20वें जन्मदिन की यादगार दास्तान!
जन्मदिन का दिन हमेशा से ही मेरे लिए खास रहा है, लेकिन इस बार मेरा 20वां जन्मदिन हर मायने में अलग और यादगार साबित हुआ। जब से मैंने ग्रेटर नोएडा के बेनेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू की है, तब से पिछले दो साल से मेरा जन्मदिन वहीं मन रहा था, परिवार से दूर। आखिरी बार 2021 में घरवालों के साथ जन्मदिन मनाया था। हालांकि, घरवालों से दूर होने का दुःख इतना नहीं होता था जितना मेरी छोटी बहन नायशा की कमी का महसूस होता था।
मेरे लिए जन्मदिन का सबसे खास उपहार - नायशा
आज से 11 साल पहले मुझे जन्मदिन पर अपने माता-पिता के द्वारा एक ऐसा उपहार दिया गया जो कि मेरा सबसे बड़ा महत्वपूर्ण और बेस्ट गिफ्ट हैं जिसे कोई नहीं बदल सकता। मेरा और मेरी बहन का जन्मदिन एक ही दिन आता है, 11 दिसंबर। फर्क बस इतना है कि मेरा जन्म 2004 की रात 10 बजे हुआ और नायशा का 2013 की सुबह 10 बजे। हर साल हम दोनों साथ में केक काटते थे। वह मेरी सबसे बड़ी खुशी और मेरा सबसे अनमोल तोहफा है। इस बार भी मुझे लगा कि मैं उससे दूर रहूँगा, लेकिन मेरे दोस्तों माही, जिया और जयंत ने कहा कि मुझे इस बार अपने घर जाना चाहिए। यहीं से मेरे इस यादगार जन्मदिन की योजना शुरू हुई।
सरप्राइज़ का प्लान
मैंने बिना किसी को बताए, 6 दिसंबर को ही इंदौर पहुंचने का मन बना लिया। न दादा-दादी, न मम्मी-पापा, न नाना-नानी और न ही दोस्तों को इसकी भनक थी। चूंकि बीएजेएमसी में हमारे सिर्फ दो ही सब्जेक्ट के लिखित पेपर थे और वो 20 और 21 तारीख को होने हैं। इसलिए बीच के 15-20 दिन पूरी तरह खाली थे। पढ़ाई का भी ज्यादा दबाव नहीं था, तो मैंने फौरन टिकट बुक करवाई और इंदौर के लिए रवाना हो गया। सबसे पहले घर पहुंच कर जब मैंने अपने घरवालों को सरप्राइज दिया, तो वे बेहद चौंक गए और खुशी के मारे झूम उठे। दादी और मम्मी तो खुशी के मारे रूआंसी हो गईं। दोनों मेरे दोस्त जयंत को धन्यवाद दे रही थीं, "तुम इसे लेकर आए बेटा, थैंक्यू।" फिर मैं नहा-धोकर तैयार होकर पापा को सरप्राइज देने के लिए अपनी गाड़ी से धार रोड बिसनावदा भट्टे पर गया। वहां पापा भी मुझे देखकर बेहद खुश हुए। पापा और मैं दोनों फिर दादाजी के भट्टे कलारिया गए, तो वे और भी ज्यादा खुश हो गए। शाम को मैं नानाजी के यहां गया और सबको सरप्राइज दिया मामा, मामी, नानाजी, नानीजी और फिर बुआजी के यहां भी जाकर मैंने सबको सरप्राइज किया। अचानक मेरे आ जाने से सब इतने खुश हो गए कि उन्हें देखकर ही दिल को बहुत सुकून मिला। मम्मी ने मेरे आने के पहले से ही नायशा के लिए विजय नगर स्थित काबेलो वेज बारबेक्यूज़ में शानदार पार्टी का इंतजाम कर रखा था। मैंने भी अपने पुराने दोस्तों को बुलाने का सोचा और फिर शुरू हुआ मेरा जन्मदिन मनाने का सफर।
11 दिसंबर का खास दिन
सुबह उठते ही सबसे पहले दादाजी-दादीजी के चरण स्पर्श किए और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद अपनी बहन नायशा को जन्मदिन की बधाई दी और हम दोनों ने साथ में केक काटा। यह एक ऐसा पल था जो मुझे हर साल सबसे ज्यादा खुशी देता है। उसके बाद मैं, नायशा और विन्नी (मेरी बुआ का बेटा) खजराना गणेश मंदिर गए। वहाँ पहुँचते ही मन को असीम शांति का अनुभव हुआ। मंदिर के पंडितजी मुझे अच्छी तरह से जानते हैं। जब उन्हें बताया कि आज मेरा और नायशा का जन्मदिन है तो उन्होंने तुरंत हमें आशीर्वाद दिया और माला पहनाई। घर लौटने के बाद, मम्मी की दिली इच्छा पूरी करने के लिए सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन किया गया था। पहले रुद्राभिषेक और दुग्धाभिषेक हुआ। उसके बाद कथा का आयोजन शुरू हुआ और अंत में यज्ञ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। पूरे धार्मिक माहौल में शामिल होकर मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास हुआ। दिनभर मोबाइल पर सैकड़ों संदेशों और कॉल्स की भरमार रही। दोस्तों और रिश्तेदारों ने इंस्टाग्राम फेसबुक व्हाट्सएप पर स्टोरीज और स्टेटस लगाकर अपनी शुभकामनाएँ दीं। हर संदेश को पढ़कर और हर कॉल को सुनकर दिल को एक अलग ही खुशी का एहसास हो रहा था।
शाम की धमाकेदार पार्टी
शाम को हम सब तैयार होकर काबेलो वेज बारबेक्यूज़ पहुँचे। यह इंदौर के विजय नगर स्थित प्रिंसेस बिज़नेस स्काईलाइन बिल्डिंग के रूफटॉप पर है। वहाँ पहुँचते ही सजावट ने मन मोह लिया। दादा-दादी, नाना-नानी, मामा-मामी, बुआ-फूफा, अभिषेक ब्रिक्स के ऑफिस के सभी स्टॉफ और मेरे दोस्त नायशा के दोस्त सभी वहाँ मौजूद थे। सभी ने मिलकर खूब मस्ती की। अंत में हम दोनों ने केक काटा, हर व्यक्ति ने मुझे और नायशा को प्यार और आशीर्वाद के साथ उपहार दिए। वहाँ बिताए गए हर पल ने इस दिन को और भी खास बना दिया।
उपहारों की कहानी
अगले दिन सुबह मैंने और नायशा ने सभी उपहार खोले। हर गिफ्ट में लोगों का प्यार और उनकी भावनाएँ झलक रही थीं। उन उपहारों से ज्यादा कीमती वो पल थे, जो सबने साथ में बिताए और अपना कीमती समय व आशीर्वाद दिया। यह मेरे लिए किसी भी भौतिक उपहार से कहीं ज्यादा अहम था।
20वें साल की शुरुआत
19 से 20 की इस यात्रा में मैंने महसूस किया कि जिंदगी के हर छोटे-बड़े पल को पूरी तरह खुलकर हस्ते मुस्कुराते हुए जीना चाहिए। 20 साल का होना सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि कई सारी जिम्मेदारियों और आत्मनिर्भरता की एक शुरुआत है। मेरे इस 20वें जन्मदिन ने मुझे सिखाया कि परिवार, दोस्तों और अपने करीबियों के साथ बिताया गया समय ही सबसे अनमोल होता है। मैं भगवान से यही प्रार्थना करता हूँ कि मेरी जिंदगी में ऐसे ही खुशियों के पल आते रहें।
सुखी बसे संसार सब दुखिया रहे न कोय,
यह अभिलाषा हम सब की, भगवन पूरी होय,
विद्या बुद्धि तेज बल सबके भीतर होय,
दूध पूत धन-धान्य से वंचित रहे न कोय!
~ नैवेद्य पुरोहित




बहुत अच्छा लिखने लगें हो।
ReplyDeleteभावनाएं अच्छे से व्यक्त करना आता है तुम्हे,
सदा ऐसे ही रहना....
बहुत प्यार और आर्शीवाद,
बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🥰
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