केसरी चैप्टर 2 – द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ जलियाँवाला बाग़

(नैवेद्य पुरोहित)
शुक्रवार, गुड फ्राइडे की छुट्टी के मौके पर, आज अपने दोस्तों हर्ष नायर, अभिनव श्रीवास्तव और बिशाल साहा के साथ अक्षय कुमार की हालिया फिल्म केसरी 2 का 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' देखा। किसी फिल्म का पहले दिन पहला शो देखने का जो रोमांच होता है, वो अलग ही होता है और जब दोस्तों के संग देशभक्ति वाली मूवी हो यह अनुभव एक जुनून में बदल जाता है।
इस फ़िल्म ने हम सभी के दिल को छू लिया, रूह तक हिला दी। एक भारतीय होने के नाते यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी है उस दर्द को समझने की जो 13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला बाग़ में हमारे पूर्वजों ने झेली थी। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है फिल्म दर्दनाक जलियाँवाला बाग़ नरसंहार की पृष्ठभूमि में बुनी गई है, लेकिन इसमें सिर्फ गोलीबारी नहीं दिखाई गई। इसमें वे अनसुने नायक भी सामने आते हैं जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। खासतौर पर शंकरन नायर जैसे योद्धा जिन्होंने पूरी दुनिया को जलियांवाला बाग़ नरसंहार की सच्चाई बताई। ब्रिटिश क्राउन के विरुद्ध सच्चाई के साथ अंत तक खड़े रहे और अपनी आवाज़ बुलंद की। फ़िल्म में दिखाया गया है कि कैसे ब्रिटिश हुकूमत ने आम भारतीयों की आवाज़ को कुचलने के लिए बर्बरता की सारी हदें पार कीं। जनरल डायर, जिसने उस वीभत्स कांड को अंजाम दिया अपने अंतिम दिनों में एक के बाद एक कई स्ट्रोक्स आए और 1927 को सेरेब्रल हेमरेज की वजह से मौत हो गई। हज़ारों निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाने वाला डायर अपने अंतिम दिनों में बेहद अकेला रह गया था।
अक्षय कुमार ने जिस जीवंतता से अपने किरदार को निभाया है, वह सराहनीय है। वह आक्रोश, धैर्य और नेतृत्व, उनकी बॉडी लैंग्वेज दर्शकों को बांधे रखती है। फिल्म का संगीत भावनात्मक है, लेकिन मुझे “ओ शेरा उठ जा ते फिर यूंही जलवा दिखा अपना, बड़ी बेताब है दुनिया” गाना सबसे ज़्यादा प्रभावशाली लगा। यह गीत आपको अंदर जोश भर देता है। बाकी गाने ठीक-ठाक हैं, लेकिन यह एक गीत फिल्म का आकर्षण है। निर्देशक ने जिस गंभीरता और शोध के साथ फिल्म को प्रस्तुत किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। जलियाँवाला बाग़ की उस एक शाम को पर्दे पर जीवंत करना आसान नहीं था लेकिन यह फिल्म भावनाओं, आँसुओं और सच्चाई से भरी एक जीवंत दस्तावेज़ है।
आज की पीढ़ी शंकरन नायर जैसे नायकों को लगभग भूल चुकी है। यह फिल्म हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि अंग्रेज़ों से आज़ादी मुफ्त में नहीं मिली थी और न ही इसे हल्के में लिया जाना चाहिए। उन सभी नायकों को कोटि कोटि नमन जो इतिहास के पन्नों में कहीं खो गए है। सबसे ज़रूरी बात ब्रिटिश क्राउन ने आज तक इस कांड के लिए माफ़ी नहीं मांगी है! यह एक जख्म है जो शायद कभी नहीं भरेगा। इस फिल्म को ज़रूर देखें और उन गुमनाम नायकों को याद करें जिन्हें इतिहास ने भुला दिया है। एक बार नहीं, बार-बार देखें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां सच जान सके। #जलियाँवाला_बाग़ #नरसंहार #जनरल_डायर #शंकरन_नायर #ब्रिटिश_क्राउन #गुमनाम_नायक

Comments

  1. फिल्म समीक्षा मूवी रिव्यू अच्छा लिखा है,
    माउथ पब्लिसिटी से, पॉजिटिव रिव्यूज से यह मूवी खूब चलेगी ऐसा लगता हैं।
    फर्स्ट डे फर्स्ट शो असली मूवी लवर की पहचान है, सभी लोगों ने अपने अपने समय में इस रोमांच को एंजॉय किया है।
    तुम्हारे द्वारा इतनी तारीफ बताई गई हैं तो हम सब मूवी देखने जरूर जाएंगे

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका, बिल्कुल यह मूवी देखिएगा और सभी बच्चों को भी देखना चाहिए।

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