एक पत्रकार, एक सेनानी: समाजसेवी ओमप्रकाश फरकिया के साथ यादगार मुलाकात!

आज 13 मार्च 2025 का दिन मेरे लिए बेहद खास रहा, क्योंकि मुझे वरिष्ठ पत्रकार एवं लोकतंत्र सेनानी श्री ओमप्रकाश फरकिया और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अयोध्याबाई फरकिया को एक सुंदर फोटोफ्रेम भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनकी 62वीं शादी की सालगिरह 5 मार्च को थी, लेकिन तब तक यह तस्वीर तैयार नहीं हो पाई थी। आज जब मैं उनके निवास स्थान सुदामा नगर यह भेंट लेकर पहुँचा, तो उनके चेहरे पर जो प्रसन्नता और भावनाएँ दिखीं, वह अविस्मरणीय थीं। "यह तो जीवंत तस्वीर है!" उनकी यह प्रतिक्रिया मेरे लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद थी। उन्होंने स्नेहपूर्वक मुझे आशीर्वाद दिया, अपने अनुभव साझा किए, और मुझे जीवन की अनमोल सीख दी। वे मेरे दादाजी राजेन्द्र पुरोहित के लगभग 50 वर्षों से मित्र हैं और दादाजी के साथ उस समय संघर्ष में उनके बिताए पुराने पल उन्होंने साझा किए जो मेरे लिए एक प्रेरणा से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा, "पुराने लोग पैसा भले ही कम कमाते थे, संघर्ष और मेहनत करते थे, लेकिन इज़्ज़त उससे दुगुनी कमाते थे। गरीबी थी, पैसा नहीं था, लेकिन लोगों में मानवता थी।"
वे संघर्ष और त्याग की जीवंत मिसाल हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उसके बाद जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी के लिए एक योद्धा के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे आपातकाल के दौरान भूमिगत आंदोलन के सबसे विश्वसनीय संपर्क सूत्र थे। आपातकाल में जेल भी गए और 1977 के चुनाव में सभा के लिए बोर्ड लगाते समय उन्हें विद्युत करंट लगने के कारण महीनों अस्पताल में भी रहना पड़ा। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने अखबार चलाते हुए पत्रकारों के लिए एक मजबूत समूह "संपादक संघ, मध्यप्रदेश (रजि.)" के रूप में खड़ा किया। आज इंदौर में जो भाजपा का इतना सशक्त संगठन और प्रभाव है उसके पीछे केवल ऐसे समर्पित देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं का परिश्रम और त्याग है। निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले जिनकी मेहनत ने भारतीय जनता पार्टी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया ऐसे सच्चे कर्मयोगी के संघर्ष और समर्पण को मेरा शत-शत नमन! 🙇🏻‍♂️🙏🏼💐 ~ नैवेद्य पुरोहित

Comments

  1. बहुत बढ़िया और सारगर्भित लिखा है नैवेद्य। इसी तरह अच्छा लिखते रहो, बुजुर्गों, या अपनी उम्र से वरिष्ठ के पास अनुभव का खजाना होता हैं जितना उनके समीप रहोगे सीखने को मिलेगा ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बिल्कुल सही कहा आपने, शायद इसलिए कहा जाता है Old is Gold!

      Delete

Post a Comment

Popular posts from this blog

20 की उम्र में चारधाम पूरे, रिश्तों का पंचधाम भी जी लिया!

जड़ों से जुड़ाव की पुकार: एक बार फिर कुलदेवता के दरबार में!

मन की शांति का रहस्य: स्वीकार्यता है!