नारद पत्रकारिता पीठ: एक अधूरा वादा
(नैवेद्य पुरोहित)
मध्यप्रदेश का जबलपुर एक ऐसी शख्सियत का घर रहा है जिसने पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान दिया - स्वर्गीय हुक्मचंद नारद। उन्हें श्रमजीवी पत्रकारिता का पितामह कहा जाता है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भूमिका आज भी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनकी स्मृति में 1999 में जबलपुर के सिविक सेंटर में एक कांस्य प्रतिमा का अनावरण हुआ था जिसके माध्यम से उनकी स्थायी विरासत को चिरस्थायी बनाने की कोशिश की गई। इस मौके पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा 'नारद पत्रकारिता पीठ' की स्थापना का भी वादा किया गया था, जो पत्रकारिता में उत्कृष्टता और सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देने हेतु समर्पित संस्था के रूप में प्रस्तावित थी।
25 वर्षों का लंबा वक्त गुजर चुका है, लेकिन यह संकल्प अभी भी अधूरा है। स्वर्गीय हुक्मचंद नारद के पोते डॉ. संदीप नारद और पत्रकारिता क्षेत्र के अन्य अनेक लोगों ने इस पर निरंतर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। कुछ समय पहले, डॉ. नारद ने मध्यप्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर इस दिशा में त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया था, ताकि हुक्मचंद नारद की स्मृति में की गई यह घोषणा व्यर्थ न जाए। अभी तक भी उस पत्र का कोई जवाब नहीं आया।
यह प्रश्न आज प्रासंगिक है कि जब पत्रकारिता में सत्य और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर निरंतर खतरा मंडरा रहा है, तब 'नारद पत्रकारिता पीठ' जैसी संस्था की जरूरत कहीं अधिक महत्वपूर्ण क्यों नहीं समझी जा रही। यह पीठ न केवल नारद जी के योगदान को सम्मान देने के लिए है बल्कि पत्रकारिता की पवित्रता को संजोने और आने वाली पीढ़ियों को नैतिकता के मार्ग पर अग्रसर करने का एक प्रयास भी है। इस संस्था के माध्यम से मीडिया में उन आदर्शों का पुनर्जीवन हो सकता है जिनके लिए हुक्मचंद नारद ने अपने जीवन को समर्पित किया था।
25 वर्षों का यह लंबा अंतराल उन पत्रकारों के विश्वास और सरकार के प्रति उनके भरोसे को भी चुनौती देता है, जो समाज में बदलाव के वाहक हैं। यह आवश्यक है कि इस वादे को पूरा कर सरकार न केवल हुक्मचंद नारद के प्रति सम्मान प्रकट करे बल्कि समाज में पत्रकारिता के मूल्यों को भी मजबूती दे।
यह अधूरा वादा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपने ऐतिहासिक नायकों की स्मृति को सजीव रखने में सक्षम हैं? क्या हम उनके द्वारा दिखाए गए आदर्शों को समाज में जीवित रखने का माद्दा रखते हैं? डॉ. संदीप नारद और पत्रकारों का यह आह्वान एक अत्यंत गंभीर मुद्दा है जो समय की मांग है। मध्यप्रदेश में डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से आग्रह है कि इस पीठ की स्थापना को शीघ्र साकार करे ताकि हुक्मचंद नारद के योगदान को समर्पित यह पीठ पत्रकारिता में नैतिकता और सत्यनिष्ठा की एक मिसाल बन सके।
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मै आपकी बात का समर्थन करता हूं
ReplyDeleteपत्रकार महोदय ,
सरकार निश्चित की इस तरफ कुछ करेगी।
क्योंकि यह सरकार पड़े लिखे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की है