जीवन का सबसे खूबसूरत उपहार: रक्तदान!

आज 27 फरवरी 2025, को मैंने एनएसएस यूनिट बेनेट यूनिवर्सिटी के द्वारा आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप में तीसरी बार रक्तदान किया। यह शिविर ओम चैरिटेबल ब्लड सेंटर, सेक्टर 63 नोएडा के सहयोग से आयोजित हुआ और इस बार भी पहले की तरह, यह अनुभव दिल को सुकून देने वाला रहा।
मुझे आज भी 2022 का वो दिन याद है जब मैं रक्तदान करने के लिए बहुत उत्साहित था, लेकिन 18 साल से कम उम्र होने की वजह से मुझे अनुमति नहीं मिली। उस दिन मैंने खुद से वादा किया था कि जैसे ही मैं योग्य होऊंगा, मैं हर साल रक्तदान करूंगा। यह मेरा तीसरा रक्तदान है और चौथी बार इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया है। हम में से कई लोग यह नहीं जानते कि सिर्फ 450ml (1 यूनिट) रक्त तीन लोगों की जान बचा सकता है! रक्तदान करने में कुछ मिनट ही लगते हैं, लेकिन यह किसी जरूरतमंद के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है।
इस बार भी मुझे "Certificate of Life Saver" मिला, लेकिन असली खुशी इस बात की है कि मेरा छोटा सा योगदान किसी को नई जिंदगी देगा। रक्तदान केवल एक समाजसेवा नहीं, बल्कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। मैं सभी स्वयंसेवकों, रक्तदाताओं और आयोजकों का दिल से धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने इसे सफल बनाया। आप सभी से निवेदन है कि जब भी मौका मिले, रक्तदान जरूर करें। यह निःस्वार्थ प्रेम और इंसानियत का सबसे बड़ा उदाहरण है।
"आपके खून की एक बूंद किसी के लिए जीवन की बूंद हो सकती हैं!" ~ नैवेद्य पुरोहित #रक्तदान_महादान #रक्तदान_जीवनदान #बेनेट_यूनिवर्सिटी #समाजसेवा #LifeSaver #DonateBlood #GiveBack

Comments

  1. नैवेद्य, तुम निस्वार्थ भाव से अच्छा कार्य कर रहे हों , छोटी सी उम्र में बहुत नेक काम, जितनी तारीफ करु कम है, आजकल के दुनिया में किसी को फुर्सत नहीं है अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों से मिलने की भी, उस दौर में तुमको देखकर लगता हैं कि ऐसे बच्चे भी हैं इस जमाने में, जो अनजान व्यक्ति के लिए अपना खून देने को तैयार रहते है। देश का भविष्य उज्ज्वल है ऐसी आशा है कि तुमको देख कर और बच्चे प्रेरणा लेंगे।
    शाबाश

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपके इन यहीं शब्द मुझे हमेशा प्रेरणा देते हैं कुछ सद्कार्य करने की....आपका आशीर्वाद सदा बना रहें 😊

      Delete

Post a Comment

Popular posts from this blog

20 की उम्र में चारधाम पूरे, रिश्तों का पंचधाम भी जी लिया!

जड़ों से जुड़ाव की पुकार: एक बार फिर कुलदेवता के दरबार में!

मन की शांति का रहस्य: स्वीकार्यता है!