एनएसएस फेलिसिटेशन सेरेमनी 2024-25: विदाई के आंसू और अनमोल यादें!
23 मई 2025 का दिन मेरे लिए बेहद ही भावुक करने वाला दिन था। एनएसएस ने मेरी पूरी कॉलेज लाइफ को प्रथम वर्ष से लेकर अंतिम वर्ष तक एक परिवार की तरह सँवारा है। उन सभी पलों को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है हर एक एक्टिविटी, हर एक अनुभव, हर एक मुस्कान और हर एक आंसू ने मेरे दिल में अमिट छाप छोड़ी है। हमारी "एनएसएस काउंसिल फेलिसिटेशन सेरेमनी 2024-25" एक अविस्मरणीय समारोह था क्योंकि बेनेट यूनिवर्सिटी एनएसएस यूनिट के इतिहास में कभी ऐसा कुछ नहीं हुआ, इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है कि मैं भी इस समारोह का हिस्सा रहा, साथ ही मेरे प्यारे साथी वंश गुप्ता भैया और नमन गर्ग भी क्योंकि हम तीनों ही इस वर्ष ग्रेजुएट हो रहे हैं…!
समारोह का आरंभ: स्वागत की गरमाहट
दिन की शुरुआत ही एक अलग एहसास से हुई थी—जब मैंने उस हॉल के दरवाज़े पार किए तो वहां ब्लेज़र में सभी को तैयार होकर आता देख फॉर्मल्स में सभी साथी बेहद खूबसूरत लग रहे थे। वहां मौजूद हर व्यक्ति का चेहरा गर्व और आशा से झिलमिला रहा था।
प्रमुख अतिथियों का अभिभाषण: प्रेरणा के दीप
समारोह में शामिल हुए हमारे सम्माननीय अतिथिगण वाइस चांसलर डॉ. राज सिंह सर, सीओओ सेंथिल कुमार सर, डीएसए सोनिका शर्मा मैम, अस्सिटेंट डीएसए देबोलीना मैम, एनएसएस प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ दीपाली अथैया मैम, डॉ दिनेश कुमार सर, डॉ सीमा श्रीवास्तव मैम, डॉ उमेश गुप्ता सर, डॉ अजय यादव सर, डॉ जियाउल मुस्तफा सर और डॉ मधुशी वर्मा मैम। इन सभी की उपस्थिति हमारे लिए प्रेरणा थी। हमारे सीओओ सेंथिल कुमार सर ने एक भावुक संदेश दिया। “अब से आप ‘ओल्ड एज होम’ नहीं कहें, बल्कि उन्हें ‘रिटायरमेंट कम्युनिटी’ कहने का प्रयास कीजिएगा।” उनका यह एक छोटा सा वाक्य था, मगर मेरा दिल उस समय गहरी भावना से छलक उठा। उनकी इस बात ने हमें जो संवेदना और सम्मान की भावना दी, वह अनमोल है।
हमारे वाइस चांसलर डॉ राज सिंह सर ने कहा, “परमानेंट लर्निंग्स हमेशा क्लासरूम की चार दीवार के बाहर से आती है।” कितनी सच्ची बात है! एनएसएस की हर गतिविधि चाहे वो अनाथालय जाना हो या वृद्धाश्रम, बायो गैस प्लांट विजिट हो या 20,000 फीट पर हिमालय में कैंप इन अनुभवों ने हमें किताबी पढ़ाई से आगे जीवन की सच्चाई सिखाई है! उन्होंने कहा, “समाज के प्रति संवेदनशीलता और अपनी जिम्मेदारी का एहसास दोनों बहुत ज़रूरी है।” यह वाक्य मेरे दिल में घर कर गया। सोसाइटी के लिए जो संवेदनशीलता हमने एनएसएस के ज़रिए सीखी है, वह आज मुझे एक बेहतर इंसान बनाती है।
एनएसएस काउंसिल 2024-25 का संक्षिप्त सफ़र
इस कार्यकाल में हमने जो भी किया, आंचल दीदी ने उसे इतनी खूबसूरती से प्रस्तुत किया कि मेरी आँखों के सामने एक-एक पल फिल्म की तरह फिर से बह चला था। चाहे वो ओल्ड एज होम विजिट्स में उन बुजुर्गों की मुस्कान में छुपे जीवन के पाठ हो या 20 हज़ार फीट पर हिमालय में बर्फबारी के बीच दोस्तों के संग हंसी-ठहाके, बायो गैस प्लांट के ज़रिए सतत विकास का परिचय और पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी हो या ब्लड डोनेशन ड्राइव में अपने खून से समाज को दी जाने वाली आशा की एक बूंद, जहां हम रह रहे है उस परिवेश को स्वच्छ देखने की चाह हो या गांव में जाकर बच्चों को पढ़ाना, पौधारोपण से हरे-भरे भविष्य का बीज रोपना हो या दूसरे कॉलेजों की प्रतियोगिता में भाग लेना हर एक गतिविधि में हम सीखे, आगे बढ़े, और संवेदनशील हुए।
विदाई की घड़ी: सबके दिल की जुबां!
समारोह की औपचारिकता के बाद जब एक ग्रुप फोटो खिंची, तो दिल में एक अजीब से खालीपन की अनुभूति हुई। मेरे कॉलेज लाइफ के एक प्यारे अध्याय का समापन हो गया। फोटोज के बाद हम सभी हाइ-टी के लिए गए जहां उस स्वादिष्ट खाने का स्वाद अभी भी ज़ुबां पर ताज़ा है।
और फिर वह लम्हा आया जब वंश भैया, नमन और मेरी सफेद शर्टों पर सभी ने अपनी यादें और संदेश छोड़ दिए। हर एक ने कलम उठाकर हमारे साथ बिताए गए उन पलों को शब्दों में लिखा। जब उस शर्ट को देखा, तो आँसू रोक नहीं पाया। उस “यादों के पिटारे” को लेकर हम चले जा रहे थे: कितनी मीठी और प्यारी यादें थीं उस शर्ट पर जो हमेशा के लिए दर्ज हो गई।
आँसुओं के बीच मुस्कान: मिलन और वियोग
शुरुआत में मैं रोना नहीं चाह रहा था, पर आँसू खुद ब खुद आ ही गए यही वो असली अहसास था जो मैंने ही नहीं बल्कि वहां हर व्यक्ति ने अनुभव किया। एनएसएस के साथ बिताए हर लम्हे ने हमें एक परिवार जैसा बना दिया है। देर रात तक चलने वाली मीटिंग हो या अलसुबह आउटडोर एक्टिविटी हर उलझन और थकान के बीच एक अलग सा रिफ्रेशमेंट मिलता था।
अंत में मैं यही कहूंगा कि मेरे एनएसएस परिवार, हमारे सभी प्रोफेसर्स और हर एक साथी जो इस सफर में मेरे साथ रहे आप सबने मेरी कॉलेज लाइफ को सर्वश्रेष्ठ बनाया है। आप सभी का साथ, आपकी सीख, आपकी ऊर्जा और आपका प्यार हमेशा मेरे साथ रहेगा। वर्णन से बाहर है वो संवेदनाएँ जो आज उभरीं, पर मैं इन्हें शब्दों में पिरोने का साहस कर रहा हूं।
धन्यवाद, आभार, और सभी को ढेर सारा प्यार!
~ नैवेद्य पुरोहित
#एनएसएस #बेनेट_यूनिवर्सिटी #फेयरवेल #फेलिसिटेशन #सेरेमनी #काउंसिल #परिवार








बहुत भावुक पल है बेटे, अपना ध्यान रखना। तुम्हारी भावनाएं महसूस कर रहा हूं।
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिखा है ब्लॉग, एक एक शब्द में,सच्चाई बयान हो रही हैं।