डॉयचे वेले के महानिदेशक पीटर लिम्बर्ग ने बदलती दुनिया और पश्चिमी मीडिया की चुनौतियों पर रखे विचार!
(नैवेद्य पुरोहित)
बुधवार 29 जनवरी 2025 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हेबिटेट सेंटर के कैसुरिना हॉल में डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) के महानिदेशक पीटर लिम्बर्ग ने 'बदलती वैश्विक परिस्थितियाँ और पश्चिमी मीडिया की चुनौतियाँ' विषय पर एक विचारोत्तेजक सत्र को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का संचालन सेराफिम कम्युनिकेशंस की संस्थापक सुनंदा राव एर्दम ने किया, जिन्होंने हमारे फैकल्टी डॉ. तिलक झा और कुछ छात्रों को इस प्रतिष्ठित आयोजन में शामिल होने का अवसर प्रदान किया।
डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू), जर्मनी का अंतरराष्ट्रीय प्रसारक है जो 32 भाषाओं में अपनी सेवाएं प्रदान करता है। 2023 में डीडब्ल्यू ने प्रति सप्ताह 320 मिलियन वैश्विक उपयोगकर्ताओं तक अपनी पहुंच बनाई। यह एक पब्लिक ब्रॉडकास्टर है, जो सन 1953 में जर्मन संघीय सरकार द्वारा स्थापित किया गया था। यह जर्मन सरकार के टैक्स बजट से वित्तपोषित है। पीटर लिम्बर्ग 2013 से डीडब्ल्यू के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और उनके नेतृत्व में डीडब्ल्यू ने तथ्य-आधारित पत्रकारिता को बढ़ावा देने का काम किया है।
सत्र के दौरान लिम्बर्ग ने कहा, "For us it is important to not to teach and breach but to inform!" अर्थात हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम सिखाने और उपदेश देने के बजाय सूचित करें। तथ्यों पर आधारित पत्रकारिता पर ध्यान देते हुए उन्होंने कहा, "We try to give facts and fact driven is the most important thing, it demands courage to give facts" सबसे जरूरी है तथ्यों को प्रस्तुत करना और तथ्यों को प्रस्तुत करने में साहस की आवश्यकता होती है! उन्होंने फील्ड वर्क पर जोर देते हुए कहा,"Do field work don't just always be on desk work", try not to be activist but journalist" डेस्क पर बैठकर काम करने के बजाय मैदान में उतर कर पत्रकारिता करने की सलाह दी। एक पत्रकार के रूप में एक्टिविस्ट नहीं जर्नलिस्ट रहना है जो हमेशा तथ्यों को प्रस्तुत करे।
लिम्बर्ग ने पत्रकारिता को दुनिया का सबसे अच्छा पेशा बताते हुए कहा, "The best job in the world is journalism, you can help people, you can get knowledge you have a purpose! It is a privilege to be a journalist, you get smarter" वाकई पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है जिसमें आप लोगों की मदद करते हैं, अथाह ज्ञान का सागर प्राप्त कर सकते हैं और एक उद्देश्य के साथ काम करते हैं। यह एक विशेषाधिकार है कि आप पत्रकार हैं।"
सोशल मीडिया के बारे में उन्होंने कहा, "Social media is driven by emotions and not by facts. Facts can be there but social media function by emotions. With polarization, fact-driven media has more difficulties than before. We cannot only live with emotions and polarization, they need facts to be better informed." सोशल मीडिया हमेशा भावनाओं से प्रेरित होता है, तथ्यों से नहीं। तथ्य होते है पर सोशल मीडिया की कार्य पद्धति भावनाओं पर आधारित है। ध्रुवीकरण के साथ, तथ्य-आधारित मीडिया को पहले से अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हम केवल भावनाओं और ध्रुवीकरण के साथ नहीं रह सकते, लोगों को बेहतर जानकारी के लिए तथ्यों की आवश्यकता है।
इस सत्र में डीडब्ल्यू की एशिया प्रोग्राम्स की निदेशक देवब्रती गुहा भी मौजूद थीं, जो डीडब्ल्यू के नौ एशियाई भाषा कार्यक्रमों का प्रबंधन करती हैं।
सत्र खत्म होने के बाद हम डीडब्ल्यू की इंडिया ब्यूरो चीफ सैंड्रा पीटर्समैन और डीडब्ल्यू हिंदी के प्रमुख महेश झा से मिले जिन्होंने कई सारे अनुभव साझा किए। सैंड्रा पीटर्समैन को अफगानिस्तान युद्ध पर उनके काम एवं उनके ढाई दशक की कई उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए जर्मनी की महिला पत्रकार संघ द्वारा 'करेज अवार्ड' से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, महेश झा जो बर्लिन की दीवार के गिरने, जर्मन एकीकरण और शीत युद्ध के अंत जैसे ऐतिहासिक घटनाओं के गवाह रहे है। डीडब्ल्यू-हिंदी के प्रमुख के रूप में वे विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और लैंगिक समानता के क्षेत्र में हिंदी पत्रकारिता के प्रसार के लिए सक्रिय हैं।
इस कार्यक्रम में आईआईएमसी, जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के छात्रों के साथ कई वरिष्ठ पत्रकार भी शामिल हुए। मेरे लिए यह सत्र न केवल ज्ञानवर्धक था, बल्कि इसने हमें वैश्विक मीडिया की चुनौतियों और अवसरों को समझने का एक नया नजरिया दिया।
हमारे फैकल्टी डॉ. तिलक झा सर का विशेष रूप से आभार जिन्होंने हमें इस अद्भुत अवसर में सम्मिलित होने का मौका दिया। यह अनुभव वाकई ख़ास रहा जिसने मेरे ज्ञान और नेटवर्क दोनों का विस्तार किया!
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ऐसे ही गुणी जन के साथ ज्ञान प्राप्त करते हुए कर्म पथ पर आगे बढ़ते रहो
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