सीखने की यात्रा है ज़िंदगी: टाइम्स नेटवर्क में मेरा अनुभव
टाइम्स नेटवर्क में मेरी समर इंटर्नशिप एक कठिन परिवर्तनकारी अनुभव था जिसने मुझे मेरे कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकाला और मुझे ऐसी सीख दी जिन्हें मैं जीवन भर संजोकर रखूंगा।
जब मैं आज बीते दो महीनों के बारे में सोचता हूं तो मुझे उन अनगिनत चुनौतियों की याद आती है जिनका मैंने सामना किया, जिन बाधाओं को मैंने पार किया और जो कुछ भी मैंने हासिल किया। ज़िंदगी कब समर वैकेशन से समर इंटर्नशिप पर आ गई पता ही नहीं चला। यह समय विकास, मेहनत और समर्पण का रहा जिसे मैं हमेशा गर्व और उपलब्धि की भावना के साथ याद करूंगा।
1 जून को जब मैं नोएडा फिल्म सिटी में टाइम्स ऑफ इंडिया बिल्डिंग पर पहुंचा तो मुझे पता था कि यह इंटर्नशिप थोड़ी अलग होने वाली है। किसी बड़े संस्थान में यह मेरी पहली इंटर्नशिप थी...उम्मीदें कुछ ज्यादा थी, समय की गति बड़ी तेज़ थी और कार्यभार चुनौतीपूर्ण था। मैं इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने, जितना हो सके सीखने और न्यूज़ लाइब्रेरी डिपार्टमेंट में सार्थक तरीकों से टीम में योगदान देने के लिए तैयार था।
दिन लंबे और थकाऊ थे, अक्सर देर शाम तक खींच जाते थे। रोज़ वहीं मैं जल्दी उठता, तैयार होता, और आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए मुस्कुरा कर तैयार होकर ऑफिस जाता। जैसा सोचा था सब ठीक उसके विपरीत हुआ ऑफिस में काम पूरी तरह से अलग था। हम तीन दोस्त जिया, सौम्या और मैं जिनकी टाइम्स नेटवर्क में इंटर्नशिप लगी थी रोज़ यही सोचते थे, "सीवी में तो ये बातें लिखी नहीं थी जो यहां पर काम करवा रहें हैं!" हर प्रकार के काम किए हम तीनों ने प्रत्येक कार्य को सही तरीके से पूरा किया उत्साह और समर्पण के साथ। शुरूआत में 10-15 दिन लगे हमें पूरा काम सीखने और समझने में उसके बाद हम तीनों के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी 'डिजिटाइजेशन' उर्फ़ टेप जमाने की चुनौती...। टाइम्स नेटवर्क की लाइब्रेरी से धूल से भरी हुई 11,000 से ज़्यादा टेपों को छांटना, पैक करना, लेबल करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। यह ऐसा काम था जिसके लिए बारीकी से ध्यान देने और असीम धैर्य संयम की आवश्यकता थी। हम तीनों ने इस काम को पूरा करने के लिए महीनेभर अथक परिश्रम किया और अक्सर अपने लंच ब्रेक का त्याग किया।
कार्यक्षेत्र में सिर्फ़ काम करना ही चुनौतीपूर्ण नहीं था पीजी में रहने की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं थी। पीजी में रहने की व्यवस्था ठीक ही थी और खाना भी बढ़िया नहीं था। मुझे यह इंटर्नशिप पूरी करने के लिए सभी ज़रूरतों को पूरा करते हुए नए माहौल, नए लोगों और नई दिनचर्या के साथ तालमेल बिठाना पड़ा। हर दिन घर की याद आती थी। सभी दोस्त अपने परिवार के साथ घूमने जा रहे थे, गर्मी की छुट्टियों का आनंद ले रहे थे, पुराने दोस्त एक दूसरे से मिल रहे थे।
रोज़ाना आना-जाना भी कोई कम संघर्ष नहीं था क्योंकि रोज़ सुबह-सुबह ऑटो और ई रिक्शा मिलते ही नहीं थे। हमें एक ई रिक्शा के लिए बहुत देर तक इंतज़ार करना पड़ता था और फिर गलती से भी कोई मिल जाता तो उसे हमें फिल्म सिटी टाइम्स ऑफ इंडिया बिल्डिंग ऑफ़िस ले जाने के लिए सही भाव में मनाना पड़ता था। कोई ऑटो और ई रिक्शा ढूँढना भी एक चुनौती ही थी। एनसीआर की गर्मी और धूप में खड़े रहकर इंतज़ार थोड़ा कष्टदायक होता था इसके बावजूद हर दिन हम समय के पहले ऑफिस पहुंचते थे। शाम को भी यही संघर्ष होता था क्योंकि हमें अपने पीजी पर वापस जाने के लिए भी ई रिक्शा मिलने का इंतजार करना पड़ता था। यह प्रतीक्षा बड़ी कष्टदायक और निराशाजनक होती थी लेकिन इसने हमें हर दिन दो बार धैर्य रखना सिखाया।
इन सब चुनौतियों के बावजूद, मुझे छोटी-छोटी जीत और सीखे गए सबक में खुशी मिली। मैंने टीमवर्क का क्या महत्व होता है और हर बात में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना सीखा।
इस इंटर्नशिप ने मुझे मीडिया इंडस्ट्री और उसके दिग्गजों की वास्तविकता की एक समझ दी। मैंने पहली बार देखा कि एक न्यूज चैनल चलाने में कितनी मेहनत, समर्पण और जुनून लगता है। मुझे एहसास हुआ कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती बल्कि वर्षों की कड़ी मेहनत, दृढ़ता और असफलताओं से सीखने का परिणाम है सफ़लता।
मैं न्यूज़ लाइब्रेरी विभाग और उन मार्गदर्शकों का दिल से आभार व्यक्त करना चाहूँगा जिन्होंने इस पूरी यात्रा में मेरा मार्गदर्शन किया। गीतांजलि मलिक मैम, जिन्होंने हम पर विश्वास किया और हमें मुंबई से इस अवसर के लिए चुना, हमेशा हमारा मार्गदर्शन करने और मूल्यवान प्रतिक्रिया देने के लिए उपलब्ध रहीं। तबरेज़ आलम सर, जिन्होंने हमारे पहले दिन हमारा स्वागत किया और हमें न्यूज लाइब्रेरी की टीम कहां बैठती है उस ऑफिस का रास्ता दिखाया, हमेशा हमारा समर्थन करते रहे। राज शर्मा सर, जिन्होंने हमारी गलतियों को इंगित किया और हमें सुधारने में मदद की जो कि हमारी ग्रोथ में ज़रूरी रहा। अनखा गणेश मैम, जिन्होंने हमें आई न्यूज और इसके कार्यों से परिचित कराया, सारा डाटा कहां सेव होता है यह बताया और वे हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहती थीं। आरिफ खान सर, जो पूरे समय अपने फ्रेंडली नेचर और मजाकिया हरफनमौला स्वभाव से ऑफिस का माहौल मज़ेदार बनाते थे। मोनू आज़ाद सर, जिन्होंने मुझे मेटाटैगिंग में ज़रूरी शॉर्टकट सिखाए और बताया कि ज्यादा लम्बे वाक्य लिखने की जरूरत नहीं होती है। और अंत में, अमरजीत शाह सर, जिन्होंने हमारे आने के एक महीने पहले ही ऑफिस ज्वॉइन किया था। हमारी हर बात को उन्होंने सुना, समझा, उम्र में वे ज्यादा बड़े ना होने से ऑफिस में वो सबसे ज्यादा रिलेटेबल लगे। वे हमारी चुनौतियों को समझते थे और समाधान प्रदान करते थे। न्यूज लाइब्रेरी के अलावा मैं इंजेस्ट विभाग का भी आभार व्यक्त करना चाहूँगा, जो हमारे साथ ही उसी छोटे से कमरे में काम करते थे। एक कमरे में दो डिपार्टमेंट चलते थे। इंजेस्ट टीम के मंत्रमुग्ध सर उर्फ दादा ने हमें पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक मीडिया इंडस्ट्री की पेचीदगियों को सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दादा का मार्गदर्शन अमूल्य था क्योंकि उन्होंने अपने अनुभव व अपनी विशेषज्ञता हमारे साथ साझा की और कॉर्पोरेट दिग्गजों की जमीनी हकीकत के बारे में जानकारी दी। उनकी सलाह और समर्थन हमारे लिए महत्वपूर्ण रहा। इंजेस्ट विभाग के दीपक सर, कृष्णा सर, मनीष सर और भी सभी व्यक्तियों ने जो सहयोग समर्थन दिया उसके लिए तहदिल से शुक्रगुजार हूं!
कल 31 जुलाई को हमारा विदाई समारोह था ये एक वो बिटर स्वीट मोमेंट था, जो टाइम्स नेटवर्क में हमारी 2 महीने की यात्रा के अंत को चिह्नित कर रहा था। न्यूज लाइब्रेरी विभाग ने हमारी उपलब्धियों का जश्न मनाते हुए और हमारी कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए एक शानदार विदाई का आयोजन किया। टीम के दयालु शब्दों और हार्दिक प्रशंसा ने हमारे दिलों को खुशी, कृतज्ञता से भर दिया।
11,000 से ज़्यादा टेप को जमाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी और हमें अपने समर्पण व दृढ़ता पर गर्व महसूस हुआ। विभाग ने हमारे अथक प्रयासों को स्वीकार किया, उनका एक्नोलेजमेंट हमारे लिए बहुत मायने रखता है। डिपार्टमेंट वालों ने हमें एक स्वादिष्ट केक, नाश्ता, कोल्डड्रिंक्स बहुत कुछ देकर आश्चर्यचकित कर दिया। हमने हर निवाले का स्वाद लिया और साथ मिलकर जश्न मनाया। उस वक्त पूरा कमरा हर्षोल्लास के साथ खुशहाल वातावरण से भर गया था क्योंकि हमने टाइम्स नेटवर्क में बिताए समय की यादें ताज़ा की।
यह फेयरवेल हमारी टाइम्स नेटवर्क की यात्रा को एक अंत देने का शानदार तरीका था। हम ऐसी प्रतिभाशाली और सहायक टीम के साथ काम करने के अवसर के लिए आभारी थे। हम जानते है कि जो अनुभव और सबक हासिल किए हैं वे हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेंगे। कल जब वहां से हम निकले और अलविदा कहा तो दो महीने में बिताए सारे फ्लैशबैक्स आ रहे थे। यह जानते हुए कि हम व्यक्तिगत और पेशेवर तरीके दोनों तरह से विकसित हुए हैं। सभी यादों को अपने साथ लेकर गए।
13 मई 2024 को टाइम्स नेटवर्क में समर इंटर्नशिप के लिए मेरा इंटरव्यू था और गीतांजलि मलिक मैम के साथ एक सुखद बातचीत थी। उस शाम को जब परिणाम घोषित हुए और मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि मेरा चयन हो गया है। मैं बहुत खुश था अपनी खुशी को रोक नहीं पा रहा था। एक दिलचस्प बात यहां यह है कि मैंने दैनिक अख़बार 'प्रभात खबर' में भी समर इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था और उसमें भी मेरा चयन हो गया था। टाइम्स नेटवर्क के मुकाबले प्रभात खबर डबल स्टाइपेंड दे रहा था, वर्क फ्रॉम होम घर से काम करने की सुविधा भी दे रखी थी। इसके बावजूद मैंने टाइम्स नेटवर्क को चुना क्योंकि मैं खुद को चुनौती देना चाहता था, थोड़ी रिस्क लेना चाहता था और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना चाहता था। मुझे पता था कि प्रभात खबर घर से काम करने की सुविधा दे रहा है। चाहता तो घर पर बैठे-बैठे बिस्तर पर लेटे हुए भी काम कर लेता लेकिन मैं खुद को आगे बढ़ाना चाहता था और भावनात्मक रूप से मजबूत होना चाहता था। टाइम्स नेटवर्क सही विकल्प साबित हुआ क्योंकि इसने मेरी सारी लिमिट्स को पुश किया, मुझे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाया।
अंत में, यह विकास कड़ी मेहनत समर्पण का समय था जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा और गर्व के साथ याद करूंगा। मैं आत्मविश्वास की एक नई भावना, इंडस्ट्री की गहरी समझ, अपने पेशे के लिए एक नए जुनून के साथ लौटा हूं। यह अनुभव वाकई परिवर्तनकारी रहा और टाइम्स नेटवर्क की टीम का हिस्सा बनने के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा!
~ नैवेद्य पुरोहित
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नेवेद्य,याद रखना की सीखना बंद तो जीतना बंद, और लगातार धैर्य के साथ मेहनत के बिना मंजिल नहीं मिलेगी। कंफर्ट जोन से निकले बिना और रिस्क लिए बिना कभी आगे नहीं बड़ सकते।
ReplyDeleteतुम अच्छे लेखक/पत्रकार बनोगे