह सब समय बताएगा...! ~ नैवेद्य पुरोहित #द_टाइम्स_ग्रुप #बेनेट_यूनिवर्सिटी #ग्रेटर_नोएडा #फेयरवेल #आखिरी_दिन #सफलता #नया_अध्याय

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