ईशा फाउंडेशन पर गंभीर आरोप: क्या सद्गुरु के आश्रम में शोषण हो रहा है?
(नैवेद्य पुरोहित)
सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। स्वतंत्र पत्रकार श्याम मीरा सिंह द्वारा किए गए एक विशेष खुलासे में दावा किया गया है कि ईशा फाउंडेशन में नाबालिग लड़कियों के ऊपरी वस्त्र उतरवाकर उनका इनिशिएशन (दीक्षा) किया जाता था। इस सनसनीखेज दावे के समर्थन में कथित तौर पर फाउंडेशन के आधिकारिक ईमेल्स का हवाला दिया गया है, जो इस संस्था की गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आश्रम में क्या चल रहा है?
श्याम मीरा सिंह के यूट्यूब चैनल पर जारी किए गए इस वीडियो में ईशा फाउंडेशन के भीतर हो रही कथित अनियमितताओं को उजागर किया गया है। वीडियो में दावा किया गया है कि फाउंडेशन के भीतर महिलाओं और विशेष रूप से नाबालिग लड़कियों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनिशिएशन प्रक्रिया के दौरान लड़कियों से उनके ऊपरी वस्त्र उतरवाने के लिए कहा जाता था, जो आध्यात्मिक प्रक्रिया के नाम पर शोषण जैसा प्रतीत होता है।
ईशा फाउंडेशन और सद्गुरु की छवि पर असर
सद्गुरु को दुनियाभर में एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाना जाता है। वह पर्यावरण, योग और ध्यान से जुड़े कई अभियानों का नेतृत्व कर चुके हैं। लेकिन इस नए खुलासे के बाद उनकी छवि पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यदि ईमेल्स की सत्यता साबित होती है, तो यह न केवल ईशा फाउंडेशन बल्कि आध्यात्मिक गुरुओं की विश्वसनीयता पर भी गहरा आघात कर सकता है।
सरकार और जांच एजेंसियां क्या करेंगी?
अब सवाल उठता है कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होगी? क्या सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस दावे की जांच करेंगी? अभी तक ईशा फाउंडेशन या स्वयं सद्गुरु की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि ये आरोप झूठे हैं, तो फाउंडेशन को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए, और यदि ये आरोप सही हैं, तो यह एक बड़ा नैतिक और कानूनी अपराध साबित हो सकता है।
क्या आध्यात्मिकता की आड़ में होता रहा है शोषण?
भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक गुरुओं की छवि काफी प्रभावशाली रही है। लेकिन समय-समय पर कई बड़े धर्मगुरुओं पर अनुचित गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं। गुरमीत राम रहीम, आसाराम बापू, स्वामी नित्यानंद, स्वामी सदाचारी, रामपाल, स्वामी प्रेमानंद, स्वामी भीमानंद और फलाहारी महाराज जैसे बाबाओं पर रेप के आरोप लगे हैं। इन मामलों ने यह बताया है कि कैसे धर्म और भक्ति की आड़ में कई बार शोषण छिपा रहता है।
क्या ईशा फाउंडेशन इन आरोपों से उबर पाएगा, या यह मामला भारत में आध्यात्मिक संगठनों की कार्यप्रणाली पर एक स्थायी दाग छोड़ देगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा। एक बात स्पष्ट है कि इस खुलासे ने एक बड़े विवाद को जन्म दिया है, जिसकी निष्पक्ष जांच और सच्चाई का सामने आना जरूरी है। https://youtu.be/RtiHOm5iwas?si=4WY7blZfkJZJCA6U




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