गणतंत्र दिवस के 75 साल पूरे होने पर गुमनाम नायकों को समर्पित एक प्रेरणादायक आयोजन

(नैवेद्य पुरोहित)
भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस यूनिट ने ग्रेटर नोएडा के डाबरा गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में एक प्रेरणादायक आयोजन किया। इस विशेष कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि दी गई। यह आयोजन एनएसएस यूनिट के फैकल्टी एडवाइजर डॉ. दिनेश कुमार के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
स्वागत भाषण में स्वतंत्रता और गणतंत्र का महत्व बेनेट यूनिवर्सिटी की एनएसएस यूनिट के उपाध्यक्ष के रूप में मुझे इस आयोजन का संचालन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मेरे स्वागत भाषण से हुई, जिसमें मैंने गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। वहां उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को यह याद दिलाया कि हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हो गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक पल 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की घोषणा का सम्मान करने के लिए और उस ऐतिहासिक दिन को जीवित बनाए रखने के लिए 26 जनवरी की तारीख को जानबूझकर चुना गया था। मैंने उन गुमनाम नायकों का भी जिक्र किया गया, जिनके योगदान को इतिहास में भुला दिया गया है। रानी गाइदिनल्यू, अल्लूरी सीतारामराजू, सुखदेव, राजगुरु, भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद करते हुए सभी प्रेरित हुए और अपने कर्तव्यों को निभाकर देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा।
नुक्कड़ नाटक: गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नुक्कड़ नाटक था, जिसे एनएसएस वॉलंटियर्स—नमन गर्ग, केशव गुप्ता, रिया पंवार, रीवा सिंघल, शाश्वत गुप्ता, सार्थक सिंगला, रिवितिका गुप्ता, आयुष मिश्रा, लक्ष्य दुआ, सिद्धार्थ सिंह, अनंत वैभव शर्मा, आरज़ू टायल, हुमैरा सबाह, ज़ारा खान, सारिका सैनी, अर्थ सक्सेना और सुमन महापात्रा ने प्रस्तुत किया। इस नाटक में स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को जीवंत किया गया।
नृत्य में देशभक्ति की झलक नुक्कड़ नाटक के बाद, रिया पंवार और आरज़ू टायल ने "तेरी मिट्टी" गाने पर एक मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने वहां मौजूद सभी के दिल को छू लिया।
कार्यक्रम के अंत में स्कूल के सभी विद्यार्थियों और स्टाफ को एनएसएस की तरफ से समोसे वितरित किए गए। इस छोटी-सी कोशिश ने सभी के चेहरों पर मुस्कान ला दी और बेनेट यूनिवर्सिटी एनएसएस यूनिट की सेवा और एकता की भावना को मजबूत किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में डीएसए तनवीर अहमद सर, एनएसएस प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. अजय यादव सर, फैकल्टी एडवाइजर डॉ. दिनेश कुमार सर और स्कूल की प्रिंसिपल पुष्पा मैम का विशेष योगदान रहा। उनकी अनुमति और समर्थन के बिना यह आयोजन संभव नहीं हो पाता। इस अनुभव ने मेरे हृदय में अमिट छाप छोड़ी है। मुझे गर्व है कि मैंने इस ऐतिहासिक दिन पर हमारे देश के उन गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि देने में योगदान दिया। आइए, हम इन नायकों की विरासत को आगे बढ़ाएं और उनकी कहानियों से प्रेरणा लेकर अपने देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें!

Comments

  1. बहुत अच्छा कार्य किया है तुम लोगो ने, अपने जीवन में अपने करियर को संवारने के अलावा, किसी के लिए करुणा का भाव रखना ही हमारे अच्छे व्यक्ति होने की निशानी है... देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले हमारे स्वतंत्रता सेनानीयो को याद कर के अच्छा कार्य किया है , ऐसे ही अच्छे लेख लिखते रहो

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    1. आपके इन स्नेहपूर्ण शब्दों से ही प्रोत्साहन मिलता है। बहुत बहुत धन्यवाद।

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