वर्चुअल न्यूज़ एंकर: पत्रकारिता का भविष्य या चुनौती ?
(नैवेद्य पुरोहित)
बेनेट यूनिवर्सिटी के करियर सर्विसेस सेल और टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया द्वारा आयोजित 'एआई स्फीयर' में पत्रकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञों ने "वर्चुअल न्यूज़ एंकर: बायस, ट्रांसपेरेंसी एंड अकाउंटेबिलिटी" विषय पर गहन चर्चा की। यह कॉन्फ्रेंस मीडिया और तकनीक के बढ़ते समन्वय के बीच पत्रकारिता के भविष्य पर रोशनी डालने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
इस चर्चा में भारत के प्रतिष्ठित मीडिया विशेषज्ञ शामिल हुए:
1. आर. जय कृष्ण - महासचिव, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन
2. चित्रांशु तिवारी - प्रोडक्ट और रेवेन्यू डायरेक्टर, न्यूज़लॉन्ड्री
3. मेघना डेका - एडिटर आउटपुट डेस्क, टाइम्स नाउ
4. देविका मेहता - उप संपादक, जागरण न्यू मीडिया
5. लितीषा मंगत पांडा - हेड ऑफ बिज़नेस, ओडिशा टेलीविज़न नेटवर्क
वर्चुअल न्यूज़ एंकर: उभरते अवसर और चुनौतियाँ
पैनलिस्टों ने बताया कि कैसे वर्चुअल न्यूज़ एंकर तकनीक के जरिए पत्रकारिता को नए आयाम दे रहे हैं। साथ ही वर्चुअल एंकर की बढ़ती उपस्थिति के साथ कई सवाल खड़े होते हैं। पहला, एआई सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोग किए गए डेटा में छिपे पूर्वाग्रह वर्चुअल एंकरों की समाचार प्रस्तुति में झलकते हैं। यह समाचार की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्न उठाता है। दूसरा, पारदर्शिता जो कि पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है। दर्शकों को यह जानने का हक है कि जो खबरें उनके सामने प्रस्तुत की जा रही हैं वह किसी वर्चुअल एंकर की कृत्रिम बुद्धिमत्ता का परिणाम हैं या किसी इंसानी एंकर की मेहनत का। इसके अलावा, वर्चुअल एंकर के पीछे इस्तेमाल की गई तकनीक, एल्गोरिदम और डेटा के स्रोत को भी पारदर्शी रखना जरूरी है। इससे न केवल मीडिया संगठनों की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि यह दर्शकों को भी समझने में मदद करेगा कि उनके पास खबरें कैसे और कहां से आ रही हैं। तीसरा, अगर वर्चुअल एंकर से कोई गलत सूचना प्रसारित होती है तो इसके लिए जिम्मेदार आखिर कौन होगा? इंसान या तकनीक?
मीडिया का भविष्य और हमारी भूमिका
चर्चा में यह भी सामने आया कि वर्चुअल न्यूज एंकर को अपनाने के साथ ही हमें मीडिया की पारंपरिक नैतिकता को भी बनाए रखना होगा। समाचार का लक्ष्य केवल सूचना देना नहीं, दर्शकों का विश्वास अर्जित करना है। इस सत्र के दौरान मुझे यह एहसास हुआ कि भविष्य की पत्रकारिता में तकनीक और मानवीय कौशल का संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्चुअल एंकर जहां पत्रकारिता के लिए एक नया मंच तैयार कर रहे हैं, वहीं मानवीय संवेदनाएं और अनुभव आज भी अपरिहार्य हैं।
'एआई स्फीयर' की यह कॉन्फ्रेंस न केवल तकनीकी संभावनाओं को समझने का अवसर था, अपितु यह भी समझ आया कि कैसे भविष्य में एआई के व्यापक उपयोग के बाद मीडिया परिदृश्य किस तरह बदल जाएगा। क्या वर्चुअल न्यूज़ एंकर पत्रकारिता का भविष्य है या पत्रकारों के लिए एक नई चुनौती है? अपनी राय ज़रूर साझा करें।
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पत्रकारों को नई चुनौतियों का सामना करना आना चाहिए और ए आई के आने के बाद और काम आसान होगा अगर उसे अपनाया गया तो...... परिवर्तन संसार का नियम है, जो परिवर्तनशील नहीं हैं वह जड़ बुद्धि है। तकनीक और मानवीय कौशल बनाए रखना महत्वपूर्ण है तुम यह कर सकते हो बहुत आसानी से ऐसा मेरा विश्वास है
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